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बाप-बेटे का झगड़ा, 65 लाख की सुपारी और 4 लोगों की हत्या... रोंगटे खड़े करने वाली है इस कत्ल की कहानी

कर्नाटक के गडग शहर में चार लोगों के हत्या की एक ऐसी वारदात सामने आई है, जिसकी कहानी हैरान कर देने वाली है. यहां एक बेटे ने अपने ही माता-पिता और छोटे भाई की हत्या की साजिश रच डाली. इतना ही नहीं एक किलर को 65 लाख रुपए की सुपारी दे दी. लेकिन एक कन्फ्यूजन की वजह से कातिलों ने बड़ी गलती कर डाली.

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कर्नाटक के गडग शहर में एक बेटे ने अपने ही परिवार की हत्या की सुपारी दे दी.
कर्नाटक के गडग शहर में एक बेटे ने अपने ही परिवार की हत्या की सुपारी दे दी.

दुनिया में कन्फ्यूजन यानी असमंजस के चलते क्या कुछ नहीं हो जाता! कई बार कन्फ्यूजन में कोई काम अधूरा रह जाता है, तो कभी करना कुछ होता है, लेकिन हो कुछ और जाता है. लेकिन यदि कोई ये कहे कि कन्फ्यूजन में ही उसने तीन कत्ल कर डाले, तो इसे आप क्या कहेंगे? जुर्म की ये रौंगटे खड़े कर देने वाली कहानी कुछ ऐसी ही है. जहां कत्ल किसी और का करना था, लेकिन कन्फ्यूजन में कातिलों ने एक-एक कर तीन ऐसे लोगों की जान ले ली, जिनका ना तो इनसे कोई लेना-देना था और ना ही कोई दुश्मनी थी. ये तीन लोग इसलिए मारे गए क्योंकि एक दिन पहले उनकी ट्रेन छूट गई थी. 

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कर्नाटक के गडग शहर की ये वारदात हैरान करती है. 18-19 अप्रैल की रात करीब सवा दो बजे दासर गली में रहने वाले लोगों को अचानक एक घर से चीखने चिल्लाने की आवाज सुनाई देने लगती है. ये घर किसी और का नहीं बल्कि गडग-बेटागेरी नगर पालिका के वाइस प्रेसिडेंट प्रकाश बकाले का है. चीखने वालों में खुद प्रकाश और उनकी पत्नी सुनंदा शामिल हैं. दोनों की चीख इतनी भयानक है कि लोगों को समझ में आ जाता है कि बकाले परिवार के साथ कोई ना कोई अनहोनी जरूर हो रही है. आनन-फानन में घर के बाहर मोहल्लेवालों की भीड़ जमा होने लगती है. देखते ही देखते पुलिस की क्विक रिस्पॉन्स टीम मौके पर आ पहुंचती है. लेकिन जैसे ही पुलिस बकाले परिवार के इस मकान में दाखिल होती है, उसके कदम ठिठक जाते हैं. 

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चंद मिनटों के अंदर इस घर में चार-चार लोगों का कत्ल हो चुका था. बकाले दंपति के 27 साल के बेटे कार्तिक और तीन रिश्तेदार परशुराम हदीमानी, उनकी पत्नी लक्ष्मी हदीमानी और उसकी 16 साल की बेटी आकांक्षा. लेकिन इतनी भयानक वारदात के बावजूद प्रकाश और सुनंदा बकाले की जान बच गई. असल में कातिलों ने जब इस घर पर धावा बोला तो बकाले दंपत्ति ग्राउंड फ्लोर पर अपने बेडरूम में सो रही थी. जबकि हदीमानी परिवार ऊपर की मंजिल पर सो था. हमलावर सीधे फर्स्ट फ्लोर की एक खिड़की से पहली मंजिल पर पहुंचे और वहां सो रहे हदीमानी परिवार को टार्गेट कर दिया.

उनकी चीख पुकार सुन कर ग्राउंड फ्लोर पर ही अपने कमरे में सो रहा बकाले दंपत्ति का बेटा कार्तिक भागता हुआ ऊपर की मंजिल पर गया. लेकिन बदकिस्मती से फर्स्ट फ्लोर पर जाना ही उसकी भी मौत की वजह बन गई. क़ातिलों ने उसे अपनी ओर आता हुआ देखा और उसे भी अपने निशाने पर ले लिया. ठीक हदीमानी परिवार की तरह ही कार्तिक पर भी कातिलों ने दाव या दरारी जैसे तेजधार हथियारों से वार किया और पलक झपकते ही उसकी भी जान ले ली. लेकिन घर पर हुए इस हमले के दौरान बकाले दंपत्ति को अनहोनी का अहसास हो गया था. उन्होंने सुरक्षा के लिए खुद को अपने बेडरूम ही बंद कर लिया. 

