राजस्थान उच्च न्यायालय की जोधपुर खंडपीठ ने दुष्कर्म से गर्भवती होने वाली नाबालिग पीड़िताओं को लेकर गंभीरता दिखाई है. आज भी एक नाबालिग के गर्भवती होने पर उसने उच्च न्यायालय के समक्ष गर्भपात की अनुमति के लिए आवेदन किया तो शीतकालीन अवकाश के बावजूद तत्काल एकलपीठ का गठन किया गया.
वरिष्ठ न्यायाधीश संदीप मेहता ने अवकाश के बावजूद एकलपीठ में पीड़िता की याचिका पर सुनवाई की और नोटिस जारी कर कहा कि मेडिकल बोर्ड गठित किया जाए. इसके साथ ही दो दिन में रिपोर्ट भी तलब की है. जोधपुर के ग्रामीण क्षेत्र की पीड़िता की ओर से याचिका में बताया गया कि उसके साथ दुष्कर्म की घटना हुई थी. जिसकी वजह से वह गर्भवती हो गई.
वर्तमान में उसके गर्भ में 21 सप्ताह का भ्रूण पल रहा है जिसको वह गिराना चाहती है लेकिन कानूनी तौर पर अनुमति आवश्यक है इसीलिए याचिका पेश की गई है. न्यायाधीश मेहता ने अप्रार्थी सरकार के अतिरिक्त महाधिवक्ता पंकज शर्मा को नोटिस जारी किया. नोटिस जारी करते हुए एमडीएम अस्पताल के अधीक्षक को तत्काल मेडिकल बोर्ड गठित करने का आदेश दिया गया है.
इतना ही नहीं पीड़िता का मेडिकल कर 31 दिसंबर को रिपोर्ट पेश करने के निर्देश जारी किए है. वहीं, अगली सुनवाई के दौरान पीड़िता को भी न्यायालय में उपस्थित रहने के निर्देश जारी किए गए हैं.