दिल्ली के श्रद्धा वॉल्कर मर्डर केस में एक के बाद एक कई खुलासे हो रहे हैं. लेकिन पुलिस अब तक लाश का सिर (खोपड़ी) नहीं ढूंढ पाई है. इस मामले में अब एक और खुलासा हुआ है. आफताब लगातार श्रद्धा (27) से मारपीट करता था और इससे परेशान होकर मई 2020 में उसने अपने 2 दोस्तों से मदद मांगी थी.
दिल्ली पुलिस की एक टीम ने शनिवार को महाराष्ट्र के पालघर में 4 लोगों के बयान दर्ज किए, इसमें वो दो दोस्त भी शामिल हैं, जिनसे श्रद्धा ने मदद के लिए कहा था. दोनों वसई के ही रहने वाले हैं. इनका नाम राहुल रे और गॉडविन (godwin) है. एक रिक्शा चालक है तो वहीं दूसरा बेरोजगार है. मई 2020 में जब आफताब ने श्रद्धा को बुरी तरह से पीटा था, तब दोनों ने उसकी मदद की थी.
श्रद्धा के पूर्व मैनेजर से भी पूछताछ
इसके अलावा दो और लोगों के बयान और दर्ज किए गए हैं. इसमें से एक मुंबई के उस कॉल सेंटर का मैनेजर है, जिसमें श्रद्धा काम करती थी. वहीं, श्रद्धा के साथ कॉल सेंटर में काम करने वाली एक महिला मित्र से भी पूछताछ की गई है. दिल्ली पुलिस की एक 4 सदस्यीय टीम शुक्रवार को ही मुंबई पहुंच गई थी. टीम इससे पहले श्रद्धा के दोस्त लक्ष्मण नादर का बयान भी दर्ज कर चुकी है.
आफताब का परिवार फरार, ढूंढ रही पुलिस
दिल्ली पुलिस की एक टीम इस समय वसई जिले के पालघर के मानिकपुर में है. यह श्रद्धा का पैतृक क्षेत्र है. दिल्ली आने से पहले आफताब और श्रद्धा यहीं रहते थे. पुलिस के मुताबिक आफताब पूनावाला के परिवार के सदस्य मुंबई के पास मीरा रोड की एक बिल्डिंग में पिछले महीने ही शिफ्ट हुए थे. लेकिन श्रद्धा मर्डर केस का खुलासा होने के बाद से वे फरार हैं और उनका कोई पता नहीं चल पा रहा है.
आफताब के परिवार से मिले थे श्रद्धा के पिता
श्रद्धा के पिता विकास वॉल्कर ने शनिवार को दावा किया था कि वह इससे पहले वसई में आफताब के घर गए थे, लेकिन उसके परिवार ने उनका अपमान करने के बाद उन्हें दोबारा न आने की चेतावनी दी थी. श्रद्धा के पिता ने कहा था कि उन्हें इस बात की जानकारी नहीं थी कि उनकी बेटी कब दिल्ली शिफ्ट हो गई. उन्होंने श्रद्धा (27) के कातिल को कड़ी सजा दिलाने की मांग की है.
रिलेशन से नाराज था श्रद्धा का परिवार
श्रद्धा के पिता विकास मदान वॉल्कर के मुताबिक, 'बेटी श्रद्धा और आफताब अमीन पूनावाला के अफेयर के करीब 18 महीने बाद हमें दोनों के रिलेशनशिप का पता चला. बेटी ने अपनी मां से साल 2019 में कहा था कि वो आफताब के साथ लिव-इन रिलेशनशिप में है. इसका मैंने और मेरी पत्नी ने विरोध किया था.'
परिवार की बात ना मानकर चली गई थी श्रद्धा
विकास ने आगे बताया था, 'इस रिलेशनशिप को बढ़ाने से मना करने पर श्रद्धा ने कहा था कि मैं 25 साल की हो गई हूं. मुझे अपने फैसले लेने का पूरा हक है. मुझे आफताब के साथ लिव इन में रहना है. मैं आज से आपकी बेटी नहीं. यह कहकर वो घर से जाने लगी, तो मेरी पत्नी ने काफी मिन्नतें की. मगर, वो नहीं मानी और आफताब के साथ चली गई'.
पिता को हरकतों के बारे में बताया था
श्रद्धा के पिता के मुताबिक, 'बेटी के जाने के बाद उसके दोस्तों से पता चला कि दोनों नया गांव और फिर महाराष्ट्र में जाकर रहने लगे. कभी-कभी श्रद्धा अपनी मां को फोन करके बताती थी कि आफताब उसके साथ मारपीट करता है. इसी बीच उसकी मां की मौत हो गई.' मां की मौत के बाद एक-दो बार श्रद्धा ने अपने पिता को फोन किया. तब भी उसने आफताब की हरकतों के बारे में बताया. यही बात उसने घर आकर भी बताई थी. इस पर पिता ने आफताब को छोड़कर वापस घर लौट आने के लिए कहा था. मगर, आफताब के मनाने पर वह उसके साथ चली गई.
दोस्त ने सूचना दी- बंद है श्रद्धा का फोन
विकास के मुताबिक उन्हें उनकी बेटी के दोस्तों शिवानी माथरे और लक्ष्मण नादर ने बताया था कि श्रद्धा और आफताब के रिश्ते अच्छे नहीं हैं. आफताब उसके साथ मारपीट करता है. चूंकि कई बार मैंने उसे समझाया था. मगर, उसने बात नहीं मानी थी, इस वजह से पिता ने उससे बात नहीं की थी. इसी बीच 14 सितबंर को श्रद्धा के भाई श्रीजय को श्रद्धा के दोस्त लक्ष्मण ने फोन करके बताया कि उसकी बहन का फोन दो महीने से बंद है.
पिता ने दर्ज कराई थी गुमशुदगी की रिपोर्ट
श्रद्धा के पिता ने बताया कि अगले दिन उन्होंने अपने बेटे से बात की. उसने इस बारे में उन्हें बताया, तो उन्होंने लक्ष्मण से बात की और थाना मानिकपुर महाराष्ट्र में श्रद्धा की लापता होने की रिपोर्ट दर्ज कराई'. रिपोर्ट दर्ज कराने के बाद पता चला कि श्रद्धा आफताब के साथ दिल्ली में रह रही है. इस पर उन्होंने दिल्ली के महरौली थाने पहुंचकर आफताब के खिलाफ बेटी के अपहरण की एफआईआर दर्ज कराई.
दोनों के बीच शादी की बात पर लड़ाई हुई
पकड़े जाने पर आफताब ने पुलिस को बताया था कि 18 मई को दोनों के बीच शादी को लेकर लड़ाई हुई थी. इसके बाद उसने फ्लैट के अंदर ही पहले धारदार हथियार से श्रद्धा की हत्या की. फिर आरी से उसके हाथ के तीन टुकड़े किए. इसके बाद पैर के भी तीन टुकड़े किए. इसी तरह पूरी बॉडी के 35 टुकड़े कर दिए. आरोपी रोज पिट्ठू बैग में शव के कुछ टुकड़ों को लेकर शहर और जंगल के अलग-अलग इलाकों में जाता और ठिकाने लगा देता. उसे लगा था कि कोई भी इस तरह उसे पकड़ नहीं पाएगा.