दिल दहला देने वाले कंझावला कांड में पुलिस जांच और सबूतों के हवाले से आरोपियों को कड़ी से कड़ी सजा दिलाने की बात कर रही है. मगर इस मामले में एक ऐसा किरदार है, जो पुलिस के लिए सबसे अहम माना जा रहा है. वो किरदार है हादसे की इकलौती चश्मदीद और अंजलि की सहेली निधि. इस किरदार की कहानी में कई ऐसी बातें हैं, जो उसे संदिग्ध बनाती हैं. उस पर शक करने की वजह देती हैं. आइए जानते हैं, निधि के अतीत की कहानी.
दिल्ली के कंझावला कांड यानी अंजलि की मौत के मामले में निधि इकलौती चश्मदीद गवाह है. वो दावा करती है कि हादसे से पहले अंजलि नशे की हालत में थी. उधर, यूपी की आगरा पुलिस निधि का सच बताती है. आगरा पुलिस की नजर में निधि एक ड्रग पेडलर है. दो साल पहले वो खुद नशे यानी गांजे के साथ आगरा में गिरफ्तार हो चुकी है. वो 15 दिनों के लिए आगरा की जेल में बंद थी. अंजलि केस की गवाह निधि पिछले दो सालों से जमानत पर बाहर है. ड्रग्स तस्करी के मामले में ही एक बार फिर से निधि पर गिरफ्तारी की तलवार लटक रही है.
ये वही निधि है, जो अंजलि की मौत की इकलौती चश्मदीद और उसकी दोस्त होने का दम भरती है. करीब दो साल पहले यही निधि आगरा पुलिस के हत्थे चढ़ गई थी. उसे हिरासत में लिया गया था. आप सोच रहे होंगे कि अंजलि की मौत की इकलौती चश्मदीद आखिर आगरा पुलिस की गिरफ्त में क्यों और कैसे आ गई थी? तो निधि का ये दूसरा चेहरा और पुराना सच जानने के लिए आपको दो साल पीछे जाना होगा.
पुलिस की हिरासत में मौजूद निधि की तस्वीरें पुलिस और मीडिया रिकॉर्ड में मौजूद हैं. लेकिन निधि की तस्वीरों का सच जानने के लिए आपको आगरा के जीआरपी, आगरा कैंट थाने में 6 दिसंबर 2020 को दर्ज की गई एक एफआईआर पर निगाह डालनी चाहिए. ये एफआईआर एनडीपीएस एक्ट की धारा 8 और 20 के तहत दर्ज की गई थी. वक्त दोपहर के 1 बजकर 17 मिनट और जगह थी, आगरा कैंट स्टेशन का प्लेटफॉर्म नंबर 3. उस एफआईआर में निधि का नाम अभियुक्त यानी मुल्जिम नंबर एक के खाने में दर्ज है. पता लिखा था, सुल्तानपुरी सी 7/11, झुग्गी नंबर-1, पोस्ट और थाना सुल्तानपुरी, उत्तरी दिल्ली.
अब सवाल ये है कि आखिर अंजलि केस की इकलौती गवाह निधि के खिलाफ दर्ज इस एफआईआर की कहानी क्या है? आखिर उसे आगरा कैंट की गर्वनमेंट रेलवे पुलिस ने क्यों और कैसे गिरफ्तार किया था? तो आइए ये कहानी जानने के लिए इस एफआईआर में लिखे इस मजमून को समझने की कोशिश करते हैं. जीआरपी की ओर से दर्ज इस एफआईआर में पुलिस ने लिखा है-
"प्लेटफॉर्म नंबर 3 पर सीढ़ियों के बराबर में बनी स्टील की बेंच पर बैठे दो व्यक्ति व एक लड़की हम पुलिसवालों को देख कर सकपका कर अपने दो हाथों में बैग लेकर तेज कदमों से स्टेशन पर दिल्ली साइड जाने लगे. जिनको रोका व टोका तो नहीं रुके. अत: शक होने पर हम पुलिसवालों ने एकबारगी दबिश देकर घेर कर ओवरब्रिज की सीढ़ियों के बराबर वाली स्टील की बेंच से करीब 30 कदम दूर महिला पुलिस कर्मी की मदद से पकड़ लिया. जिनसे हम पुलिस को देख कर भागने का कारण पूछने पर तीनों ने एक स्वर में कहा कि साहब, हमारे पास बैग में गांजा है."
