वेब सीरीज बनने की वजह से दिल्ली का चर्चित सीरियल किलर चंद्रकांत झा एक बार फिर सुर्खियों में है. 7 लोगों की हत्या को अंजाम देने के आरोप में उसे कोर्ट ने फांसी की सजा सुनाई थी लेकिन बाद में सजा को उम्रकैद में बदल दिया गया. ऐसे में उसकी कहानी सुनकर आपके रोंगटे भी खड़े हो जाएंगे.
सीरियल किलर चंद्रकांत झा हर कत्ल के बाद खुद जानबूझकर सबूत छोड़ता था और लाश के टुकड़ों के साथ दिल्ली पुलिस को चुनौती देता था, पकड़ सको तो पकड़ कर दिखाओ.
दिल्ली के इस सनकी सीरियल किलर को जब तक दिल्ली पुलिस पकड़ती, उसने एक के बाद एक 7 क़त्ल की वारदातों को अंजाम दे दिया था. इनमें से तीन मामलों में उसे कोर्ट से सजा मिली, जिनमें से दो में फांसी और एक क़त्ल में उम्रकैद की सजा हुई थी.
सीरियल किलर चंद्रकांत झा फिलहाल दिल्ली की तिहाड़ जेल में बंद है और उम्रकैद की सजा काट रहा है. अदालत से दोषी करार दिए जाने के करीब 9 साल बाद एक बार फिर से चंद्रकांत झा चर्चा में है और वजह है उस पर बनी वेब सीरीज.
बिहार के मधेपुरा का रहने वाला चंद्रकांत झा दिल्ली में कभी सब्जी बेचता था तो कभी रिक्शा चलाता था. पकड़े जाने पर चंद्रकांत ने कत्ल की जो वजहें बताई वो चौंकाने वाली थी. किसी को इसलिए मार डाला कि उसने मछली खाने के बाद अपनी थाली नहीं हटाई, तो किसी पर ये शक था कि वो झूठ बोलता है.
आदर्श नगर में मिली थी पहली लाश
सीरियल किलिंग की ये कहानी 1998 में उस वक्त शुरू हुई थी जब दिल्ली के आदर्श नगर में पहली सिर कटी लाश मिली थी. इसके 5 साल बाद अलीपुर में एक कॉलेज के पास सिर कटी लाश मिली. ये लाश बिहार के रहने वाले शेखर की थी.
पकड़े जाने के बाद चंद्रकांत ने बताया था कि शेखर बहुत शराब पीता था और झूठ बोलता था. 5 महीने बाद 20 नवंबर 2003 को दिल्ली के तिहाड़ जेल के गेट नंबर 1 के बाहर एक सिरकटी लाश मिली. लाश प्लास्टिक बैग में बंद थी. ये लाश उमेश नाम के शख्स की थी, उमेश भी बिहार का रहने वाला था. चंद्रकांत ने बताया था कि वह झूठ बोलता था और विश्वास के लायक नहीं था.
फिर दो साल तक कोई लाश नहीं मिली, इधर दिल्ली पुलिस को इन दोनों कत्ल के मामले में कोई सुराग नहीं मिला था. पूरे दो साल बाद 2 नवंबर 2005 को मंगोलपुरी में नाले से एक लाश मिली. ये लाश बिहार के रहने वाले गुड्डू की थी.
दिल्ली पुलिस को चिट्ठी लिखकर चुनौती
इसके एक साल बाद 20 अक्टूबर 2006 को तिहाड़ जेल के गेट नंबर तीन के सामने एक सिर कटी लाश मिली. ये लाश भी प्लास्टिक के एक बैग में पैक थी, लेकिन इस बार दिल्ली पुलिस के लिए एक चिट्ठी थी.
चिट्ठी लिखकर कातिल ने दिल्ली पुलिस को खुलेआम चुनौती दी थी कि पकड़ सको तो पकड़ लो और साथ में दिल्ली पुलिस के लिए बेहद अपशब्द लिखे थे. कातिल ने दिल्ली पुलिस को सीधे तौर पर चुनौती दी थी कि गिरफ्तार करके दिखाओ.
कातिल चंद्रकांत किस कदर खुद को शातिर समझ रहा था कि उसने हरि नगर के थाने के एसएचओ को हरि नगर के ही एक पीसीओ से फोन किया और कहा कि हिम्मत है तो मुझे पकड़ कर दिखाओ.
अगली लाश 25 अप्रैल 2007 को मिली. यह लाश भी तिहाड़ जेल के गेट नंबर 3 के बाहर मिली और हमेशा की तरह लाश का सिर गायब था और साथ में दिल्ली पुलिस के लिए एक चिट्ठी थी जिसमें खूब सारी गालियां लिखी थीं. बाद में मृतक की पहचान दिलीप के रूप में हुई थी.
इसके बाद दिल्ली पुलिस ने तमाम मामलों को मिलाकर जांच शुरू की और जिस पीसीओ से चंद्रकांत ने फोन किया था उसके मालिक से पुलिस ने बात की.
ऐसे चढ़ा था दिल्ली पुलिस के हत्थे
चिट्ठी की हैंडराइटिंग को दिल्ली पुलिस ने मिलाया और फिर चंद्रकांत झा पुलिस के हत्थे चढ़ गया. सबूत के तौर पर पीसीओ मालिक की गवाही, चंद्रकांत के घर से मिला खून से सना चाकू और चाकू पर दिलीप के खून के निशान ने उसे दोषी ठहरा दिया.
दिल्ली पुलिस ने चंद्रकांत के खिलाफ कुल 2 चार्जशीट दाखिल की थी. पहली चार्जशीट अगस्त 2007 में दाखिल की गई जिसमें चंद्रकांत पर 6 क़त्ल का आरोप लगाया गया था. इसके 7 महीने बाद मार्च 2008 में दिल्ली पुलिस ने दूसरी चार्जशीट दाखिल की और चंद्रकांत पर सात कत्ल के आरोप लगाए.
2013 में कोर्ट ने सुनाई थी फांसी की सजा
2013 में कोर्ट ने चंद्रकांत को दोषी करार दिया और उसे फांसी और उम्रकैद की सजा एक साथ मिली. बाद में चंद्रकांत की फांसी की सजा को उम्रकैद में बदल दिया गया.
फिलहाल दिल्ली की तिहाड़ जेल में बंद चंद्रकांत को अपने ऊपर बने किसी वेब सीरीज की कोई जानकारी नहीं है. चंद्रकांत तिहाड़ के जेल नंबर तीन में बंद हैं. चंद्रकांत ने दो शादी की थी. दूसरी शादी से उसकी सिर्फ पांच बेटियां हैं. जानकारी के मुताबिक परिवार के लोग कभी-कभार उससे मिलने जेल आते रहते हैं.