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उन्होंने दरवाजा अंदर से बंद कर लिया और वहीं से चीख-चिल्ला कर लोगों से मदद मांगने लगे. खुद प्रकाश बकाले ने अपने कमरे से ही मदद के लिए पुलिस को भी फोन किया. लेकिन जब तक पड़ोसी रिएक्ट करते, पुलिस मौका ए वारदात पर पहुंचती, क़ातिल इस मकान के फर्स्ट फ्लोर पर चार लोगों की जान ले कर फरार हो चुके थे. पुलिस जब मौके पर पहुंची, तो पूरा घर खून से सना हुआ था. खास कर पूरा का पूरा फर्स्ट फ्लोर. घर के सामान भी बिखरे हुए थे. पुलिस और पड़ोसियों को देखने के बाद ही खुद बकाले दंपत्ति भी अपने कमरे से बाहर निकला था. सबको ये लगा कि इस वारदात के पीछे डकैतों के किसी गिरोह का हाथ है. 

खैर इस मामले की जांच के लिए पुलिस ने कई टीमें बनाईं और सभी टीमों को अलग-अलग जिम्मेदारी दे दी गई. किसी को गडग और आस-पास के इलाकों में काम करने वाले डकैतों के गिरोह और उनकी गतिविधियों के बारे में पता करने की जिम्मेदारी दी गई, कोई टीम सीसीटीवी कैमरों की स्कैनिंग में लगी, एक टीम गडग दंपत्ति और दूसरे नाते-रिश्तेदारों से पूछताछ कर रही थी, जबकि एक टीम मोबाइल सर्विलांस और उससे जुड़े डेटा खंगाल रही थी. यानी पुलिस की तफ्तीश हर एंगल पर चल रही थी. इस कोशिश में पुलिस को बकाले दंपत्ति के घर पर धावा बोलने वाले कातिलों के कुछ सीसीटीवी फुटेज भी हाथ लगे. 

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हमलावरों का इरादा सिर्फ लूटपाट करना था या कुछ और?

लेकिन सीसीटीवी तस्वीरों से उनकी पहचान नहीं हो सकी. कातिलों ने घर की कुछ चीज़ें ज़रूर बिखेर दी थी, लेकिन मामला लूटपाट या डकैती का नहीं भी हो सकता था. कई बार मामले की जांच को भटकाने के लिए भी कातिल ऐसी हरकतें करते हैं. लिहाजा पुलिस ने दुश्मनी के एंगल से भी मामले को देखना शुरू किया. खास कर इसलिए क्योंकि उसे लग रहा था कि अगर हमलावरों का इरादा सिर्फ लूटपाट या डकैती करना होता, तो वो इतने लोगों की जान लिए बगैर भी ये काम कर सकते थे. कहीं ऐसा तो नहीं कि इन चार-चार कत्ल के पीछे की वजह लूटपाट नहीं बल्कि कुछ और हो?

इसके बाद पुलिस जांच आगे बढ़ी और पुलिस ने बकाले दंपत्ति से फिर से पूछताछ की. उनसे उनके घर-परिवार और नाते रिश्तेदारों को लेकर सवाल किए साथ ही ये भी पूछा कि उनकी किसी से दुश्मनी या लड़ाई तो नहीं है? इस कोशिश में पुलिस को एक अहम बात पता चली. प्रकाश बकाले ने बताया कि उन्होंने दो शादियां की हैं. सुनंदा उनकी दूसरी बीवी है, जबकि कातिलों के हाथों मारा गया कार्तिक उनकी दूसरी पत्नी यानी उनका और सुनंदा का बेटा है. जबकि बकाले को पहली पत्नी से भी एक बेटा है, विनायक, जो अलग रहता है. क्योंकि उसकी प्रकाश बकाले, सुनंदा और घर के बाकी लोगों से नहीं बनती है.

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प्रॉपर्टी को लेकर प्रकाश और विनायक के बीच हुई लड़ाई

प्रकाश बकाले ने पूछताछ में पुलिस को बताया कि उनकी अपने बड़े विनायक के साथ कुछ रोज़ पहले प्रॉपर्टी को लेकर लड़ाई भी हुई थी. असल में प्रकाश को बताए बगैर उनके बेटे विनायक ने उनकी तीन प्रॉपर्टीज का सौदा कर दिया था और इस बात को लेकर प्रकाश ने विनायक को डांटा था और बहस करने पर उसे देख लेने की धमकी भी दी थी. इस बीच छानबीन में पुलिस को पता चला कि 17 अप्रैल को ही प्रकाश और सुनंदा के बेटे कार्तिक की सगाई हुई थी और घर में कई मेहमान भी आए थे. लेकिन तब भी विनायक यहां नहीं आया था. हमले में मारे गए परशुराम हदीमानी, उनकी पत्नी और बेटी भी उन मेहमानों में थे.

