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पूर्व केंद्रीय गृह मंत्री सुशील कुमार शिंदे की बेटी और बेटे पर मनी लॉन्ड्रिंग का केस, ईडी ने कुर्क की संपत्ति

यह मामला यस बैंक से लिए गए फर्जी ऋण से संबंधित है. इसमें पीएमसी बैंक घोटाले के मुख्य आरोपी सारंग और राकेश वधावन भी हैं, जो एचडीआईएल (हाउसिंग डेवलपमेंट इन्फ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड) के प्रमोटर थे. इस मामले को मैकस्टार पीएमसी बैंक घोटाले के रूप में भी जाना जाता है.

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शिंदे के बेटे और बेटी के खिलाफ ईडी शिकंजा कस रही है
शिंदे के बेटे और बेटी के खिलाफ ईडी शिकंजा कस रही है
स्टोरी हाइलाइट्स
  • मुंबई के अंधेरी इलाके में ईडी की कार्रवाई
  • शिंदे के बेटे और बेटी की 2 संपत्ति अटैच
  • आधी कीमत पर खरीदी गई थी 2 संपत्ति

प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने मनी लॉन्ड्रिंग मामले में पूर्व केंद्रीय गृह मंत्री और महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री सुशील कुमार शिंदे की बेटी और बेटे के स्वामित्व वाली कंपनियों से संबंधित एक इमारत में दो ऑफिस अटैच कर लिए हैं. यह कार्रवाई मुंबई के अंधेरी इलाके में की गई. वो परिसर दो कंपनियों के नाम से है, जिनमें जिंदल कंबाइन्स प्राइवेट लिमिटेड और ऑरलैंडो ट्रेडिंग प्राइवेट लिमिटेड के नाम हैं. इन कंपनियों में सुशील कुमार शिंदे की बेटी प्रीति श्रॉफ और बेटे राज श्रॉफ प्रमुख शेयरधारक हैं.

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यह मामला यस बैंक से लिए गए फर्जी ऋण से संबंधित है. इसमें पीएमसी बैंक घोटाले के मुख्य आरोपी सारंग और राकेश वधावन भी हैं, जो एचडीआईएल (हाउसिंग डेवलपमेंट इन्फ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड) के प्रमोटर थे. इस मामले को मैकस्टार पीएमसी बैंक घोटाले के रूप में भी जाना जाता है.

प्रवर्तन निदेशालय के एक ट्वीट में कहा "ईडी ने राज श्रॉफ और उनकी पत्नी से संबंधित 35.48 करोड़ रुपये के वाणिज्यिक संपत्तियों को कुर्क किया है. राज श्रॉफ और उनकी पत्नी मैसर्स जिंदल कंबाइन प्राइवेट लिमिटेड और मैसर्स ऑरलैंडो ट्रेडिंग प्राइवेट लिमिटेड के मालिक हैं. यह कार्रवाई बैंक धोखाधड़ी मामले में पीएमएलए के अंतर्गत की गई है.

दोनों वाणिज्यिक परिसर अंधेरी पूर्व के प्रमुख स्थान में कलडोनिया भवन में स्थित हैं. जिसे एचडीआईएल (हाउसिंग डेवलपमेंट इन्फ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड) द्वारा विकसित किया गया था. और एक अन्य कंपनी ने मैकस्टार नामक अपनी संयुक्त उद्यम वाली सहायक कंपनी के जरिए इसे विकसित किया था.

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सूत्रों के अनुसार दोनों कार्यालयों को बाजार मूल्य के पचास प्रतिशत से अधिक की भारी छूट पर खरीदा गया था. उनमें से एक कार्यालय ऑरलैंडो ट्रेडिंग कंपनी के नाम पर 30 मार्च, 2016 को खरीदी गई थी. तब उसकी कीमत लगभग 20 करोड़ थी, जबकि उसके लिए केवल 10 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया था. इसी तरह से दूसरा कार्यालय 2014 में इससे पहले खरीदा गया था. उसे जिंदल कंबाइनों कंपनी के नाम से खरीदा गया था. उस संपत्ति की कीमत उस वक्त 15 करोड़ रुपये से अधिक थी. लेकिन कंपनी के शेयरधारकों ने उसके लिए लगभग 9.3 करोड़ रुपये का भुगतान किया था.

सूत्रों ने बताया कि ईडी के अधिकारियों ने पिछले दो महीनों में तीन बार राज श्रॉफ का बयान दर्ज किया था. सूत्रों के अनुसार श्रॉफ ने कहा था कि पूरा भुगतान मैकस्टार को नहीं किया गया था, क्योंकि डेवलपर्स ने कमिटमेंट पूरे नहीं किए थे. 

इसी मामले में पिछले महीने ईडी की टीम ने पूर्व अंडरवर्ल्ड डॉन जयेंद्र ठाकुर उर्फ ​​भाई ठाकुर और विधायक हितेंद्र ठाकुर के परिवार से जुड़े सदस्यों के स्वामित्व वाली वीवा ग्रुप की 34.36 करोड़ रुपये की दो कार्यालय संपत्ति भी अटैच की थी. ये संपत्ति अंधेरी पूर्व में उसी केडोनिया भवन में स्थित हैं, जिसका निर्माण और विकास HDIL (हाउसिंग डेवलपमेंट इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड) की सहायक फर्म मैकस्टार ने किया था.

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