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CrPC Section 29: जानिए, क्या होती है सीआरपीसी की धारा 29?

सीआरपीसी (CrPC) की धारा 29 (Section 29) दंडादेश (Sentence) के और इस संबंध में आदेश (Order) देने वाली अदालतों (Courts) के बारे में है. आइए जानते हैं कि सीआरपीसी की धारा 29 (Section 29) क्या बताती है?

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सीआरपीसी की धारा 29 दंडादेश के बारे में है
सीआरपीसी की धारा 29 दंडादेश के बारे में है
स्टोरी हाइलाइट्स
  • दंडादेश और मजिस्ट्रेट से संबंधित है धारा 29
  • दंडादेश देने वाली कोर्ट बारे में है ये सेक्शन
  • 1974 में लागू हुई थी सीआरपीसी (CrPC)

Code of Criminal Procedure यानी दंड प्रक्रिया संहिता में अदालत (Court) के आदेश और फैसलों से जुड़ी प्रक्रिया (Procedure) और उनसे जुड़े प्रावधान (Provision) मौजूद हैं. सीआरपीसी (CrPC) की धारा 29 (Section 29) जो दंडादेश (Sentence) के और इस संबंध में आदेश (Order) देने वाली अदालतों (Courts) के बारे में है. आइए जानते हैं कि सीआरपीसी की धारा 29 (Section 29) क्या बताती है?

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सीआरपीसी की धारा 29 (CrPC Section 29)

दंड प्रक्रिया संहिता (Code of Criminal Procedure) में धारा 29 (Section 29) उन मजिस्ट्रेट (Magistrates) के बारे में बात करती है, जो दंडादेश (Sentence) दे सकते हैं. (1) मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट का न्यायालय (Court of a Chief Judicial Magistrate) मृत्यु (sentence of death) या आजीवन कारावास (Imprisonment for life) या सात वर्ष से अधिक की अवधि के लिए कारावास के दंडादेश (Sentence) के सिवाय कोई ऐसा दंडादेश दे सकता है जो विधि (Law) द्वारा प्राधिकृत (Authorised) है.

(2) प्रथम वर्ग (First class) मजिस्ट्रेट का न्यायालय (The Court of a Magistrate) तीन वर्ष से अनधिक अवधि के लिए कारावास (Imprisonment) का या दस हजार रुपये से अनधिक जुर्माने (Fine) का, या दोनों का, दंडादेश (Sentence) दे सकता है.

(3) द्वितीय वर्ग (Second class) मजिस्ट्रेट का न्यायालय (The Court of a Magistrate) एक वर्ष से अनधिक अवधि के लिए कारावास (imprisonment) का या पांच हजार रुपये से अनधिक जुर्माने (Fine) का, या दोनों का, दंडादेश (Sentence) दे सकता है.

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(4) मुख्य महानगर मजिस्ट्रेट (Chief Metropolitan Magistrate) के न्यायालय (Court) को मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (Chief Judicial Magistrate) के न्यायालय की शक्तियां (Powers) और महानगर मजिस्ट्रेट (Metropolitan Magistrate) के न्यायालय को प्रथम वर्ग मजिस्ट्रेट (First Class Magistrate) की शक्तियां होंगी.

इसे भी पढ़ें--- CrPC Section 28: जानें, क्या होती है सीआरपीसी की धारा 28? 

क्या होती है सीआरपीसी (CrPC)
सीआरपीसी (CRPC) अंग्रेजी का शब्द है. जिसकी फुल फॉर्म Code of Criminal Procedure (कोड ऑफ क्रिमिनल प्रोसिजर) होती है. इसे हिंदी में 'दंड प्रक्रिया संहिता' कहा जाता है. CrPC में 37 अध्याय (Chapter) हैं, जिनके अधीन कुल 484 धाराएं (Sections) मौजूद हैं. जब कोई अपराध होता है, तो हमेशा दो प्रक्रियाएं होती हैं, एक तो पुलिस अपराध (Crime) की जांच करने में अपनाती है, जो पीड़ित (Victim) से संबंधित होती है और दूसरी प्रक्रिया आरोपी (Accused) के संबंध में होती है. सीआरपीसी (CrPC) में इन प्रक्रियाओं का ब्योरा दिया गया है.

1974 में लागू हुई थी CrPC
सीआरपीसी के लिए 1973 में कानून (Law) पारित किया गया था. इसके बाद 1 अप्रैल 1974 से दंड प्रक्रिया संहिता यानी सीआरपीसी (CrPC) देश में लागू हो गई थी. तब से अब तक CrPC में कई बार संशोधन भी किए गए है.

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