दंड प्रक्रिया संहिता (Code of Criminal Procedure) यानी सीआरपीसी (CrPC) किसी भी केस में पुलिस को पीड़ित (Victim) और आरोपी (Accused) के संबंध में दिशा निर्देश देती है. पुलिस CrPC के अनुरूप ही कार्रवाई को अंजाम देती है. इस सिलसिले में हम सीआरपीसी की धारा 3 के बारे में आपको बता चुके हैं. अब हम बात करेंगे CrPC की धारा 4 (Section 4) के बारे में.
सीआरपीसी की धारा 4 (CrPC Section 4)
-1- दंड प्रक्रिया संहिता (Code of Criminal Procedure) की धारा 4 कहती है कि IPC यानी भारतीय दंड संहिता (1860 का 45) के अधीन सब अपराधों का अन्वेषण, जांच, विचारण और उनके संबंध में अन्य कार्यवाही इसमें, इसके पश्चात अन्तर्विष्ट उपबंधें के अनुसार की जाएगाी.
- 2- किसी अन्य विधि के अधीन सब अपराधों का अन्वेषण, जांच, विचारण और उनके संबंध में अन्य कार्यवाही इन्हीं उपबन्धों के अनुसार होगी. किन्तु ऐसे अपराधों के अन्वेषण, जांच, विचारण या अन्य कार्यवाही की रीति या स्थान का विनिमयन करने वाली तत्समय प्रवृत्त किसी अधिनियमिति के अधीन रहते हुए की जाएगी.
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क्या होती है सीआरपीसी (CrPC)
सीआरपीसी (CRPC) का अंग्रेजी का शब्द है. जिसकी फुल फॉर्म Code of Criminal Procedure (कोड ऑफ क्रिमिनल प्रोसिजर) होती है. इसे हिंदी में 'दंड प्रक्रिया संहिता' कहा जाता है. दंड प्रिक्रिया संहिता यानी CrPC में 37 अध्याय हैं, जिनके अधीन कुल 484 धाराएं आती हैं. जब कोई अपराध होता है, तो हमेशा दो प्रक्रियाएं होती हैं, एक तो पुलिस अपराध की जांच करने में अपनाती है, जो पीड़ित से संबंधित होती है और दूसरी प्रक्रिया आरोपी के संबंध में होती है. सीआरपीसी (CrPC) में इन प्रक्रियाओं का ब्योरा दिया गया है.
1974 में लागू हुई थी CrCP
सीआरपीसी के लिए 1973 में कानून पारित किया गया था. इसके बाद 1 अप्रैल 1974 से दंड प्रक्रिया संहिता यानी सीआरपीसी (CrPC) देश में लागू हो गई थी. तब से अब तक CrPC में कई बार संशोधन भी किए गए है.
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