इंडिगो के स्टेशन मैनेजर रूपेश कुमार सिंह के हत्या मामले में जांच कर रही पटना पुलिस की एसआईटी को महत्वपूर्ण सुराग मिले हैं, जिसमें सीसीटीवी फुटेज भी शामिल है. बुधवार को एसआईटी की टीम ने पटना एयरपोर्ट पर पहुंचकर वहां लगे तमाम सीसीटीवी कैमरे के फुटेज को खंगाला, जिसमें उन्हें कुछ अहम सुराग मिले हैं.
एसआईटी के हाथ लगे सीसीटीवी फुटेज के मुताबिक, अपराधियों ने रूपेश का पीछा करना पटना एयरपोर्ट से ही शुरू कर दिया था जब शाम के वक्त वह घर के लिए निकला था. सूत्र बताते हैं कि इस पूरे मामले में कम से कम 6 पेशेवर हत्यारे शामिल थे जो 3 बाइक पर सवार थे.
बताया जा रहा है कि रूपेश के एयरपोर्ट से निकलने के बाद यह तीनों लगातार उसकी गाड़ी का पीछा कर रहे थे और जैसे ही उसकी गाड़ी उसके अपार्टमेंट के गली में घुसी तो वहीं पर उन लोगों ने इस हत्याकांड को अंजाम दिया.
एसआईटी की टीम ने रूपेश के कुसुम विलास अपार्टमेंट के आसपास पर लगे सीसीटीवी कैमरे को भी खंगाला है, जिनमें से एक सीसीटीवी कैमरे में दो बाइक सवार को रूपेश की गाड़ी को ओवरटेक करते हुए देखा गया है. पुलिस को शक है कि यह दो बाइक सवार ही प्रोफेशनल किलर हैं, जिन्होंने रूपेश की हत्या की है.
रियल स्टेट और ठेकेदारी एंगल को लेकर हो रही है जांच:
रूपेश हत्याकांड की जांच कर रही एसआईटी की टीम को इस पूरे मामले में ठेकेदारी और रियल एस्टेट से जुड़े होने की आशंका है. बताया जा रहा है कि रूपेश कुमार सिंह का भाई ठेकेदारी का काम करता था. रूपेश के भाई के ठेकेदारी का काम छपरा और गोपालगंज में चलता था और इसी वजह से एसआईटी की टीम कल से ही लगातार छपरा और गोपालगंज में छापेमारी कर रही है.
बताया जाता है कि रूपेश कुमार सिंह इंडिगो के स्टेशन मैनेजर के तौर पर और खासकर अपने व्यवहारिक स्वभाव को लेकर बिहार के बड़े राजनेताओं और नौकरशाहों के साथ करीबी रिश्ते थे. सूत्र बताते हैं कि अपने इसी कनेक्शन का इस्तेमाल करके रूपेश अपने भाई को ठेकेदारी का काम भी दिलाया करता था. पुलिस इस एंगल पर जांच कर रही है कि ठेकेदारी में ही किसी प्रकार की रंजिश की वजह से तो रूपेश की हत्या नहीं की गई.
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रूपेश के मोबाइल फोन की भी जांच
एसआईटी ने रूपेश कुमार सिंह के मोबाइल को भी कब्जे में ले लिया है और उसकी जांच कर रही है. एसआईटी रूपेश के मोबाइल के कॉल डिटेल्स को खंगाल रही है और जानने की कोशिश कर रही है कि उन्होंने हत्या के दिन किन लोगों से बात की. अभी जानने की कोशिश कर रही है कि रूपेश कुमार सिंह आम तौर पर 3 लोगों से ज्यादा बात किया करते थे.
बताया जा रहा है कि जिस वक्त रूपेश की हत्या उसके अपार्टमेंट के बाहर हुई तो उसी दौरान उस इलाके में एक उत्तर प्रदेश का सिम कार्ड एक्टिव था.