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CrPC Section 64: जब समन किए गए व्यक्ति न मिलें तो कैसे हो समन की तामील, यही बताती है धारा 64

सीआरपीसी (CrPC) की धारा 64 (Section 64) में बताया गया है कि जब समन किए गए व्यक्ति न मिल सकें तब तामील कैसे हो? तो चलिए जानते हैं कि सीआरपीसी की धारा 64 ऐसे मामले में क्या प्रावधान करती है?

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जब समन किए गए व्यक्ति न मिलें, तो उसका प्रावधान करती है धारा 64
जब समन किए गए व्यक्ति न मिलें, तो उसका प्रावधान करती है धारा 64
स्टोरी हाइलाइट्स
  • जब समन किए गए व्यक्ति न मिलें, उसका प्रावधान है धारा 64
  • 1974 में लागू की गई थी सीआरपीसी
  • सीआरपीसी में कई बार हुए है संशोधन

Code of Criminal Procedure: दंड प्रक्रिया संहिता की धाराएं (Sections) न्यायलय (Court) और पुलिस (Police) के काम करने की प्रक्रिया (Process) के बारे में जानकारी देती हैं. इसी प्रकार से सीआरपीसी (CrPC) की धारा 64 (Section 64) में बताया गया है कि जब समन किए गए व्यक्ति न मिल सकें तब तामील कैसे हो? तो चलिए जानते हैं कि सीआरपीसी की धारा 64 ऐसे मामले में क्या प्रावधान करती है?

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सीआरपीसी की धारा 64 (CrPC Section 64)
दंड प्रक्रिया संहिता (Code of Criminal Procedure) की धारा 64 (Section 64) में परिभाषित किया गया है कि जब समन किए गए व्यक्ति न मिल सकें तब समन की तामील कैसे ही जाए? CrPC की धारा 64 के मुताबिक, जहां समन किया गया व्यक्ति (person summoned) सम्यक् तत्परता (due diligence) बरतने पर भी न मिल सके, वहां समन की तामील (service of summons) दो प्रतियों में से एक को उसके कुटुंब (family) के उसके साथ रहने वाले किसी वयस्क पुरुष सदस्य (adult male member) के पास उस व्यक्ति के लिए छोड़कर की जा सकती है और यदि तामील करने वाले अधिकारी (officer) द्वारा ऐसी अपेक्षा की जाती है तो, जिस व्यक्ति के पास समन ऐसे छोड़ा जाता है वह दूसरी प्रति के पृष्ठ भाग (page of duplicate) पर उसके लिए रसीद हस्ताक्षरित (sign a receipt) करेगा.

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स्पष्टीकरण (Explanation)
सेवक (servant), इस धारा (Section) के अर्थ (Meaning) में कुटुम्ब (family) का सदस्य (member) नहीं है.

इसे भी पढ़ें--- CrPC Section 63: निगमित निकायों और सोसाइटियों पर समन की तामील से जुड़ी है धारा 63

क्या होती है सीआरपीसी (CrPC)
सीआरपीसी (CRPC) अंग्रेजी का शब्द है. जिसकी फुल फॉर्म Code of Criminal Procedure (कोड ऑफ क्रिमिनल प्रोसिजर) होती है. इसे हिंदी में 'दंड प्रक्रिया संहिता' कहा जाता है. CrPC में 37 अध्याय (Chapter) हैं, जिनके अधीन कुल 484 धाराएं (Sections) मौजूद हैं. जब कोई अपराध होता है, तो हमेशा दो प्रक्रियाएं होती हैं, एक तो पुलिस अपराध (Crime) की जांच करने में अपनाती है, जो पीड़ित (Victim) से संबंधित होती है और दूसरी प्रक्रिया आरोपी (Accused) के संबंध में होती है. सीआरपीसी (CrPC) में इन प्रक्रियाओं का ब्योरा दिया गया है.

1974 में लागू हुई थी CrPC
सीआरपीसी के लिए 1973 में कानून (Law) पारित किया गया था. इसके बाद 1 अप्रैल 1974 से दंड प्रक्रिया संहिता यानी सीआरपीसी (CrPC) देश में लागू हो गई थी. तब से अब तक CrPC में कई बार संशोधन (Amendment) भी किए गए है.

 

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