
इटावा पुलिस ने कछुआ तस्करी मामले में अंतर्जनपदीय गिरोह के पांच सदस्यों को गिरफ्तार किया है. इनके पास से 2583 कछुए, 30 किग्रा कछुआ कैल्पी, 01 ट्रक, 01 ओमनी वैन एवं अवैध असलाह भी बरामद किए गए हैं. पकड़े गए कछुओं की कुल अनुमानित कीमत एक करोड़ रुपये बताई गई है. जिले में अपराध, अपराधियों एवं प्रतिबंधित वस्तुओं की तस्कारी की रोकथाम के लिए SSP इटावा आकाश तोमर ने जबरदस्त अभियान चलाया है, जिसके चलते इटावा पुलिस ने कछुआ तस्करी करने वाले पांच बदमाशों को गिरफ्तार किया है. जिनके पास से 2583 कछुए बरामद हुए हैं. यह कछुए ट्रक में भरकर तस्करी के लिए ले जाए जा रहे थे.
इस विशेष अभियान के तहत सभी क्षेत्राधिकारी और समस्त थाना प्रभारियों द्वारा क्षेत्र में निकलकर पूरे जनपद में सघनता से चेकिंग की जा रही थी. इसी दौरान थाना सैफई पुलिस टीम को सूचना मिली कि कुछ अज्ञात बदमाश करहल की ओर से एक ट्रक में भारी संख्या में अवैध कछुओं को लोड करके जसवंतनगर की ओर जाने की तैयारी कर रह रहे हैं.
पुलिस टीम द्वारा मुखबिर की सूचना के आधार पर त्वरित कार्रवाई करते हुए करहल से जसवंतनगर की ओर जाने वाले रास्ते 'दुमीला बॉर्डर' पर सघनता से चेकिंग प्रारम्भ की गई जिसमें करहल की ओर से आने वाले सभी वाहनों को सघनता से चेक किया जा रहा था.
इसी दौरान देर रात पुलिस टीम को करहल की ओर से एक ट्रक तथा मारुति वैन एक साथ आते दिखाई दिए, जिसे पुलिस टीम द्वारा टॉर्च की रोशनी दिखाकर रोकने का प्रयास किया गया. जिसके बाद ट्रक चालक ने ट्रक रोक लिया और उतककर भागने लगा. रात के अंधेरे का फायदा उठाकर ड्राइवर मौके से भागने में कामयाब रहा.
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पुलिस टीम की घेराबंदी के दौरान ट्रक से एक और मारुति वैन से चार लोगों को पकड़ा गया है. ट्रक से भारी मात्रा में कछुए और कछुए की कैल्पी बरामद हुई है. इसके साथ ही पकड़े गए अभियुक्तों की तलाशी लेने पर अवैध असलाह तथा अवैध चाकू भी बरामद हुए हैं.
पुलिस टीम की पूछताछ में अभियुक्तों ने बताया कि वे सभी लोग समायन पक्षी बिहार मैनपुरी व अन्य जगहों से कछुए पकड़ने का कार्य करते हैं तथा पकड़ने के बाद डिमांड के अनुसार विभिन्न स्थानों पर कछुओं की तस्करी का काम करते है. फिलहाल इस ट्रक में कछुए लोड कर वे लोग जनपद बरेली की ओर जा रहे थे.
जानकारों के मुताबिक कछुओं की तस्करी का मुख्य इस्तेमाल दवाई आदि के लिए होता है. दरअसल सेक्सुअल पावर बढ़ाने वाली दवाइयों में कछुओं के खोल और मांस का इस्तेमाल होता है. विदेशों में इन कछुओं की कीमत काफी ज्यादा होती है. इसके अलावा कछुओं को सुख समृद्धि का सूचक भी माना जाता है. जिसके कारण कई राज्यों में इनकी काफी डिमांड है.
बता दें, साल 1979 में लुप्त प्राय इन कछुओं को संरक्षित घोषित कर इन्हें बचाने की मुहिम शुरू की गई थी. इसके लिए चंबल नदी के तकरीबन 425 किलोमीटर में फैले तट से सटे हुए इलाके को राष्ट्रीय चंबल अभयारण्य घोषित किया गया था.