उन्हें अगले रोज़ अपने घर चले जाना था. असल में हदीमानी परिवार को 18 अप्रैल को ही कोप्पल के लिए ट्रेन पकड़नी थी, लेकिन बदकिस्मती से उनकी ट्रेन छूट गई और वो बकाले दंपत्ति के साथ ही एक रात और रुक गए. लेकिन तकदीर का खेल देखिए कि ट्रेन के छूटने और एक रात के लिए और रुकने के उनके फैसले ने ही उनसे उनकी जिंदगी छीन ली. अब सवाल ये भी था कि यदि कातिलों ने किसी के कहने पर या फिर किसी दुश्मनी के चलते ही इस वारदात को अंजाम दिया, तो फिर उन्होंने बकाले परिवार के रिश्तेदार यानी हदीमानी परिवार के तीन लोगों की जान क्यों ले ली?

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मोबाइल की सीडीआर ने खोली साजिशकर्ता बेटे की पोल

इन्हीं सवालों के बीच अब पुलिस ने प्रकाश बकाले के बड़े बेटे विनायक के मोबाइल फोन की जांच शुरू कर दी. पुलिस ने जब उसके मोबाइल की सीडीआर निकलवाई, तो पता चला कि हाल के दिनों में उसकी कुछ खास नंबरों पर रह-रह कर कई बार बातचीत हुई थी. इनमें से दो मोबाइल नंबर ऐसे लोगों के थे, जिनका पहले से ही क्रिमिनल रिकॉर्ड था. बल्कि एक तो इलाके का हिस्ट्रीशीटर था. अब पुलिस ने एक तरफ बकाले परिवार के बड़े बेटे विनायक को हिरासत में लिया तो दूसरी तरफ उन बदमाशों की तलाश शुरू कर दी. थोड़ी पूछताछ के बाद ही पूरी कहानी साफ हो गई, जो कि बेहद हैरान करने वाली थी.

ये क़त्ल ना तो किसी लूटपाट का नतीजा था और ना ही कुछ और. बल्कि इस वारदात के पीछे खुद घर का बड़ा बेटा विनायक ही था. उसने ही अपने पिता प्रकाश बकाले, सौतेली मां सुनंदा और सौतेले छोटे भाई कार्तिक के क़त्ल की सुपारी दी थी. पुलिस की पूछताछ में अपना जुर्म कबूल कर लेने के बाद विनायक ने पुलिस को बताया कि उसने इस काम के लिए पूरे 65 लाख रुपए की सुपारी दी. एडवांस के तौर पर 2 लाख रुपए दिए थे, जबकि बाकि रुपए काम पूरा हो जाने के बाद देने थे. असल में विनायक अपने पिता के साथ प्रॉपर्टी को लेकर हुई झगड़े की वजह से काफी नाराज़ था.

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ट्रेन क्या छूटी, हदीमानी परिवार की जान ही चली गई

एक तो उसे लगता था कि उसके पिता प्रकाश अपने छोटे बेटे कार्तिक को ज्यादा प्यार करते हैं, ऊपर से उसे ये भी लगता था कि प्रकाश का व्यवहार उनके साथ भेदभाव से भरा है. विनायक ने कातिलों को सुपारी देने के साथ ही ये भी साफ कर दिया कि उन्हें घर में मौजूद तीन लोगों के जान लेने है. जिनमें दो उसके माता-पिता हैं, जबकि एक भाई. लेकिन क़ातिल ना तो उन सारे लोगों को पहले से पहचान थे और ना ही सुपारी देते वक्त विनायक ने अपने माता-पिता और भाई की पहचान ही कातिलों को ठीक से बताई थी. लिहाज़ा, जब कातिलों ने 18 और 19 अप्रैल की दरम्यानी रात को बकाले परिवार के मकान पर धावा बोला, तो उन्हें घर में जो भी सोता हुआ मिला, वो उन्हें ही टार्गेट करने लगे. इस तरह परशुराम हदीमानी, उनकी पत्नी और बेटी तो यूं ही मारे गए, जिनका दूर-दूर तक बकाले परिवार में चल रही इस लड़ाई से कोई लेना देना नहीं था. वो सगाई में शामिल होने पहुंचे थे और अगले रोज सुबह उन्हें वापस घर लौट जाना था. 

इसके बाद पुलिस ने विनायक की निशानदेही पर एक-एक कर उन सारे सात लोगों को गिरफ्तार कर लिया, जिन्होंने सुपारी लेकर कत्ल की इस वारदात को अंजाम दिया. इन कातिलों में कुछ का ताल्लुक कर्नाटक से है, जबकि कुछ का गोवा और कुछ का महाराष्ट्र से. कातिलों को गिरफ्तार करने बाद उनसे हुई पूछताछ में पुलिस को पता चला कि हदीमानी परिवार के तीन लोगों का कत्ल तो उनसे धोखे में हो गया और जब क़त्ल के दौरान बकाले दंपत्ति शोर मचाने लगी, तो उन्हें मौका ए वारदात से भागना ही ठीक लगा. वो फौरन मौके से भागे और अपनी गाड़ी तक पहुंचने से पहले घर के पास एक नाले में ही क़त्ल में इस्तेमाल किए गए दराती और चाकू जैसे हथियार फेंक कर फरार हो गए. पुलिस इस मामले आगे की जांच कर रही है.

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