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Mumbai: थाईलैंड में नौकरी का झांसा देकर ठगी करने वाले रैकेट का पर्दाफाश, 2 गिरफ्तार

मुंबई पुलिस क्राइम ब्रांच ने थाईलैंड में नौकरी का झांसा देकर पैसा लूटने वाले एक जॉब रैकेट का पर्दाफाश किया है. ये लोग थाईलैंड में नौकरी का लालच देकर लोगों को बंधक बनाकर म्यांमार ले जाते हैं और उन्हें छोड़ने के एवज में मोटी रकम वसूलते हैं. इस मामले में दो लोगों को गिरफ्तार किया गया है.

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सांकेतिक तस्वीर
सांकेतिक तस्वीर

मुंबई पुलिस क्राइम ब्रांच ने नौकरी के नाम पर ठगी करने वाले गिरोह का पर्दाफाश किया है. इस संबंध में दो जॉब प्लेसमेंट एजेंट्स को गिरफ्तार किया गया है, जिन्होंने तीन युवाओं को थाईलैंड में रोजगार दिलाने का वादा किया था लेकिन उन्हें अगवा कर म्यांमार भेज दिया गया. म्यांमार में इन तीनों युवाओं को कैद कर रखा गया. शिकायत के मुताबिक, मुंबई से लगभग 70 लोग नौकरी घोटाले में फंसे हुए हैं और देशभर से इसकी संख्या हजारों में है, जिन्हें विपरीत परिस्थितियों में काम करने को मजबूर किया जा रहा है. 

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इस केस की जांच मुंबई क्राइम ब्रांच की यूनिट 9 कर रही है, जिन्होंने मुंबई के डोंगरी से उमर कादर चिरुवत्तम और सलीम उर्फ नवाज खान नाम के दो रिक्रूटमेंट एजेंट्स को गिरफ्तार किया है. इन दोनों को शनिवार को गिरफ्तार किया गया.

ये पीड़ित कथित तौर पर खुद को दुबई का बताने वाले एक शख्स के ऑनलाइन संपर्क में आए. इस शख्स ने अपना नाम यासिर बताया, जिसने थाईलैंड में चीन की डिजिटल मार्केटिंग कंपनियों में नौकरी का झांसा दिया. यासिर ने यह भी बताया कि उन्हें थाईलैंड में इस नौकरी से महीने का 1000 डॉलर से अधिक वेतन मिलेगा. इसके साथ ही इंसेंटिव भी दिए जाएंगे. इसके बाद शिकायतकर्ता ने अपना बायोडेटा और अन्य दस्तावेज यासिर को मुहैया कराए, जिसके बाद शिकायतकर्ता शख्स का नौकरी के लिए चुनाव किया गया. 

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थाईलैंड से बंधक बनाकर म्यांमार ले जाया गया

इसके बाद चुने गए लोगों को चिरुवत्तम और सलीम के संपर्क में भेजा गया, जिन्होंने एजेंट्स की भूमिका निभाई. इन्होंने पीड़ितों को अगस्त में थाईलैंड भेज दिया और उन्हें बकायदा फेंग नाम के एक चीनी नागरिक का नंबर दिया. फेंग का काम थाईलैंड में नौकरी की प्रक्रिया में इनकी मदद करना था. चिरुवत्तम और सलीम ने नौकरी के नाम पर पीड़ितों से 45000 से 50000 रुपये ऐंठ लिए.

पीड़ितों के थाईलैंड पहुंचने पर उन्हें एक होटल में ठहराया गया. अगले दिन तड़के ही इन्हें कार से ले जाया गया. कार से इन्हें किसी अज्ञात जगह ले जाया गया. वहां पहुंचने पर पीड़ितों को अहसास हुआ कि वे म्यांमार में हैं. 

पीड़ितों ने पुलिस को बताया कि म्यांमार से एक हजार से अधिक भारतीय नागरिक फंसे हुए हैं. उनसे जबरन ऑनलाइन काम कराया जा रहा है. यह काम यूरोप, अमेरिका और कनाडा के लोगों को लालच देकर उनसे क्रिप्टोकरेंसी में निवेश कराने का है. 

म्यांमार में पीड़ितों के विरोध करने पर उन्हें बहुत ही खराब परिस्थितियों में सुनसान जगह पर रखा गया. थाईलैंड में इनसे मिले फेंग नाम के शख्स ने इनसे कहा कि अगर वे यहां से जाना चाहते हैं तो उन्हें 6000 डॉलर (लगभग पांच लाख रुपये) भरने होंगे, उसके बाद ही वे म्यांमार से बाहर जा सकते हैं.

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इसके बाद पीड़ितो ने अपने परिवार को फोन कर इसकी जानकारी दी, जिसके बाद परिवार ने म्यांमार से उनकी रिहाई के लिए पांच लाख रुपये का भुगतान किया. पैसा मिलने के बाद सिर्फ तीन ही लोगों को भारत जाने दिया गया. 

पीड़ितों के मुताबिक, नौकरी का झांसा देकर लोगों को अगवा कर उन्हें लूटने का यह तरीका कॉल सेंटर की तरह है. सिर्फ उन्हीं लोगों को थाईलैंड में नौकरी का लालच दिया जाता है, जो अंग्रेजी में बात कर सकते हैं. 

वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मुंबई से लगभग 70 लोग इस घोटाले में फंसे हो सकते हैं जबकि देशभर से इसकी संख्या हजारों में बताई जा रही है. 

इस संबंध में बांद्रा और डोंगरी में एफआईआर दर्ज की गई है. क्राइम ब्रांच मामले की जांच कर रही है. आरोपियों को कस्टडी में रखा गया है और पुलिस उनसे पूछताछ कर रही है.

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