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दिल्ली : जामिया से B.Tech कर रहा था ISIS संदिग्ध, ऑनलाइन प्रोपेगैंडा फैलाने का दावा

इस समय देश आजादी का अमृत महोत्सव मनाने की तैयारियों में जुटा है. इससे ठीक पहले राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) के हाथ एक बड़ी सफलता लगी है. एनआईए ने दिल्ली के बाटला हाउस इलाके से ISIS के एक संदिग्ध को गिरफ्तार किया है. वो यहां रहकर आईएसआईएस के लिए फंड जुटा रहा था.

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आईएसआईएस संदिग्ध मोहसिन अहमद
आईएसआईएस संदिग्ध मोहसिन अहमद
स्टोरी हाइलाइट्स
  • दिल्ली के बाटला हाउस इलाके से गिरफ्तार
  • स्वतंत्रता दिवस से पहले NIA की कामयाबी

स्वतंत्रता दिवस (15 अगस्त) के जश्न से पहले नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (NIA) को बड़ी सफलता मिली है. जांच एजेंसी ने दिल्ली के बाटला हाउस इलाके से ISIS के एक संदिग्ध मददगार को गिरफ्तार किया है. आरोपी मोहसिन अहमद दिल्ली में रहकर ISIS के लिए फंड जुटा रहा था. वह जामिया यूनिवर्सिटी से बीटेक कर रहा है. अदालत ने उसे एक दिन की रिमांड पर भेज दिया है.

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इस साल 15 अगस्त का उत्सव वैसे भी खास होने वाला है, क्योंकि देश स्वतंत्रता दिवस की 75वीं वर्षगांठ मना रहा है. इस मौके पर देश में आजादी का अमृत महोत्सव चल रहा है, जिसके चलते कई तरह के कार्यक्रम आयोजित हो रहे हैं. ऐसे में एनआईए की ये धरपकड़ काफी बड़ी सफलता है. 

एनआईए ने मोहसिन को 6 अगस्त को गिरफ्तार किया. उसकी गिरफ्तारी बाटला हाउस इलाके के एक फ्लैट से हुई. सूत्रों के मुताबिक मोहसिन ISIS का ऑनलाइन प्रोपोगेंडा चला रहा था. जानकारी के मुताबिक मोहसिन बिहार का रहने वाला है. वह पिछले 6 महीने से बाटला हाउस में किराए पर रह रहा था. उसके साथ कुछ और साथी भी रहते थे, लेकिन उन्हें इसके काम के बारे में कोई जानकारी नहीं थी.

एनआईए को जांच के दौरान सोशल मीडिया पर मोहसिन की संदिग्ध गतिविधियों की जानकारी मिली थी. बाद में पता चला कि मोहसिन सोशल मीडिया के जरिये ऑनलाइन ISIS का प्रोपेगेंडा फैला रहा था. जांच में सामने आया कि मोहसिन खुद तो रेडिक्लाइज था ही, साथ में दूसरे युवकों को भी बहका रहा था.

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सूत्रों के मुताबिक आरोपी ISIS के लिए हिंदुस्तान में फंड इकट्ठा कर रहा था. एनआईए ने कुछ दिन पहले 6 राज्यों के 13 ठिकानों पर छापेमारी की थी. इन ठिकानों में से एक जगह देवबंद में थी, जहां से मोहसिन के बारे में जानकारी मिली थी.

सूत्रों के मुताबिक मोहसीन भारत और विदेशों से ISIS के लिए फंड इकट्ठा करता और उसे क्रिप्टोकरेंसी के जरिये सीरिया और ISIS के प्रभाव वाले अलग-अलग स्थानों पर भेजता था.  

मोहसिन बहुत टेक्नोसेवी है, इसलिए एजेंसियों से बचने के लिए एप्स के जरिए बातचीत करता था. जांच एजेंसी पता लगाने की कोशिश कर रही है कि मोहसिन कब ISIS से जुड़ा और कौन पैसे देकर उसकी मदद कर रहा था.

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