इस मामले की जांच कर रही पुलिस ने तब निधि के साथ बिहार के औरंगाबाद में रहनेवाले समीर और दिल्ली के ही रहनेवाले रवि कुमार नाम के दो और लड़कों को नशे की खेप से साथ गिरफ्तार किया था. यानी ये लड़के भी निधि के साथ ड्रग्स सप्लाई के इस रैकेट का हिस्सा थे. एफआईआर के इस मजमून से साफ है कि आगरा पुलिस ने इसी निधि को अब से दो साल पहले आगरा कैंट रेलवे स्टेशन पर नशे की खेप यानी गांजा के साथ तब गिरफ्तार किया था, जब वो अपने दो साथियों के साथ आगरा कैंट होते हुए ड्रग्स लेकर दिल्ली जाने की फिराक में थी.
इस एफआईआर के मुताबिक निधि और उसके साथियों को पकड़ने के बाद जब पुलिस ने उनकी जामा तलाशी ली, तो निधि के पास से मोबाइल फोन और 2 सौ रुपये के अलावा 10 किलोग्राम गांजा बरामद किया गया था. इतना ही नहीं पूछताछ में निधि ने खुद बताया था कि ये गांजा वो तेलंगाना के सिकंदराबाद से लेकर आई है और इसे सड़क के रास्ते दिल्ली ले जाने की फिराक में थी.
जेल जाने के बाद निधि ने जमानत के लिए अर्जी लगाई. गिरफ्तारी के एक हफ्ते बाद उसे जमानत भी मिल गई. मगर जमानत कराने के लिए निधि के घर से कोई नहीं आया. इस वजह उसे जमानत मिलने के बाद भी एक हफ्ता और जेल में रहना पड़ा. यानी निधि कुल 15 दिनों तक आगरा की जेल में बंद रही थी. एक बार जमानत मिलने के बाद निधि आगरा से कुछ ऐसे गायब हुई कि उसके बाद दोबारा कभी किसी तारीख पर अदालत में हाजिर ही नहीं लगाई. यहां तक कि खुद निधि के वकील आसिफ आजाद की मानें तो वो अपने मुवक्किल के हक में अदालत में हाजिरी माफी की अर्जी लगाते-लगाते थक चुके हैं. ना तो वो बात करती है और ना ही उसका फोन मिलता है. वकील आसिफ आजाद ने तो यहां तक कहा कि निधि दो साल पहले आगरा में गिरफ्तार तो हुई थी, लेकिन उसकी जमानत करवाने तक उसके घर से भी कोई नहीं पहुंचा था. यहां तक कि उन्होंने आगरा से ही जमानती का इंतजाम किया था और तब कई बार आरजू मिन्नत करने के बाद निधि की मां दिल्ली से अपनी बेटी को लेने आगरा पहुंची थी और उसकी कस्टडी लेकर गई थी.
वैसे इस मामले में पुलिस की केस डायरी में दीपक नाम के एक शख्स का भी जिक्र आया है. जिसे लेकर फिलहाल रहस्य बरकरार है. असल में पुलिस की पूछताछ में तब गांजे की ये खेप निधि ने दिल्ली के रहनेवाले किसी दीपक की तरफ से मंगवाए जाने की बात कही थी. लेकिन आगरा पुलिस अब तक अपनी जांच में उस दीपक तक नहीं पहुंच पाई है. फिलहाल, सवाल ये है कि दिल्ली का वो दीपक कौन है? जो नशे की तस्करी के इस खेल में निधि के साथ शामिल था और जिसका जिक्र निधि ने जीआरपी आगरा कैंट की पूछताछ के दौरान किया था. दरअसल, अंजलि केस में भी दीपक नाम के एक शख्स का नाम आया है. अब सवाल यही है कि आखिर ये दीपक कौन है?
अंजलि की दोस्त और उसकी मौत के मामले की अहम चश्मदीद निधि के अतीत की कहानी के सामने आने के साथ ही अब उसकी गतिविधियों को लेकर नए सवाल उठाए जाने लगे हैं. सवाल निधि की कमाई के जरिए को लेकर भी हैं. दो साल पहले निधि दिल्ली के सुल्तानपुरी इलाके की झुग्गियों में रहती थी. जिसका जिक्र आगरा पुलिस की ओर से उसके खिलाफ दर्ज की गई एफआईआर में भी साफ देखा जा सकता है, लेकिन अब पता चला है कि निधि ने पिछले साल नवंबर में सुल्तानपुरी इलाके में ही 18 लाख रुपये का एक घर खरीदा है.