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बर्दवान ब्लास्ट केसः एनआईए कोर्ट ने 4 आतंकियों को सुनाई 7 साल कैद की सजा

कोलकाता में एनआईए की विशेष अदालत ने बर्दवान ब्लास्ट केस की सुनवाई करते हुए चार आरोपियों को दोषी ठहराया है. अदालत ने चारों आरोपियों को 7 साल के कारावास की सजा सुनाई है. इन चारों दोषियों पर अदालत की ओर से आर्थिक जुर्माना भी किया गया है.

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बर्दवान जिले के खगरागढ़ इलाके में 2 अक्टूबर 2014 को जोरदार धमाका हुआ था
बर्दवान जिले के खगरागढ़ इलाके में 2 अक्टूबर 2014 को जोरदार धमाका हुआ था
स्टोरी हाइलाइट्स
  • 6 साल पहले बर्दवान में हुआ था धमाका
  • 33 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट
  • 31 गिरफ्तार, 2 आरोपी हैं फरार

कोलकाता में एनआईए की विशेष अदालत ने बर्दवान ब्लास्ट केस की सुनवाई करते हुए चार आरोपियों को दोषी ठहराया है. अदालत ने चारों आरोपियों को 7 साल के कारावास की सजा सुनाई है. इन चारों दोषियों पर अदालत की ओर से आर्थिक जुर्माना भी किया गया है. 

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ये हैं चार दोषी
पहले दोषी का नाम जियाउल हक है. उसे 11 जुलाई 2014 को गिरफ्तार किया गया था. दूसरे दोषी का नाम मोतीउर रहमान उर्फ भासा है. उसे 27 जनवरी 2015 को गिरफ्तार किया गया था. इन दोनों के खिलाफ आईपीसी की धारा 120 बी और 125, धारा 17, 18 और 20 गैरकानूनी गतिविधियां रोकथाम अधिनियम के तहत कार्रवाई की गई.

तीसरे दोषी की पहचान मोहम्मद युसुफ उर्फ बक्कर उर्फ युसुफ एसके के रूप में होती है. उसकी गिरफ्तारी 13 अक्टूबर 2016 को अंजाम दी गई थी. जबकि चौथे दोषी जहीरुल शेख को 11 अगस्त 2019 को गिरफ्तार किया गया था. इन दोनों के खिलाफ आईपीसी की धारा 120बी, 125, 419, 468, 471 और और गैरकानूनी गतिविधियां रोकथाम अधिनियम की धारा 16, 17, 18, 18 ए, 18 बी और 20 के तहत कार्रवाई को अंजाम दिया गया.  

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बम बनाते वक्त हुआ था धमाका
पश्चिम बंगाल में बर्दवान जिले के व्यस्त खगरागढ़ इलाके में 2 अक्टूबर 2014 को लगभग 12 बजकर 15 मिनट पर एक किराए के मकान की पहली मंजिल पर शक्तिशाली बम विस्फोट हुआ था. ये IED ब्लास्ट उस वक्त हुआ था, जब बांग्लादेश के प्रतिबंधित आतंकवादी संगठन जमात-उल-मुजाहिदीन (JMB) के सदस्य बम का निर्माण कर रहे थे. उनकी एक गलती से उस बम में धमाका हो गया था.

जेएमबी के सदस्यों ने बम बनाने के लिए ही किराए के घर पर कब्जा किया था. इस धमाके में 3 आतंकी घायल हो गए थे. जिनमें से एक की हालत गंभीर थी. शुरू में पश्चिम बंगाल पुलिस ने केस दर्ज कर कार्रवाई शुरू कर दी थी. लेकिन बाद में इस केस की जांच एनआईए के हवाले कर दी गई थी. 

भारत और बांग्लादेश के खिलाफ बड़ी साजिश
एनआईए ने इस केस की जांच में जेएमबी (जमात-उल-मुजाहिदीन, बांग्लादेश) की साजिश का पर्दाफाश किया था. ये आतंकी संगठन भारत में अपने सदस्यों को हथियारों और विस्फोटकों के संबंध में प्रशिक्षित करना चाहता था. नए भटके हुए युवाओं को बहला-फुसला कर उन्हें अपने संगठन में भर्ती करना और प्रशिक्षण देना जेएमबी का मिशन था.

इनका मकसद भारत और बांग्लादेश में लोकतांत्रिक रूप से स्थापित सरकारों को आतंकी गतिविधियों से अस्थिर कर युद्ध में झोंक देना था. इस मामले की जांच के दौरान बड़ी संख्या में आईईडी, विस्फोटक, हैंड ग्रेनेड और प्रशिक्षण के वीडियो बरामद किए गए थे.

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पहले 24 दोषियों को मिली थी सजा
इस मामले में विभिन्न अपराधों के लिए कुल 33 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की गई थी. जिनमें से 31 को गिरफ्तार किया गया था. इससे पहले 30 अगस्त 2019 को 19 अभियुक्तों और 15 नवबंर 2019 को 05 अभियुक्तों को एनआईए की स्पेशल कोर्ट ने दोषी ठहराते हुए सजा सुनाई थी. हालांकि बाकी बचे तीन गिरफ्तार और दो फरार आरोपियों के खिलाफ मुकदमा जारी रहेगा.

 

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