दंड प्रक्रिया संहिता (Code of Criminal Procedure) की धाराओं (Sections) में अदालत (Court) और पुलिस (Police) के काम करने की प्रक्रिया (Process) के बारे में जानकारी (information) मिलती है. इसी प्रकार से सीआरपीसी (CrPC) की धारा 56 (Section 56) में गिरफ्तार किए गए व्यक्ति की मजिस्ट्रेट (magistrate) या पुलिस थाने (police station) के एसएचओ (SHO) के समक्ष पेशी किए जाने के प्रावधान (provisions) के बारे में बताया गया है. आइए जानते हैं कि सीआरपीसी की धारा 56 क्या कहती है?
सीआरपीसी की धारा 56 (CrPC Section 56)
दंड प्रक्रिया संहिता (Code of Criminal Procedure) की धारा 56 (Section 56) में गिरफ्तार किए गए व्यक्ति का मजिस्ट्रेट या पुलिस थाने के भारसाधक अधिकारी के समक्ष पेश करना बताया गया है. CrPC की धारा 56 के अनुसार वारंट के बिना गिरफ्तारी करने वाला पुलिस अधिकारी (police officer) अनावश्यक विलंब (without unnecessary delay) के बिना और जमानत (bail) के संबंध में इसमें अंतर्विष्ट उपबंधों के अधीन (subject to the provisions contained in) रहते हुए, उस व्यक्ति को. जो गिरफ्तार किया गया है. उस मामले में अधिकारिता (jurisdiction) रखने वाले मजिस्ट्रेट (Magistrate) के समक्ष या किसी पुलिस थाने (Police Station) के भारसाधक अधिकारी (officer in charge) के समक्ष ले जाएगा या भेजेगा.
क्या होती है सीआरपीसी (CrPC)
सीआरपीसी (CRPC) अंग्रेजी का शब्द है. जिसकी फुल फॉर्म Code of Criminal Procedure (कोड ऑफ क्रिमिनल प्रोसिजर) होती है. इसे हिंदी में 'दंड प्रक्रिया संहिता' कहा जाता है. CrPC में 37 अध्याय (Chapter) हैं, जिनके अधीन कुल 484 धाराएं (Sections) मौजूद हैं. जब कोई अपराध होता है, तो हमेशा दो प्रक्रियाएं होती हैं, एक तो पुलिस अपराध (Crime) की जांच करने में अपनाती है, जो पीड़ित (Victim) से संबंधित होती है और दूसरी प्रक्रिया आरोपी (Accused) के संबंध में होती है. सीआरपीसी (CrPC) में इन प्रक्रियाओं का ब्योरा दिया गया है.
1974 में लागू हुई थी CrPC
सीआरपीसी के लिए 1973 में कानून (Law) पारित किया गया था. इसके बाद 1 अप्रैल 1974 से दंड प्रक्रिया संहिता यानी सीआरपीसी (CrPC) देश में लागू हो गई थी. तब से अब तक CrPC में कई बार संशोधन (Amendment) भी किए गए है.