
दिल्ली में पिछले साल किन्नर एकता जोशी की हत्या कर दी गई थी. एकता किन्नरों के गुरु की उत्तराधिकारी मानी जा रही थीं. लेकिन उससे पहले ही उनकी हत्या कर दी गई. पुलिस ने इस मामले में दो कॉन्ट्रैक्ट किलर्स को गिरफ्तार किया है, जिन्होंने पूछताछ में कई खुलासे किए हैं. पुलिस ने बताया कि किन्नरों के एक गुट ने दूसरे गुट की किन्नर की हत्या की साजिश रची थी.
दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने एक लाख और 50 हजार के दो इनामी कॉन्ट्रैक्ट किलर्स को गिरफ्तार किया है. पूछताछ में खुलासा हुआ कि किन्नरों के यमुनापार इलाके में बर्चस्व और पैसों के कलेक्शन की लड़ाई को लेकर किन्नर एकता जोशी का कत्ल किया गया था. इसके लिए 55 लाख रुपये की सुपारी दी गई थी.
क्या है इस पूरे कत्ल की कहानी, आइए शुरू से जानते हैं...
किन्नर के कत्ल की साजिश का सिरा ढूंढने के लिए चलते हैं जीटीबी एनक्लेव. यहां 6 डीडीए फ्लैट को मिलाकर किन्नरों ने एक बड़ा कंपाउंड बना लिया जो एक बड़ा बंगलानुमा घर तैयार हो चुका था. इसी आलीशान बंगले में किन्नर एकता जोशी भी रहा करती थीं. एकता के पिता दिल्ली के पूसा इंस्टिट्यूट में जॉब करते हैं.
किन्नरों की गुरु अनीता जोशी भी इसी कंपाउंड में साथ में रहती थीं. 5 सितंबर 2020 की रात के लगभग 9 बजे का वक्त था जब एकता शॉपिंग करने के बाद 9 बजे वापस घर लौटी. गाड़ी सडक पर कंपाउड के गेट पर रुकी. गाडी रुकने के बाद पिछली सीट पर बैठी एकता अपना वैनिटी बैग और शॉपिंग बैग लेकर नीचे उतरी. एकता ने अगली सीट का दरवाजा खोला और गुरु अनीता भी नीचे उतरीं. अगली सीट का दरवाजा बंद करके एकता अनीता मां के पीछे जैसे ही आगे बढ़ी, अचानक पीछे से तेजी के साथ आई एक सफेद रंग की स्कूटी उसके पास आकर हल्की रफ़्तार से चलने लगी. स्कूटी पर पीछे बैठे सवार ने एकता को बेहद करीब से एक के बाद एक चार गोलियां मारीं. उनकी मौके पर ही मौत हो गई.
ऐसे पकड़ में आए कातिल
पुलिस को पूछताछ में पता चला कि इसी कंपाउड में रहने वाली अनीता जोशी इस इलाके की गुरु हैं. जिन्होंने एकता जोशी को अपना उत्तराधिकारी घोषित कर दिया था. इसलिए पैसे के लेन-देन का सारा हिसाब एकता ही रखती थीं. किन्नर समाज में एकता का रुतबा बन चुका था. वो पूरी दिल्ली की गुरु बनने की रेस में शामिल हो गई थी. पुलिस को मुखबिर के जरिए इस बात की जानकारी मिली कि एकता जोशी की हत्या में कॉन्ट्रैक्ट किलर्स का इस्तेमाल किया गया है क्योंकि सीसीटीवी में साफ नजर आ रहा था कि गोली चलाने वाले बेहद प्रोफेशनल थे.
अब पुलिस ने कत्ल के दिन और उससे पहले इस इलाके में इस्तेमाल होने वाले मोबाइल फोन का डाटा डंप करना शुरू कर दिया. एकता जोशी की कॉल डिटेल से पता चला कि वो मेरठ, गाजियाबाद और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कई अपराधियों से फोन पर बातचीत करती थी. पुलिस तमाम कॉन्ट्रैक्ट किलर के नंबर तलाश रही थी. इसी बीच पुलिस को आमिर नाम के कॉन्ट्रैक्ट किलर की 5 सितंबर को मोबाइल लोकेशन दिल्ली में मिली. इस मोबाइल की लोकेशन जीटीबी एन्क्लेव में एकता के कत्ल के दौरान वहीं पाई गई.
