
उदय मंदिर थाना पुलिस ने 30 सितंबर 1993 के दिन जोधपुर कलेक्ट्रेट पर हुए बवाल के मामले में 27 साल बाद बुधवार को महानगर मजिस्ट्रेट संख्या तीन में चार्जशीट पेश की है. खास बात यह है कि इस दौरान तत्कालीन समय में बनाए गए सभी आरोपी पेश हुए हैं, जो अब काफी बूढ़े हो चुके हैं. उनकी हालत देखते हुए कोर्ट ने उन्हें जमानत दे दी है. 27 साल बाद भी पुलिस इस मामले में पूरी चार्जशीट पेश नहीं कर पाई है. पुलिस इस अवधि में तीन आरोपियों को नोटिस तक नहीं भेज सकी है.
दरअसल जालोरी गेट पर 1993 में पहली बार भगवान गणेश की मूर्ति की स्थापना की गई थी, लेकिन इसके विसर्जन को लेकर आयोजकों और पुलिस-प्रशासन के साथ विवाद हो गया. विवाद ने इतना तूल पकड़ा कि प्रशासन के निर्देश पर पुलिस ने 29 सितंबर को मूर्ति का खुद ही विसर्जन कर दिया. इससे लोग और भड़क गए.
उस समय जोधपुर में संत रामसुखदास महाराज के प्रवचन चल रहे थे. वह इस घटना से बेहद आहत हुए. उन्होंने आह्वान किया कि वे इस घटना के विरोध में 30 सितंबर को ज्ञापन देने जाएंगे. जोधपुर बन्द का भी आह्वान किया गया. स्वामी रामसुखदास महाराज के नेतृत्व में हजारों की संख्या में लोगों की भीड़ कलेक्ट्रेट गेट पर जमा हो गई.
बीजेपी नेता दामोदर बंग, राजेंद्र गहलोत, मेघराज लोहिया भी इस प्रदर्शन में शामिल थे. ये लोग तत्कालीन कलेक्टर चन्द्र मोहन मीणा को ज्ञापन देने जा रहे थे. उसी दौरान कुछ लोग कलेक्ट्रेट परिसर में घुस गए, जिसके चलते अराजकता फैल गई. लोगों ने कलेक्ट्रेट परिसर में खड़ी एडीएम की जिप्सी को पलट दिया. कलेक्ट्रेट में जमकर तोड़फोड़ की.
यहां तक कि तत्कालीन जिला कलेक्टर मीणा को चूड़ियां तक पहना दी गई और महिलाएं, कलेक्टर की टेबल पर चढ़ गयी थी. साड़ी के पल्लू व चूड़ियां उन पर उछाल दी गयी. इस तोड़फोड़, लाठीचार्ज और पत्थरबाजी में दोनों पक्षों को चोट आई. इसके बाद पुलिस ने उदयमंदिर थाने में करीब 50 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया, जिसकी जांच पिछले 27 सालों से लगातार चल रही थी. लेकिन किसी भी पुलिस अधिकारी ने इसे पूरा नहीं किया.
बुधवार को जोधपुर महानगर मजिस्ट्रेट न्यायालय में उदयमंदिर एसएचओ राजेश यादव ने एक चार्जशीट पेश की है. हालांकि चार्जशीट में अभी भी कुछ लोगों को समन नहीं भेजा गया है. खास बात यह है कि सभी जोधपुर के नामचीन लोग हैं.
30 सितम्बर 1993 को जब प्रदर्शन हुआ था, तब इस मामले के सभी आरोपी युवा थे. पुलिस ने जो चार्जशीट पेश किए, उसमें 23 लोगों को आरोपी बनाया है. बुधवार को आठ आरोपी कोर्ट में पेश हुए वह सब वृद्ध हो चुके हैं. कई लोगों को चलने में भी दिक्कत हो रही थी. इसके चलते कोर्ट ने उन्हें 20-20 हजार के मुचलके पर जमानत दे दी है.
पुलिस की जांच इतनी लंबी चली कि छह आरोपी इस दुनिया से भी चल बसे. जिनमें मुरलीधर बोहरा, रमेश कुमार, पूनमचंद मूंदड़ा, प्रेमराज सोनी, कैप्टन रतनलाल देवड़ा और देवी सिंह शामिल हैं. वहीं पुलिस द्वारा पेश हुए चार्जशीट में कुल 23 लोगों को आरोपी बनाया गया है.
जिनमें भारतीय जनता पार्टी के पूर्व जिला अध्यक्ष प्रसन्नचंद्र मेहता तथा राजसीको के पूर्व चेयरमैन मेघराज लोहिया, वीरेंद्र अवस्थी पुत्र सदानंद, राज बहादुर मिश्रा पुत्र गंगाराम मिश्रा, प्रेमराज सोनी पुत्र रामदयाल सोनी, गोविंद मेहता पुत्र मोहनलाल मेहता, ओम भूतड़ा पुत्र पन्नालाल भूतड़ा, घनश्याम मुथा पुत्र भागीरथ मुथा, जितेंद्र लोढ़ा पुत्र शुबराज लोढा, सुनील मूंदड़ा पुत्र पूनमचंद मूंदड़ा, सुरेंद्र सिंह पुत्र मोहन सिंह कछवाहा, नरपत सिंह पुत्र राय सिंह रावणा राजपूत, देवी सिंह पुत्र राम सिंह, पूनम चंद पुत्र श्यामदास, कैप्टन रतन देवड़ा पुत्र भूराराम माली, श्रीमती सादानी पत्नी कन्हैयालाल साद, श्रीमती नैनी पत्नी राधेश्याम लखारा, रमेश सिंह पुत्र हरी सिंह राजपूत, राकेश कश्यप पुत्र शिवराज सिंह कश्यप, बाल किशन पुत्र रामलाल प्रजापत, सुरेश जैन पुत्र नेमीचंद, मुरलीधर बोहरा पुत्र हरिकिशन बोहरा, महेश चंद्र पुत्र मोतीलाल माली को इस मामले में आरोपी बनाया गया.
वहीं तीन अन्य आरोपी- पूर्व बीजेपी जिला अध्यक्ष प्रसन्नचंद मेहता ( वर्तमान में प्रदेश बीजेपी के उपाध्यक्ष), राजसीको के पूर्व चेयरमैन मेघराज लोहिया और महेशचंद को धारा 41 का नोटिस तामिल नहीं करवाया जा सका है. वहीं तीन आरोपी रतन हिंदू, मुकेश आचार्य व अशोक आचार्य को एक सप्ताह बाद 8 अक्टूबर को 1993 को अग्रिम जमानत मिल गयी थी. वहीं इस मामले में सुनील मूंदड़ा, जितेंद्र लोढ़ा, सुरेन्द्र सिंह, पुष्पा, बालकिशन व सुरेश जैन को 5 हजार के जमानती वारंट से तलब किया है.
थानाधिकारी यादव ने कोर्ट के समक्ष कहा है कि जल्दी वे इन सबको भी नोटिस तामिल करवा कर जांच कर अनुसंधान रिपोर्ट पेश करेंगे.