कानपुर का बिकरू गांव और गैंगस्टर विकास दुबे का नाम एक साल बाद भी लोग भूल नहीं पाए हैं. बिकरू गांव में ठीक एक साल पहले रात के वक्त विकास दुबे गैंग ने दबिश के लिए आई पुलिस टीम को घेरकर नरसंहार कर डाला था. डिप्टी एसपी समेत आठ पुलिसकर्मियों को गोलियों से भून डाला था. जिसके बाद अब आजतक की टीम ने खुद शुक्रवार को बिकरू गांव में जाकर सन्नाटे से भरे हालात का जायजा लिया.
बिकरू गांव में पच्चीस साल से दबंगई का शासन करने वाले विकास का अंत भले ही हो गया हो, लेकिन बिकरू की गलियों में आज भी उसकी दहशत बरकरार है. गांव की गलियों में सन्नाटा दिखता है. विकास की गुंडई की निशानी और पुलिसकर्मियों पर फायरिंग का अड्डा बनी उसकी कोठी अब धराशाई हो चुकी है. मकान के खंडहर में चारों तरफ घास उग आई है. अगर कोई मीडिया कर्मी वहां पहुंचता है तो आसपास के सभी घरों के दरवाजे अपने आप बंद हो जाते हैं.
गांव के काफी लोग अभी भी जेल में विकास की मदद के आरोप में बंद हैं. इसलिए कोई गांववाला साफ-साफ यह नहीं स्वीकार करता कि उस रात में उसने क्या देखा था. सब यही कहते है हम तो बाहर थे. जब लौटे तो पता चला कि इतनी बड़ी घटना हो गई. आठ-आठ पुलिसकर्मी मार दिए गए. बस गांववालों को एक दर्द है, उनके बिकरू गांव की पहचान ऐसी हो गई है कि लोग उनसे दूर भागते हैं और पुलिस भी हमेशा शक की नजर देखती है. अपने गांव का नाम बताने में भी इन लोगों को शर्म आती है.
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एक साल बाद बदली तस्वीर!
बिकरू गांव का प्रधान अब विकास की सरपस्ती से अलग हटकर चुना गया है. इस बार एक साल में सबसे बड़ा परिवर्तन यही हुआ है कि राकेश की पत्नी मधु अपने बल पर प्रधान चुनी गई है. हालांकि गांव का पंचायत भवन घटना की रात से ही बंद पड़ा है. प्रधान पति राकेश का कहना है कि एक साल में यहां की तस्वीर बदल गई है. पहले जो विकास दुबे आदेश देकर सब काम अपनी मर्जी से कराता था, अब वैसा नहीं है. यहां लोकतंत्र आ गया है. किसी को कोई परेशानी होती है तो वह सीधे 112 नंबर डायल करके पुलिस बुलाता है.
चार महिलाओं समेत 25 आरोपी जेल में
ठीक एक साल पहले 2 जुलाई की रात विकास दुबे ने अपने गैंग के साथ मिलकर सीओ देवेंद्र मिश्रा समेत आठ पुलिसकर्मियों को बेरहमी से मार डाला था. इसके बाद पुलिस ने विकास दुबे समेत उसके 6 शागिर्दों को एनकाउंटर में ढेर कर दिया था. पुलिस इस मामले में अब तक चार महिलाओं समेत 25 आरोपियों को जेल में डाल चुकी है. इसमें चौबेपुर का तत्कालीन थानेदार विनय अवस्थी और चौकी इंचार्ज दरोगा केके शर्मा भी शामिल है. जबकि इस घटना में आधा दर्जन से ज्यादा पुलिस अधिकारी विकास दुबे की मदद करने के चक्कर में जांच का सामना कर रहे हैं.
विकास दुबे के मां-बाप अब अपनी बेटी के साथ रहते है. गांव में उनका कोई नहीं रहता है. विकास की पत्नी ऋचा दुबे अपने दोनों बेटों के साथ लखनऊ में रहती है. वह कुछ दिनों पहले ककवन में अपनी तेरह बीघा जमीन का कब्जा लेने जरूर आई थी. वैसे ऋचा विकास की सम्पत्तियों की एक-एक जानकारी इकठ्ठा करने में लगी है.
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नहीं पूरे हुए सरकार के वादे
शहीद हुए पुलिसकर्मियों में किसी के परिजनों को अभी तक सरकार के वादे के मुताबिक नौकरी नहीं मिल पाई है. जबकि विकास दुबे का महिमा मंडन करने के लिए कई लोग उसके नाम से फेसबुक पेज और आईडी पर सक्रीय हैं कई लोगों ने तो विकास दुबे फैन्स क्लब तक बना रखें हैं. एक शख्स ने तो विकास दुबे की शॉर्ट वीडियो फिल्म तक बनाकर वायरल कर दी थी. हालांकि इन लोगों के खिलाफ पुलिस भी कोई कार्रवाई नहीं कर रही है.