राजस्थान के जयपुर में हुए करणी सेना प्रमुख सुखदेव सिंह गोगामेड़ी हत्याकांड में एनआईए ने कुख्यात गैंगस्टर गोल्डी बरार सहित 11 के खिलाफ चार्जशीट दाखिल किया है. एनआईए जांच में गोगामेड़ी हत्याकांड में आतंकवादी-गैंगस्टर सिंडिकेट की संलिप्तता का पता चला है. पिछले साल दिसंबर में जयपुर के श्याम नगर कॉलोनी में गोगामेड़ी की उनके घर में गोली मार दी गई थी.
इस हमले में दो अन्य लोग नवीन शेखावत और अजीत सिंह भी मारे गए थे, जबकि गोगामेड़ी का गनमैन नरेंद्र सिंह घायल हो गया था. पहले इस मामले की जांच राजस्थान पुलिस कर रही थी, लेकिन बाद में इसे एनआईए को सौंप दिया गया था. उस वक्त त्वरित कार्रवाई करते हुए जांच एजेंसी ने हत्या की साजिश में शामिल होने के आरोप में आठ लोगों को गिरफ्तार किया था.
एनआईए के बयान में कहा गया है कि गैंगस्टर महेंद्र कुमार, रावतराम स्वामी उर्फ रोहित गोदारा, वीरेंद्र चरण और सतविंदर सिंह उर्फ गोल्डी बराड़ सहित चार अन्य अभी भी फरार हैं. जयपुर में एनआईए की विशेष अदालत के समक्ष दायर अपने आरोपपत्र में एनआईए ने सभी 12 पहचाने गए आरोपियों पर भारतीय दंड संहिता, शस्त्र अधिनियम और यूएपीए के तहत आरोप लगाए हैं.
एनआईए की जांच में पता चला है कि रोहित गोदारा मुख्य साजिशकर्ता था. उसने आरोपी वीरेंद्र चारण, गोल्डी बरार और अन्य के साथ मिलकर हत्या की साजिश रची थी. हत्या के बाद रोहित गोदारा और गोल्डी बरार ने सोशल मीडिया के जरिए इसकी जिम्मेदारी ली थी. इसके बाद अपने डर का इस्तेमाल दूसरे लोगों को धमकाने और उनसे पैसे ऐंठने के लिए भी किया था.
जांच एजेंसी ने कहा कि गोगामेड़ी पर हमला करने के लिए रोहित और नितिन नामक दो हमलावरों को पिस्तौल और कई राउंड गोलियां दी गई थीं. गोगामेड़ी के घर से भागते समय दोनों ने एक आई-10 कार और एक स्कूटी सवार पर भी हमला किया था. भागने के लिए दोपहिया वाहन का इस्तेमाल किया था. आरोपी महेंद्र कुमार और उसकी पत्नी पूजा सैनी ने नितिन फौजी को पनाह दी थी.
एनआईए ने अपने बयान में कहा है, "राहुल ने हमले के लिए नितिन फौजी की सेवाएं लेने के लिए आरोपी भवानी सिंह की मदद ली थी. भवानी को अशोक कुमार नामक व्यक्ति ने हथियार और पनाह दी थी. उधम सिंह ने ही भवानी और राहुल के साथ मिलकर नितिन को साजिश को अंजाम देने के लिए जयपुर भेजा था. आरोपी रामबीर ने नितिन के बारे में जानते हुए भी शरण दी थी.
बताते चलें कि गैंगस्टर रोहित गोदारा अपने कई मामलों में सुखदेव सिंह गोगामेड़ी के दखल से नाराज था. इतना ही नहीं गोगामेड़ी गोदारा के दुश्मनों का पक्ष लेते थे. लिहाजा उसने रास्ते का रोड़ा हटाने की सुपारी अपने करीबी वीरेंद्र चारण को दी. वीरेंद्र ने अपने जानने वालों रोहित राठौर और नितिन फौजी से संपर्क किया. इसके बाद अपने गुर्गों के जरिए दोनों शूटरों को जयपुर में हथियार भेजवाए.
उसी हथियार से दोनों ने हत्याकांड को अंजाम दिया. वारदात के पहले और उसके बाद दोनों शूटर लगातार वीरेंद्र के संपर्क में थे. 5 दिसंबर से एक हफ्ता पहले ही हत्या की साजिश तय हो गई थी. नवंबर के आखिरी हफ्ते में ही सब कुछ तय हो गया था. जिम्मेदारी सौंप दी गई थी. हथियारों का इंतजार हो गया था. शूटर भी मुस्तैद हो गए थे. रेकी का जिम्मा मारे गए नवीन शेखावत ने पूरा कर लिया था.