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उन्नाव रेप केस: जमानत पर चल रहे कुलदीप सिंह सेंगर को झटका, मजबूरन करना पड़ा सरेंडर

उन्नाव रेप केस में दोषी कुलदीप सिंह सेंगर को मेडिकल आधार पर अंतरिम जमानत दी गई थी, लेकिन वो तिहाड़ जेल वापस आ गए हैं. बताया जा रहा है कि एम्स में उनका इलाज करने वाले डॉक्टर अभी उपलब्ध नहीं हैं. उनके वकील ने सोमवार को दिल्ली हाई कोर्ट में इस बात की जानकारी दी है.

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उन्नाव रेप केस में दोषी कुलदीप सिंह सेंगर को मेडिकल आधार पर अंतरिम जमानत दी गई थी.
उन्नाव रेप केस में दोषी कुलदीप सिंह सेंगर को मेडिकल आधार पर अंतरिम जमानत दी गई थी.

उन्नाव रेप केस में दोषी कुलदीप सिंह सेंगर को मेडिकल आधार पर अंतरिम जमानत दी गई थी, लेकिन वो तिहाड़ जेल वापस आ गए हैं. बताया जा रहा है कि एम्स में उनका इलाज करने वाले डॉक्टर अभी उपलब्ध नहीं हैं. उनके वकील ने सोमवार को दिल्ली हाई कोर्ट में इस बात की जानकारी दी है. 

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न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा और हरीश वैद्यनाथन शंकर की पीठ को कुलदीप सिंह सेंगर के वकील ने बताया कि 24 जनवरी को जेल वापस आ गए. एम्स के सर्जन, जो उसकी आंख की सर्जरी करने वाले थे, 30 जनवरी तक उपलब्ध नहीं थे. सेंगर इस वक्त तिहाड़ जेल में उम्रैकद की सजा काट रहे हैं.

वो अपनी मोतियाबिंद सर्जरी के लिए जमानत की खातिर 28 या 29 जनवरी को फिर से अदालत का रुख कर सकते हैं. अदालत ने उनके वकील से यौन अपराधों से बच्चों के संरक्षण अधिनियम के तहत मामले में उनकी अपील पर बहस शुरू करने को कहा है, जिस पर फरवरी में सुनवाई होनी है. 

22 जनवरी को अदालत ने उनको मेडिकल आधार पर अंतरिम जमानत दी थी. अस्पताल से छुट्टी मिलने के बाद 27 जनवरी से पहले आत्मसमर्पण करने का निर्देश दिया था. इस आदेश में यह भी स्पष्ट किया गया था कि यदि 24 जनवरी को सर्जरी नहीं हुई, तो सेंगर को उसी शाम सरेंडर कर देना चाहिए.

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पीड़िता के पिता की हिरासत में मौत से संबंधित मामले में भी कुलदीप सिंह सेंगर हिरासत में है. उस मामले में दस साल की जेल की सजा को निलंबित करने की उनकी याचिका एक अन्य पीठ के सामने लंबित है. मेडिकल आधार पर उनको दिसंबर 2024 में दो सप्ताह की अंतरिम जमानत दी गई थी. 

अगली सुनवाई में इसे एक महीने के लिए बढ़ा दिया गया था. हालांकि, दिल्ली हाई कोर्ट ने 20 जनवरी को जमानत की अवधि बढ़ाने से इनकार कर दिया था. सेंगर के वकील ने इस आधार पर 30 दिनों की अंतरिम जमानत मांगी थी कि उन्हें एम्स में मोतियाबिंद की सर्जरी कराने की सलाह दी गई थी.

उन्हें 24 जनवरी को भर्ती होना था, जिसे सीबीआई ने सत्यापित किया था. पीड़िता के वकील ने याचिका का विरोध किया. उन्होंने तर्क दिया कि कुलदीप सिंह सेंगर को अंतरीम अंतरिम जमानत नहीं दी जा सकती. पीड़िता और उसके परिवार को आरोपियों से धमकियां मिल रही हैं. ऐसे में वो कुछ भी कर सकते हैं.

अदालत ने राहत देते हुए कहा कि वर्तमान में कुलदीप सिंह सेंगर पर अंतरिम जमानत दिए जाने के समय लगाए गए किसी भी नियम और शर्त के उल्लंघन का कोई आरोप नहीं है. उनकी अंतरिम जमानत अवधि बढ़ाने की याचिका रेप केस में दिसंबर 2019 के ट्रायल कोर्ट के फैसले के खिलाफ उनकी अपील का हिस्सा थी. 

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साल 2017 में भाजपा से निष्कासित कुलदीप सिंह सेंगर ने नाबालिग लड़की का अपहरण कर उसके साथ बलात्कार किया था. रेप केस और इससे जुड़े अन्य मामले 1 अगस्त, 2019 को सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर यूपी की एक ट्रायल कोर्ट से दिल्ली हाई कोर्ट में स्थानांतरित कर दिए गए थे. ताकि कोई प्रभावित न कर सके.

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