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महाराष्ट्र: बच्चे को कुत्ते ने काटा, मालिक को कोर्ट ने सुनाई 6 महीने जेल की सजा

अदालत ने कुत्ते की मालकिन को 6 महीने जेल की सजा सुनाई. हालांकि, कुत्ते की मालकिन जो कि पेशे से डॉक्टर है, ने दावा किया कि कुत्ता उसका नहीं है. लेकिन अभियोजन पक्ष ने गवाहों के माध्यम से ये साबित किया कि डॉक्टर ही कुत्ते का मालिक थी. 

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प्रतीकात्मक चित्र
प्रतीकात्मक चित्र
स्टोरी हाइलाइट्स
  • 7 साल पहले कुत्ते ने बच्चे को काटा था
  • नागपुर की मजिस्ट्रेट अदालत ने सुनाई सजा
  • मालिक को भेजा 6 महीने के लिए जेल

नागपुर की मजिस्ट्रेट अदालत ने 7 साल पहले कुत्ते द्वारा एक बच्चे को काटने के मामले में फैसला सुनाया. अदालत ने कुत्ते की मालकिन को 6 महीने जेल की सजा सुनाई. हालांकि, कुत्ते की मालकिन जो कि पेशे से डॉक्टर है, ने दावा किया कि कुत्ता उसका नहीं है. लेकिन अभियोजन पक्ष ने गवाहों के माध्यम से ये साबित किया कि डॉक्टर ही कुत्ते की मालिक थी. 

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मजिस्ट्रेट अदालत में अभियोजन पक्ष ने कहा कि 30 सितंबर 2014 को एक मामला दर्ज किया गया था. जिसमें एक महिला ने आरोप लगाया था कि एक दिन पहले (29 सितंबर) लगभग 8.45 बजे उसका 9 साल का बेटा अपने दोस्त के साथ घर के बाहर कुत्तों को रोटी देने के लिए गया था. इसी बीच लगभग 9.00 बजे उसने अपने बेटे को चिल्लाते हुए सुना. घर के बाहर खड़ी उसकी बेटी ने उसे बाहर बुलाया.

महिला ने जब बाहर आकर देखा तो पता चला कि दो कुत्तों ने उसके बेटे को काट लिया है. ये देखते ही उसे चक्कर आ गया. बेटी और एक पड़ोसी ने उसके बेटे को इलाज के लिए अस्पताल पहुंचाया. इसके बाद महिला ने नंदनवन पुलिस स्टेशन में शिकायत इसकी दर्ज कराई. 

बाद में ये मामला अदालत पहुंचा, जहां सरकारी वकील ए राउत ने तर्क दिया कि आरोपी के खिलाफ लगाए गए अपराध के लिए दोषी ठहराया जाना चाहिए. जबकि डॉक्टर के वकील तुषार पिंजरकर ने तर्क दिया कि अभियुक्त के खिलाफ लगाए गए आरोप संदेह के आधार पर हैं. कुत्ते का स्वामित्व (मालिक) अभियोजन पक्ष द्वारा साबित नहीं किया गया है, साक्ष्य भी पर्याप्त नहीं है. इसलिए, अभियुक्त को संदेह का लाभ दिया जाना चाहिए. 

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हालांकि, मजिस्ट्रेट JD जादो ने आरोपी डॉक्टर के इस दावे को खारिज कर दिया कि कुत्ता उनका नहीं था. साथ ही यह भी मानने से इनकार कर दिया है कि वह स्ट्रे डॉग है. क्योंकि मामले में गवाहों के तौर पर स्ट्रे डॉग पकड़ने वालों दो लोगों के बयान लिए गए, जिन्होंने कहा कि आरोपी डॉक्टर के घर से दोनों ने घटना के बाद (बच्चे को काटने के बाद) कुत्ते को पकड़ा था. डॉक्टर ने स्वयं दस्तावेजों पर हस्ताक्षर किए थे. जिससे ये जाहिर होता है कि कुत्ता उन्हीं का था. 

जिसके बाद अदालत ने अभियुक्त के खिलाफ धारा 289 (जानवरों के संबंध में लापरवाहीपूर्ण आचरण) और 338 (दूसरों की व्यक्तिगत सुरक्षा को नुकसान) के तहत दोषी ठहराया. हालांकि, डॉक्टर ने सजा में राहत की मांग की और केवल जुर्माना लगाए जाने की दलील दी. लेकिन अभियोजन पक्ष ने अधिकतम सजा की मांग की और दलील दी कि अभियुक्त की लापरवाही के कारण पीड़ित का जीवन संक्रमण के कारण आज तक खतरे में है. दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने डॉक्टर को 6 महीने सजा का आदेश दिया. 

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