साजिश का पहला सिरा पकड़ते ही पुलिस ने मेरठ के इस्माइल वाली गली से आमिर को गिरफ्तार कर लिया. आमिर के साथ एक और सोहेल नाम का शख्स गिरफ्तार किया गया. सोहेल के पास से भी पुलिस को ऑटोमैटिक पिस्टल और कारतूस बरामद हुए. पुलिस ने आमिर से जब सख्ती से पूछताछ की तो उसने खुलासा कर दिया कि किन्नर एकता का कत्ल गगन पंडित ने किया था. गगन पंडित ने 5 सितंबर की सुबह ही आमिर को मेरठ से दिल्ली बुला लिया था और अब उसे इंतजार था इशारे का और शाम में जैसे ही इशारा मिला तो काम शुरू हो गया. रात करीब 9 बजे एकता की कार उसके कंपाउंड के बाहर आकर रुकी, तो गगन ने थोड़ी दूर पर खड़ी अपनी स्कूटी स्टार्ट की और एकता के कार से बाहर निकलते ही उसके करीब जाकर गोलियां चला दीं. गोली मारने के बाद दोनों फौरन ही घटनास्थल से फरार हो गए. एकता की हत्या के बाद आमिर और गगन दोनों ही मेरठ वापस आ गए.
इसलिए हुई एकता की हत्या
कुछ दिनों बाद दिल्ली पुलिस ने जब आमिर को रिमांड पर लिया और पूछताछ में खुलासा हुआ कि वो पश्चिम विहार के डीडीए फ्लैट में रह रहे गगन पंडित के कहने पर एकता जोशी की हत्या में शामिल हुआ था. उसने ये भी बताया कि गगन ही इस हत्याकांड का मास्टर माइंड है और किन्नरों के एक दूसरे ग्रुप ने गुरु की गद्दी के विवाद में एकता की हत्या कराई थी.
दरअसल, दिल्ली के यमुना पार में किन्नरों के कई गुट हैं. एक गुट एकता जोशी और अनीता जोशी का था, जो जीटीबी एन्क्लेव में कोठी में रहता था. जबकि दूसरा गुट मंजूर इलाही का था, जो एकता और अनिता को अपना दुश्मन मानता था. अनिता, एकता को अपना उत्तराधिकारी बनाना चाहती थीं, जो मंजूर इलाही गुट को कतई पसंद नहीं था और यहीं से साजिश की नींव रखी गई.
मंजूर इलाही ने एकता जोशी की हत्या का प्लान बनाया और इसके लिए उसने गगन पंडित से संपर्क किया. गगन पंडित जानता था कि मामला करोड़ों की कमाई से जुड़ा है, इसलिए उसने कत्ल के लिए एक करोड़ रुपये मांगे, लेकिन 55 लाख रुपये में एकता की हत्या करने की सुपारी तय हो गई. सोनम, वर्षा, कमल और मंजूर इलाही ने एडवांस के तौर पर 15 लाख रुपये गगन को दे दिए. बाकी की रकम काम खत्म होने के बाद दी जानी थी.
ऐसे पकड़ा गया गगन पंडित
इस बीच गगन पंडित पर 1 लाख रुपये का इनाम घोषित कर दिया गया. यूपी एसडीएम और दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल गगन पंडित का सुराग तलाशती घूम रही थी. दक्षिणी रेंज के एसीपी अतर सिंह ने भी अपनी टीम के तेज तर्रार इंस्पेक्टर शिवकुमार को गगन पंडित की खोज में लगा दिया. इंस्पेक्टर शिवकुमार को 10 अप्रैल को सूचना मिली कि गगन पंडित अपने एक साथी के साथ निरंकारी समागम ग्रांउड से होकर किसी से मिलने के लिए स्कार्पियो गाड़ी से आने वाला है. इंसपेक्टर ने जाल बिछाया और जैसे ही गगन अपने साथी वरूण के साथ वहां आया तो उसको उसके गिरफ्तार कर लिया गया. दोनों के कब्जे से 0.32 बोर और 315 बोर के दो तमंचे समेत कारतूस बरामद हुए हैं. पुलिस को पूछताछ में पता चला कि गगन पंडित के साथ पकड़ा गया युवक वरूण उसका दाहिना हाथ था और उस पर भी 50 हजार रुपये का इनाम है.
गगन पंडित पहले भी हत्या के एक मामले के अलावा हत्या के प्रयास के 4 मामले, डकैती के 3 मामले, दिल्ली और यूपी में आर्म्स एक्ट, चोरी आदि के अन्य मामलों में शामिल है. वो पिछले साल दिल्ली में देशबंधु गुप्ता रोड पर लूट के एक अन्य मामले में भी वॉन्टेड चल रहा है.