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शाहजहां शेख की गिरफ्तारी के 8 दिन बाद संदेशखाली के थाना प्रभारी पर गिरी गाज

वेस्ट बंगाल सरकार ने स्थानीय टीएमसी नेताओं के खिलाफ यौन शोषण और जमीन हड़पने के आरोपों को लेकर चल रहे हंगामे के बीच शनिवार को संदेशखाली पुलिस थाने के प्रभारी विश्वजीत शांपुई का तबादला कर दिया है. उनकी जगह गोपाल सरकार को तैनात किया गया है.

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संदेशखाली पुलिस थाने के प्रभारी विश्वजीत शांपुई का तबादला कर दिया गया है.
संदेशखाली पुलिस थाने के प्रभारी विश्वजीत शांपुई का तबादला कर दिया गया है.

वेस्ट बंगाल सरकार ने स्थानीय टीएमसी नेताओं के खिलाफ यौन शोषण और जमीन हड़पने के आरोपों को लेकर चल रहे हंगामे के बीच शनिवार को संदेशखाली पुलिस थाने के प्रभारी विश्वजीत शांपुई का तबादला कर दिया है. उनकी जगह गोपाल सरकार को तैनात किया गया है, जो कि पहले बशीरहाट पुलिस जिले में ओसी के रूप में कार्यरत थे. पुलिस अधिकारियों ने इस तबादले को नियमित प्रशासनिक कार्रवाई बताया है.

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1 मार्च को टीएमसी नेता शाजहां शेख की गिरफ्तारी के बाद राज्य सरकार ने बशीरहाट पुलिस जिले से दो अधिकारियों को हटा दिया है. संदेशखाली में यौन उत्पीड़न और जमीन हड़पने के मामले में मुख्य आरोपी शाहजहां शेख 55 दिनों से फरार था. उसको पुलिस ने 5 जनवरी को संदेशखली में ईडी अधिकारियों पर हमले के सिलसिले में गिरफ्तार किया था, जिसके बाद राज्य सरकार ने मामला सीआईडी को सौंप दिया था.

कलकत्ता उच्च न्यायालय के आदेश के बाद बुधवार को सीबीआई ने वेस्ट बंगाल सीआईडी से शाहजहां शेख की हिरासत हासिल कर ली थी. सुंदरबन के किनारे स्थित संदेशखाली क्षेत्र शेख और उसके सहयोगियों के खिलाफ यौन शोषण और भूमि हड़पने के आरोपों के कारण एक महीने से अधिक समय तक अशांति में घिरा रहा था. यह क्षेत्र बशीरहाट पुलिस जिले के अधिकार क्षेत्र में आता है. इसकी चर्चा पूरे देश में थी.

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शाहजहां शेख की पहचान टीएमसी के एक ताकतवर और प्रभावशाली नेता के तौर पर है. वो संदेशखाली यूनिट का टीएमसी अध्यक्ष भी रह चुका है. पहली बार शाहजहां शेख उस समय चर्चा में आया, जब 5 जनवरी को ईडी की टीम शाहजहां से बंगाल राशन वितरण घोटाला मामले में पूछताछ करने पहुंची थी, उस समय उसके गुर्गों ने ईडी की टीम पर हमला कर दिया था. इसके बाद से ईडी ने उसे लगातार समन जारी किया था.

यह भी पढ़ें: 43 केस, IPC की 17 धाराओं के तहत शिकंजा... संदेशखाली के विलेन के गुनाहों का हिसाब शुरू

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ईडी की टीम पर हमला होने के बाद संदेशखाली उस समय सुर्खियों में आया, जब वहां की महिलाओं ने शाहजहां शेख पर जमीन हड़पने और उसके गुर्गों पर यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया. इस मामले को लेकर लेफ्ट और बीजेपी पार्टियों ने ममता सरकार के खिलाफ जमकर विरोध किया. संदेशखाली में धारा 144 लगाकर विपक्ष के नेताओं को वहां जाने से रोका गया, हालांकि बीजेपी के नेताओं ने बंगाल से लेकर दिल्ली तक इस मामले को उठाया.

इसके बाद ममता सरकार पर दबाव बनाया गया कि संदेशखाली के सभी आरोपियों की गिरफ्तारी की जाए. हालांकि बंगाल पुलिस ने इसके गुर्गों को गिरफ्तार कर लिया था, लेकिन शाहजहां शेख पर हाथ डालने से पुलिस डर रही थी. कोलकाता हाई कोर्ट ने जब शाहजहां की गिरफ्तारी का आदेश दिया तो पुलिस ने एक्शन लेते हुए देर रात गिरफ्तार कर लिया था. लेकिन उसे सीबीआई को नहीं सौंपा गया. हालांकि, बाद में सीबीआई को कस्टडी दे दी गई.

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