देश की सबसे बड़ी अदालत ने हरिद्वार में आयोजित धर्म संसद के दौरान दी गई हेट स्पीच को चुनौती देने वाली याचिका पर बुधवार को सुनवाई की. हेट स्पीच और धर्म संसद के खिलाफ याचिकाकर्ता के वकीलों ने अपनी दलीलें पेश की. जिस पर सुप्रीम कोर्ट ने नोटिस जारी कर संबंधित पक्षकारों से 10 दिन के भीतर जवाब दाखिल करने को कहा है.
सुप्रीम कोर्ट में याचिकाकर्ता कुर्बान अली और जस्टिस अंजना प्रकाश के वकील कपिल सिब्बल ने धर्म संसद के दौरान दिए गए विवादित भाषण के लिखित हिस्से को कोर्ट को सौंपा और कहा कि उनकी भाषा ऐसी है, जिनको वो अदालत में पढ़ नहीं सकते. उन्होंने कहा कि आने वाले समय में कुछ और धर्म संसद होने वाली हैं, जिनसे चुनावी माहौल बिगड़ सकता है.
इस पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वहां की सरकारें भी देख रही हैं.
कपिल सिब्बल ने सुप्रीम कोर्ट के पिछले फैसलों के हवाले देते हुए अदालत से कहा कि कोर्ट की नोडल अफसर संबंधी हिदायतों का पालन नहीं किया जा रहा है.
CJI की अगुवाई वाली तीन जजों की पीठ ने कहा कि हमें पता चला है कि किसी और पीठ के सामने भी ऐसे ही मामले की सुनवाई लंबित है.
याचिकाकर्ता के वकील कपिल सिब्बल ने कहा कि हमने तो ऐसी कोई अर्जी कहीं और नहीं लगाई है. हमें कहा गया कि जस्टिस खानविलकर की पीठ ने ये मामला आपके सामने लाने की बात कही थी.
वकील कालीश्वरम ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि जस्टिस चंद्रचूड़ की पीठ सुदर्शन टीवी के एक ऐसे ही कार्यक्रम को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई कर रही है.
अधिवक्ता शादान फरासत ने कहा कि वैसे तो हेट स्पीच के कई मामले हैं, लेकिन धर्मसंसद के जरिए नफरत फैलाने वाले ऐसे भाषण का ये पहला मामला है.
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अगर आप सभी ऐसे मामलों को यहां टैग करना चाहते हैं, तो ये मुमकिन नहीं है. हमने केंद्र और राज्य सरकारों को नोटिस जारी कर दिए हैं. दस दिन में जवाब मांगा है.
नोटिस का जवाब मांगे जाने की अवधि पर कपिल सिब्बल ने कहा कि आगामी 23 जनवरी को अलीगढ़ में भी धर्म संसद है. ऐसे में सोमवार को इस पर अगली सुनवाई जरूरी है.
जिस पर पीठ ने कहा कि याचिकाकार्ता उस धर्म संसद के बारे में अपनी आपत्तियों को वहां के स्थानीय निकायों और प्रशासन के सामने रखे. उन्हें इस संबंध में अवगत कराए.
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