पश्चिम बंगाल के दक्षिण 24 परगना जिले में एक 10 साल की मासूम बच्ची के साथ रेप करने के बाद उसकी हत्या करने के आरोपी को अदालत ने दोषी करार देते हुए सजा-ए-मौत सुनाई है. दोषी युवक की गिरफ्तारी, मुकदमा और फैसले की इस पूरी कार्रवाई के दौरान महज दो महीने का वक्त लगा. मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इस कार्रवाही की सराहना करते हुए इसे राज्य के इतिहास में अभूतपूर्व फैसला बताया.
दक्षिण 24 परगना जिले की यह वारदात इसी साल अक्टूबर महीने की है. जहां चौथी कक्षा में पढ़ने वाली दस वर्षीय छात्रा अचानक उस वक्त लापता हो गई थी, जब वह ट्यूशन क्लास से घर लौट रही थी. इसके बाद उसकी लाश 5 अक्टूबर को जयनगर के कुलतली इलाके में मौजूद एक तालाब से बरामद की गई थी.
पीटीआई के मुताबिक, बरुईपुर में अतिरिक्त जिला न्यायाधीश सुब्रत चट्टोपाध्याय की पोक्सो अदालत ने आरोपी को भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 65 (बलात्कार), 66 (पीड़िता की मृत्यु या उसे लगातार अचेत अवस्था में रखने के लिए सजा) और 103 (हत्या) के अलावा यौन अपराधों से बच्चों के संरक्षण अधिनियम के तहत दोषी ठहराया है.
अदालत ने इस घटना को दुर्लभतम मामला बताते हुए दोषी को मृत्युदंड दिया है. पुलिस ने 30 अक्टूबर को आरोप पत्र दाखिल किया और 5 नवंबर को शुरू हुआ मुकदमा मात्र 21 दिनों में पूरा हो गया. इस घटना के कारण इलाके में हिंसक विरोध प्रदर्शन हुए, जो कोलकाता से लगभग 50 किलोमीटर दूर है. प्रदर्शनकारियों ने वाहनों को आग लगा दी थी, एक पुलिस चौकी में तोड़फोड़ की और सड़कें जाम कर दीं थीं.
आरजी कर मेडिकल कॉलेज और अस्पताल में डॉक्टर के बलात्कार और हत्या के विरोध के बीच हुई इस घटना को लेकर राज्य सरकार ने जांच के लिए एक विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया था.
इस मामले को लड़ने वाले विशेष लोक अभियोजक बिभास चटर्जी ने कहा कि जिस तेजी से जांच और मुकदमा चलाया गया, उसे देखते हुए यह फैसला देश के आपराधिक न्यायशास्त्र के इतिहास में एक मिसाल कायम कर सकता है. उन्होंने कहा कि आरजी कर मेडिकल कॉलेज रेप और हत्याकांड को लेकर तीव्र ध्रुवीकरण के माहौल में, जहां न्याय के लिए आवाजें उठ रही हैं, कुलताली का फैसला यह साबित करेगा कि बंगाल की पुलिस और न्याय प्रणाली में सब कुछ गलत नहीं है. कुलताली में आरजी कर की कहानी को पलटने की क्षमता है.
फैसला सुनाए जाने के बाद, दरिंदगी और मौत का शिकार बनी मासूम के पिता ने मीडिया से कहा कि वे अदालत के शुक्रगुजार हैं. अपराधी को उसके अपराध की सजा मिलनी चाहिए.
उधर, राज्य की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इस फैसले की सराहना करते हुए इसे राज्य के इतिहास में अभूतपूर्व फैसला बताया. उन्होंने कहा कि इस तरह के मामले में दो महीने से भी कम समय में दोषसिद्धि और मृत्युदंड राज्य के इतिहास में अभूतपूर्व है. सीएम ने राज्य पुलिस और अभियोजन प्रक्रिया में शामिल सभी लोगों को इस उत्कृष्ट उपलब्धि के लिए बधाई दी.
उन्होंने कहा कि सरकार महिलाओं के खिलाफ अपराधों के प्रति शून्य सहिष्णुता रखती है और यह सुनिश्चित करना जारी रखेगी कि न्याय में न तो देरी हो और न ही इनकार हो. सीएम ने राज्य सचिवालय में पीड़िता के माता-पिता से मुलाकात की और उन्हें न्याय दिलाने में हरसंभव सहायता का आश्वासन दिया.
टीएमसी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी ने कहा कि अगला बड़ा कदम अपराजिता बलात्कार विरोधी विधेयक का देशव्यापी क्रियान्वयन है, क्योंकि मजबूत कानून ही ऐसे अत्याचारों के खिलाफ रोकथाम का एकमात्र तरीका है.