गाजा में हमास और इजरायल के बीच जारी जंग चरम पर है. सीजफायर की बातचीत बेनतीजा होने के बाद से ही इजरायली सेना ने गाजा के अलग-अलग इलाकों में जमीनी और हवाई हमले तेज कर दिए हैं. इन हमलों में पिछले पिछले 24 घंटों में 63 लोग मारे गए है. इसके साथ ही 7 अक्टूबर के बाद से गाजा पट्टी में मरने वालों की संख्या रविवार को 35 हजार से अधिक हो गई है.
इज़रायली सेना ने कहा है कि उसने उत्तरी गाजा में रातोंरात कार्रवाई शुरू कर दी है. मध्य गाजा के जिटौन और पूर्वी रफाह में आईडीएफ जबरदस्त हमले कर रही है. इसमें बड़ी संख्या में लोग हताहत हुए हैं. यही वजह है कि रफाह से फिलिस्तीनियों का पलायन बढ़ गया है. वहीं, इजरायल के सैन्य कार्रवाई के जवाब में हमास ने दक्षिण इजरायल में रॉकेट से हमला किया, जिसमें 3 लोग घायल हो गए.
उधर, हमास की कैद से इजरायली बंधकों की रिहाई के लिए नेतन्याहू सरकार पर घरेलू दबाब बढ़ता ही जा रहा है. हाल के दिनों में तेल अवीव में बंधकों के परिजन और दोस्त लगातार प्रदर्शन कर रहे हैं. शनिवार को एक बार फिर सैकड़ों लोग सड़कों पर उतर आए और इजरायल की सरकार से बंधकों को छुड़ाने के लिए हमास की ओर से दिए गए संघर्ष विराम प्रस्ताव को मानने की अपील की.
इसके साथ ही प्रदर्शनकारियों ने गाजा के रफाह में इजरायली सैन्य अभियान का विरोध किया. बंधक बनाए गए लोगों के परिजनों और दोस्तों को डर है कि यदि इजरायल रफाह में जमीनी अभियान चलाता है तो युद्ध लंबा खिंचेगा और ज्यादा बंधक मारे जाएंगे. एक प्रदर्शनकारी कोबी इत्ज़ाकी ने कहा, ''मुझे लगता है कि गाजा में इजरायली ऑपरेशन बंधकों के लिए नहीं, बल्कि सरकार को बचाने के लिए है.''
इजरायली झंडे और बंधक बनाए गए लोगों के पोस्टर के साथ तेल अवीव में प्रदर्शन कर रहे लोगों ने हाइवे को भी जाम कर दिया, जिसके बाद पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच हिंसक झड़पे हुई. इस दौरान पुलिस ने कई प्रदर्शनकारियों को गिरफ्तार कर लिया. इस प्रदर्शन में शामिल कुछ लोगों ने प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और उनकी वॉर कैबिनेट से तुरंत इस्तीफा देकर चुनाव कराने की मांग की है.
बताते चलें कि फिलिस्तीनियों के खिलाफ इजरायली सैन्य कार्रवाई की संयुक्त राष्ट्र आलोचना कर चुका है. यूएन महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने कहा है कि गाजा में मारे गए फिलिस्तीनियों की संख्या बहुत ज्यादा है. केन्या की राजधानी नैरोबी में एक सम्मेलन में बोलते हुए उन्होंने कहा कि रूस के हमले में यूक्रेन में पिछले दो सालों में जितने लोग नहीं मारे गए, उससे कही अधिक लोग पिछले कुछ महीने में गाजा में हताहत हुए हैं.
यूएन महासचिव ने रफाह में इजरायली सैन्य कार्रवाई को लेकर चेतावनी देते हुए कहा कि इससे भारी विनाश तय है. वहीं इन चेतावनी के बावजूद इजरायल दक्षिणी गाजा के रफाह में व्यापक पैमाने पर सैन्य ऑपरेशन चला रहा है. इस वजह से वहां पनाह लेने वाले लोगों पर इसके भयावह और विनाशकारी असर देखने को मिल रहे हैं. रफाह में गाजा की 22 लाख आबादी के आधे से अधिक लोग शरण लिए हुए हैं.
बड़ी तादाद में लोग टेंटों और अस्थायी शेल्टर होम्स में रह रहे हैं. संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने कहा था, ''पिछले कुछ महीनों में गाजा में जितने नागरिक मारे गए, उतने नागरिक दो वर्षों के दौरान रूस-यूक्रेन हमले में भी नहीं मारे गए.'' इस बीच अमेरिका ने अंदेशा जताया कि इजरायल ने गाजा में जंग के दौरान अमेरिकी हथियारों के इस्तेमाल से कुछ मौको पर अंतरराष्ट्रीय मानवीय क़ानून को तोड़ा है.
हालांकि अमेरिकी सरकार ने ये भी कहा है कि इस बारे में अभी पूरी जानकारी नहीं है. इसे लेकर अमेरिकी संसद में एक रिपोर्ट भी जमा हुई है. अमेरिकी राष्ट्रपति ने इस बात की जांच के आदेश दिए हैं कि इजरायल ने पिछले साल से भेजे गए अमेरिकी हथियारों का इस्तेमाल किस तरह किया है. पिछले 7 अक्टूबर से गाजा में जारी इजरायली सैन्य कार्रवाई में अबतक करीब 35 हजार फिलिस्तीनी मारे जा चुके हैं, जबकि 80 हजार से ज्यादा घायल हुए हैं.