शबनम की फांसी का रास्ता साफ हो चुका है. वहीं इसी बीच इस केस के आईओ तत्कालीन इंस्पेक्टर आरपी शर्मा ने आजतक से हुई खास बातचीत में पूरे केस की सिलसिलेवार जानकारी दी. उन्होंने पूरा घटनाक्रम बताया कि किस तरह शबनम ने सलीम के साथ मिलकर अपने घर वालों को मौत के घाट उतारा.
शबनम का परिवार बहुत ही पढ़ा-लिखा था. उसके पिता सरकारी कॉलेज में लेक्चरार थे, भाई अनीस चंडीगढ़ में इंजीनियर था. शबनम दो विषय में एमए है और उसका प्रेम संबंध सामने रहने वाले लड़के सलीम से था, जो 8वीं पास है. शबनम एक प्राइमरी स्कूल में पढ़ाने जाती थी . जब सलीम से संबंध के बाद वो प्रेग्नेंट हुई तो घर वालों को इसका पता लगा.
शबनम ने अपने घर वालों से कहा कि वह सलीम से ही शादी करेगी लेकिन शबनम के पिता ने समाज और स्टेटस का हवाला देते हुए साफ मना कर दिया. इसके बाद शबनम ने योजना बनाई कि घर वाले तो शादी के लिए राजी नहीं हो रहे हैं तो क्यों न इन सभी को खत्म कर दिया जाए. जिससे वो और सलीम पूरी प्रॉपर्टी के मालिक बन जाएंगे और जिंदगी भर मौज करेंगे.
उस वक्त शबनम के दोनों भाई अनीस और रशीद घर आए हुए थे और उनको 14 अप्रैल 2008 को वापस जाना था. शबनम और सलीम तब तक पूरी योजना बना चुके थे. योजना के अनुसार शबनम ने भाइयों को बहका कर गजरौला से वापस बुला लिया.
शबनम ने सलीम से कहा कि वो उसे नशे की गोलियां लाकर दे जिससे सभी को बेहोश कर उन्हें मारा जा सके. सलीम ने 10 गोलियां मेडिकल से लाकर शबनम को दे दीं. शबनम ने गोलियां दूध में मिलाकर पूरे घर को दे दीं लेकिन 11 साल के भतीजे को दूध नहीं दिया. जब सब बेहोश हो गए तो सलीम और शबनम ने कुल्हाड़ी से सबका गला काट दिया. इसके बाद दोनों में ट्यूबवेल पर हाथ-पैर धोए.
इसके बाद सलीम अपने घर चला गया. जब शबनम ने देखा कि उसका भतीजा रह गया है तो उसने सलीम को दोबारा आने को कहा तो उसने आने से मना कर दिया. इसके बाद शबनम ने अपने 11 साल के भतीजे का गला दबा दिया. फिर रात को 12.30 बजे छत पर चढ़कर गांव वालों को आवाज लगाई कि मेरे सारे घर वालों को बदमाश आकर मार गए और सब लूट ले गए. इसके बाद सारा गांव जमा हुआ.
एक गांव वाले ने कहा कि बदमाश गए तो कैसे गए, ऊपर जाने वाला दरवाजा तो बंद है. इसके बाद शबनम ने कहा कि मैं दरवाजा खोलती हूं. जब गांव वाले ऊपर गए तो चारपाई के ऊपर डेड बॉडी पड़ी थी. इसके बाद पुलिस मौके पर पहुंची तो उस वक्त मैं अमरोहा का कोतवाल था और मेरी डयूटी घर के अंदर लगाई गई थी. जब मैंने पूरा केस समझा तो समझ आया कि ये केस वैसा नहीं है जैसा शबनम बता रही है, कोई अपराधी घर के अंदर का ही है.
16 तारीख को सुबह 8 बजे जाकर मैंने हसनपुर कोतवाली का चार्ज लिया. इसके बाद उन्होंने सिलसिलेवार कड़ियां जोड़ीं और इस केस को हल किया. जिला जज अमरोहा से इसको फांसी मिली. इसके बाद वह हाई कोर्ट गए फिर सुप्रीम कोर्ट गए. सुप्रीम कोर्ट से भी फांसी की सजा बरकरार रही.
उसके बाद उन्होंने राष्ट्रपति महोदय से निवेदन किया. वहां से भी फांसी की सजा बरकरार रही, कोई माफी नहीं दी गई. यह घटना भारत वर्ष की पहली घटना है कि किसी लड़की ने अपने पूरे परिवार के 7 आदमियों की प्रेम-प्रसंग में हत्या कर दी. उसने कहा कि ये मेरी मजबूरी थी. घर वाले शादी के लिए मना करते थे. इसका कोई अफसोस नहीं है कि यह हत्या की है. उसकी फांसी मथुरा जिला जेल में होनी है. भारतवर्ष में वह पहली महिला होगी जिसे फांसी की सजा दी जाएगी. सलीम को भी फांसी दी जाएगी.