बैंक फ्रॉड के एक केस में कथित तौर पर रिश्वत लेने के आरोप में सीबीआई के दो अधिकारियों को सस्पेंड कर दिया गया है जबकि दो अन्य सीनियर रैंक के अधिकारियों के खिलाफ प्रशासनिक कार्रवाई की गई है. सूत्रों के मुताबिक चारों का नाम रिश्वत लेने के मामले में सामने आया है. बीते बुधवार को सीबीआई ने अपने दफ्तर समेत कई अन्य जगहों पर तलाशी भी ली. बैंक फ्रॉड के मामले में रिश्वत लेने की एफआईआर में इन चारों के नाम भी शामिल हैं.
सूत्रों के मुताबिक सीबीआई की एंटी करप्शन यूनिट ने बुधवार को अपने दफ्तर समेत कई अन्य जगहों पर तलाशी ली. इंडिया टुडे को पता चला है कि गाजियाबाद की सीबीआई एकेडमी में तैनात डीएसपी रैंक के अधिकारी आरके ऋषि, ब्यूरो एंड मिनिस्ट्री पर्सनल कार्यरत डीएसपी आरके सांगवान के खिलाफ प्रशासनिक कार्रवाई शुरू कर दी गई है. जबकि बीएसएफसी (Banking Security & Fraud Cell) में इंस्पेक्टर पद पर तैनात कपिल धनकड़ और स्टेनो समीर कुमार सिंह को सस्पेंड कर दिया गया है. जांच एजेंसी का आरोप है कि ये लोग कई मामलों में रिश्वत के बदले जांच में समझौता कर रहे थे.
एफआईआर में कहा गया है कि श्री श्याम पल्प एंड बोर्ड मिल्स प्राइवेट लिमिटेड के एक केस में मंदीप कौर ढिल्लन की तरफ से आरके सांगवान को 10 लाख रुपये कैश रिश्वत दी गई. कंपनी के एडिशनल डायरेक्टर ने कपिल धनकड़ को यह बात बताई जिसके बाद कपिल ने जरूरी जानकारियां डीएसपी आरके सांगवान को दी और आरोपी की मदद करने की बात कही. आरोप है कि आरके ऋषि ने फ्रास्ट इंटरनेशन प्राइवेट लिमिटेड के डायरेक्टर सुजय देसाई और उदय देसाई की तरफ से जांच में पक्षपात करने में रुकावट बन रहे कपिल धनकड़ को 10 लाख की रिश्वत दी जिससे की मामला आगे रफा-दफा किया जा सके.
वहीं, डीएसपी आरके ऋषि को चंडीगढ़ की एक कंपनी पर भ्रष्टाचार के मामले में जांच प्रभावित करने के लिए वकील मनोहर मलिक और अरविंद गुप्ता की तरफ से दो बार 15 लाख की रिश्वत दी गई. इसी मामले में कपिल धनकड़ को भी दो बार 2.5 लाख की रिश्वत दी गई.
फ्रास्ट इंटरनेशन प्राइवेट लिमिटेड के खिलाफ 14 बैंको से 3500 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी का मामला दर्ज है. जिसकी जांच सीबीआई कर रही है. रिश्वत का मामला सामने आने के बाद सीबाआई ने 14 जगहों पर तलाशी की. इनमें दिल्ली, गाजियाबाद, नोएडा, गुरुग्राम, मेरठ और कानपुर शामिल हैं. इसके अलावा गाजियाबाद में सीबीआई एकडेमी में भी तलाशी की गई.