
पाकिस्तान हाई कमीशन (Pakistan High Commission) भारतीय एजेंसियों (Indian Agencies) के एक बार रडार पर है. दिल्ली पुलिस (Delhi Police) का दावा है कि पिछले तीन साल से पाकिस्तान हाई कमीशन में बैठा एक शख्स जासूसी का रैकेट (Spy Racket) चला रहा है. इस शख्स का कोड नेम कमल है.
पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी ISI के लिए जासूसी करने के आरोप में गिरफ्तार हबीब खान से मिलिट्री इंटेलिजेंस और दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच की पूछताछ में खुलासा हुआ है. दिल्ली पुलिस के मुताबिक, हिरासत में आया भारतीय सेना का एक क्लर्क कॉन्स्टेबल परमजीत लिंक मैंन था. परमजीत पहले पोखरण में तैनात था.
दिल्ली पुलिस के मुताबिक, हबीब को परमजीत सेना से जुड़े सीक्रेट डॉक्युमेंट देता था. बदले में परमजीत को 2 से 3 लाख रुपये मिलते थे. उसे अब तक लाखों रुपये मिल चुके हैं. परमजीत पहले पोखरण में तैनात था, बाद में आगरा में तैनाती हुई थी. हबीब खान को पाकिस्तान हाई कमीशन ने ट्रेप किया था.
दिल्ली पुलिस का दावा है, 'हबीब खान से कहा गया था कि अगर उसे अपने रिश्तेदार से मिलने पाकिस्तान जाना है तो उसे वीजा इस शर्त पर मिलेगा जब वो भारतीय सेना की गोपनीय जानकारी ISI को मुहैया कराएगा, हबीब को कैश पैसा, गोपनीय जानकारी जुटाने के बदले पाकिस्तानी हाई कमीशन से जुड़े लोग देते थे.'
कैसे हुआ खुलासा
दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच एक ऑपरेशन पर काम कर रही थी. तभी खबर मिली कि कुछ सेंसिटिव डॉक्यूमेंट्स हमारे दुश्मन देश को भेजे जा रहे थे. इसके बाद दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने मिलिट्री इंटेलिजेंस के साथ मिलकर हबीब खान को धर दबोचा. फिर आर्मी कॉन्स्टेबल परमजीत की भी पहचान हो गई.
बताया जा रहा है कि परमजीत जब पोखरण में पोस्टेड था, तब दोनों की मुलाकात हुई थी. परमजीत को हबीब ने ही पैसों का लालच देकर जानकारी देने के लिए तैयार किया था. इनके बैंक एकाउंट सीज किये गए. इसके साथ हबीब खान के घर से बरामद कागजात को लेकर आर्मी ने पुष्टि कर दी है. आर्मी के मुताबिक जो कागजात मिले हैं, वो काफी गोपनीय हैं.