बिहार के सहरसा में कुख्यात अपराधी पप्पू देव की मौत पर बवाल हो रहा है. पुलिस का कहना है कि वो मुठभेड़ के दौरान भाग रहा था, लेकिन पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया और इसी दौरान उसे हार्ट अटैक आ गया. पुलिस उसे अस्पताल ले गई, जहां उसकी मौत हो गई. मुठभेड़ के वक्त उसके साथी भी साथ में थे. हालांकि, लोगों का आरोप है कि पुलिस हिरासत में पप्पू देव की मौत सामान्य घटना नहीं है, इसके लिए पुलिस जिम्मेदार है.
दरअसल, ये मामला बीते शनिवार की शाम का है. कुख्यात अपराधी पप्पू देव और उसके साथी हथियारों के बल पर सदर थाना क्षेत्र के सराही मुहल्ले में जबरन जमीन की घेराबंदी कर रहे थे. सूचना मिलने पर सदर थाना पुलिस मौके पर पहुंची तो तीन लोगों को हथियार और गोली के साथ गिरफ्तार कर लिया. जबकि कुछ बदमाश स्कोर्पियो में सवार होकर फरार हो गए.
गिरफ्तार किए गए बदमाशों से पूछताछ में पता चला कि फरार होने वालों में पप्पू देव और उसके कुछ साथी शामिल थे. ये जानकारी मिलने के बाद पुलिस ने बिहरा थाना क्षेत्र के बिहरा गांव में पप्पू देव के घर दबिश दी और वहां से भी दो लोगों को गिरफ्तार कर लिया.
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गिरफ्तार किए गए दोनों लोगों से जब पूछताछ की गई तो पता चला कि पप्पू देव गांव में ही उमेश ठाकुर के घर सो रहा है. पुलिस ने फौरन उमेश ठाकुर के घर छापेमारी की. लेकिन वहां मौजूद पप्पू देव और उसके साथियों ने पुलिस पर फायरिंग कर दी. जवाबी कार्रवाई में पुलिस ने भी फायरिंग की.
इस मुठभेड़ के दौरान पप्पू देव दीवार फांदकर भागने का कोशिश करने लगा. लेकिन वो गिर गया. पुलिस ने भागकर पप्पू देव को पकड़ लिया. पकड़े जाने पर उसने छाती में दर्द होने की शिकायत की. पुलिस उसे इलाज के लिये सदर अस्पताल ले गई. जहां इलाज के दौरान ही उसकी मौत हो गई.
पप्पू देव गैंग के खिलाफ की गई इस कार्रवाई के दौरान पुलिस ने एक रेगुलर रायफल, तीन पिस्टल, तीन देशी कट्टे और 47 कारतूस बरामद किए हैं. इस दौरान अलग-अलग स्थानों से पांच लोगों को गिरफ्तार किया गया है. उधर, इस मामले को लेकर स्थानीय लोग बवाल कर रहे हैं. लोगों का आरोप है कि पुलिस हिरासत में पप्पू देव की मौत सामान्य घटना नहीं है. इसके लिए पुलिस जिम्मेदार है.
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कौन था पप्पू देव?
जुर्म की दुनिया में पप्पू देव को 'कोसी का डॉन' कहा जाता था. इलाके में उसके नाम का सिक्का चलता था. उसके खिलाफ पुलिस थानों में कई मामले दर्ज हैं. वह काफी समय से अपराध जगत में सक्रिय था. उसने सामान्य घटनाओं के साथ-साथ कई संगीन वारदातों को भी अंजाम दिया था. पुलिस ने कई बार उसे पकड़ने की कोशिश की लेकिन वो पुलिस को चकमा देकर फरार हो जाता था. इस बार भी उसने ऐसी ही कोशिश की लेकिन वो कामयाब नहीं हो सका. वो स्थानीय पुलिस की मोस्ट वॉन्टेड लिस्ट में शामिल था. पुलिस काफी समय से उसकी तलाश कर रही थी.