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लखनऊः पूर्व मंत्री गायत्री प्रसाद प्रजापति को कोर्ट ने 14 दिन के लिए भेजा जेल

लखनऊ में कोर्ट ने पूर्व मंत्री गायत्री प्रसाद प्रजापति को 14 दिन के लिए जेल भेज दिया है. पुलिस ने गायत्री प्रजापति के खिलाफ मामले की पैरवी करने वाले एडवोकेट द्वारा लखनऊ के गाजीपुर थाने में एफआईआर दर्ज कराने के बाद यह कार्रवाई की है जिसके बाद कोर्ट ने उन्हें 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा है.

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पूर्व मंत्री गायत्री प्रसाद प्रजापति न्यायिक हिरासत में भेजे गए (फाइल-ANI)
पूर्व मंत्री गायत्री प्रसाद प्रजापति न्यायिक हिरासत में भेजे गए (फाइल-ANI)
स्टोरी हाइलाइट्स
  • वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए कोर्ट में पेश हुए प्रजापति
  • गायत्री का अभी केजीएमयू में पुलिस निगरानी में इलाज जारी
  • एडवोकेट दिनेश ने गाजीपुर थाने में दर्ज कराई थी FIR

लखनऊ में कोर्ट ने पूर्व मंत्री गायत्री प्रसाद प्रजापति को 14 दिन के लिए जेल भेज दिया है. पुलिस ने गायत्री प्रजापति के खिलाफ मामले की पैरवी करने वाले एडवोकेट द्वारा लखनऊ के गाजीपुर थाने में एफआईआर दर्ज कराने के बाद यह कार्रवाई की है जिसके बाद कोर्ट ने उन्हें 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा है.

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पुलिस कमिश्नर सुजीत पांडे के मुताबिक आरोपी को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से कोर्ट में पेश किया गया है. कोर्ट ने आरोपी मंत्री की 14 दिन की न्यायिक हिरासत मंजूर कर दी है. 

पुलिस के मुताबिक, गायत्री प्रसाद प्रजापति पर रेप का आरोप लगाने वाली महिला को गायत्री की ओर से मकान और प्लॉट दिया गया था. महिला को जो प्रॉपर्टी दी गई थी, वह गायत्री प्रसाद प्रजापति के चालक ने बेची थी. महिला गायत्री प्रसाद प्रजापति से मिलने केजीएमयू भी जाती रही है. सभी सबूतों को देखने के बाद प्रजापति को न्यायिक हिरासत में भेजा गया हालांकि आरोपी पूर्व मंत्री का अभी केजीएमयू में ही पुलिस की निगरानी में इलाज किया जाएगा.

जानकारी के मुताबिक गायत्री प्रसाद प्रजापति के खिलाफ दर्ज मुकदमे में पैरवी करने वाले एडवोकेट दिनेश चंद्र ने गाजीपुर थाने में एफआईआर दर्ज कराई थी, जिसमें उन्होंने आरोप लगाया था कि फरवरी 2019 में दुष्कर्म की एफआईआर दर्ज कराने वाली महिला ने उनसे गायत्री और अन्य आरोपितों के पक्ष में शपथ पत्र लगाने की बात कही थी.

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अधिवक्ता ने जब इसका विरोध किया तो वह नाराज हो गई और धमकी देने लगी थी. इसके बाद पूर्व मंत्री के साथ मिलकर महिला ने एडवोकेट के खिलाफ एफआईआर दर्ज करा दी थी. दरअसल, हाल में ही पूर्व मंत्री के खिलाफ गवाही देने वाले राम सिंह को पुलिस ने गिरफ्तार किया था, जिसके बाद उच्चाधिकारी हरकत में आए और मामले का संज्ञान लिया. पुलिस आयुक्त ने विवेचना में लापरवाही बरतने पर गौतमपल्ली थाने के इंस्पेक्टर और क्राइम ब्रांच में तैनात इंस्पेक्टर को निलंबित कर दिया था.

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