दिल्ली उच्च न्यायालय ने सोमवार को उत्तर प्रदेश की एक 29 वर्षीय महिला को दी गई सुरक्षा की अवधि को बढ़ा दिया है. महिला ने पुलिस सुरक्षा की मांग करते हुए दिल्ली उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया था. महिला का कहना था कि उसने अपनी मर्जी से इस्लाम धर्म अपना लिया था. अब उसे डर है कि उसे जबरन वापस यूपी ले जाकर बलपूर्वक फिर से उसका धर्म परिवर्तन कराया जा सकता है.
अपनी याचिका में, महिला ने आरोप लगाया कि उसे और उसके परिवार को जान का खतरा बना हुआ है. उसे और उसके परिवार को यूपी पुलिस, मीडिया और विभिन्न संगठनों के पदाधिकारी अपना शिकार समझ रहे हैं. महिला ने कोर्ट से कहा कि उसके धर्मांतरण की वजह से उसे और उसके परिवार को निशाना बनाया जा रहा था और मीडिया में उनके बारे में दुर्भावनापूर्ण बातें दिखाई और छापी जा रही थीं.
महिला का कहना है कि 24 जून को उसने दिल्ली पुलिस कमिश्नर को एक पत्र भी लिखा, जिसमें सारी दिक्कत और परेशानियों के बारे में बताया गया. उसने पुलिस कमिश्नर से सुरक्षा की मांग करते हुए पत्र में कहा था कि उसे आगे कोई धमकी न दे और उसे जबरदस्ती यूपी वापस न ले जाया जाए.
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पुलिस की ओर से कोई कार्रवाई नहीं होने पर याचिकाकर्ता ने दिल्ली हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया. अपनी याचिका में महिला ने प्रार्थना करते हुए कहा कि उसे अपना धर्म चुनने के संवैधानिक अधिकार है. इस अधिकार के इस्तेमाल पर उसे किसी भी तरह से परेशान या टारगेट नहीं किया जाना चाहिए. साथ ही दिल्ली पुलिस को निर्देश दिए जाएं कि उसे उसकी मर्जी के खिलाफ दिल्ली उच्च न्यायालय के अधिकार क्षेत्र से बाहर ना भेजा जाए.
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यूपी पुलिस के जवाब का इंतजार
महिला को दिल्ली उच्च न्यायालय ने 22 जुलाई तक पुलिस सुरक्षा प्रदान की है. अब उसकी याचिका पर यूपी पुलिस को नोटिस भेजा गया है. इस मामले में हाई कोर्ट को अब यूपी पुलिस के जवाब का ही इंतजार है. इसके बाद अदालत आगे का फैसला लेगी.