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India's Most Wanted Gangsters: भारत के कई ऐसे मोस्ट वॉन्टेड गैंगस्टर हैं, जो विदेशों में बैठकर भारत में वारदातों को अंजाम देते हैं. ऐसे कई कुख्यात अपराधी भारतीय खुफिया एजेंसियों के लिए भी परेशानी का सबब बने हुए हैं. ये सभी शातिर अपराधी भारत से सैकड़ों मील दूर विदेशों में पनाह लिए बैठे हैं. और वहीं से अपने गुर्गों के ज़रिए ये शातिर बदमाश जब चाहे भारत में लोगों को अपना निशाना बनाते हैं. जबरन उगाही करते हैं. सुपारी किलिंग भी कराते हैं. चिंता की बात तो ये है कि इनमें से अधिकतर गैंगस्टर अब विदेशी ताकतों के हाथों में खेलने लगे हैं. आज आपको बताते हैं ऐसे ही कुख्यात नंदू गैंग, भाऊ गैंग और लॉरेंस गैंग की कहानी.
नंदू उर्फ कपिल सांगवान गैंग
कुख्यात गैंगस्टर कपिल सांगवान उर्फ नंदू पेरोल से फरार हो गया था, फिलहाल वह इंग्लैंड में छुपकर बैठा है और उसका गैंग भारत में सक्रीय है. वैसे नंदू उर्फ कपिल सांगवान द्वारका जिले के नजफगढ़ में नंदा एनक्लेव का रहने वाला है. उसने शुरुआती पढ़ाई विकासपुरी से की, उसके बाद गुरुग्राम में एमिटी यूनिवर्सिटी से होटल मैनेजमेंट कर रहा था. कपिल सांगवान ही नहीं उसका भाई भी हत्या के एक मामले में फरार चल रहा है. कपिल के खिलाफ रंगदारी, हथियार के दम पर लोगों से उगाही, आर्म्स एक्ट जैसे कई मामले दर्ज हैं.
उसे साल 2014 में आर्म्स एक्ट और झगड़े के मामले में गिरफ्तार हुआ था, लेकिन फिर पेरोल से फरार हो गया. उसके बाद वो यूके चला गया, जहां से अब अपनी गैंग चला रहा है. वो जेल में अपनी गैंग के जरिए दहशत फैलाकर उगाही भी करता है. साल 2023 में दिल्ली के मटियाला इलाके में बीजेपी नेता सुरेंद्र गुप्ता की हत्या भी कपिल सांगवान उर्फ नंदू ने अपनी गैंग के जरिए ही कराई थी. उसके गुर्गों ने इस वारदात को अंजाम दिया था. उसके गुर्गों में विपिन, अनिल, विक्की, अमित, प्रशांत, वासुदेव और कृष्ण कुमार है. इनके जरिए ही वो अपनी गैंग को यूके से ऑपरेट करता है.
बीजेपी नेता सुरेंद्र की हत्या समेत जेल में बंद कई कपिल सांगवान के गुर्गों को मदद पहुंचाई जाती है. इसको लेकर कपिल उर्फ नंदू और उसके करीबी सहयोगियों के ठिकानों पर पिछले साल दिल्ली पुलिस ने छापेमारी की थी. उस वक्त छावला, झज्जर, सोनीपत समेत 23 ठिकानों पर पुलिस ने रेड की थी. और उसके ठिकानों से कई हथियार, सवा दो करोड़ रुपये कैश, ड्रग्स समेत कई अवैध चीजें बरामद की थीं. इसके अलावा एक बुलेटप्रूफ गाड़ी, हथियार और कारतूस बरामद किए गए थे. नंदू गैंग के खिलाफ ये एक कॉर्डिनेटेड रेड थी. दिल्ली पुलिस की 300 लोगों की टीम ने एक साथ दिल्ली और हरियाणा में रेड को अंजाम दिया था.
कौन है भाऊ गैंग का सरगना?
22 साल का गैंगस्टर हिमांशु भाऊ हरियाणा के रोहतक जिले के रतौली गांव का रहने वाला है. उसे कुख्यात गैंगस्टर लॉरेंस विश्नोई का जानी दुश्मन माना जाता है. उसके खिलाफ 18 केस दर्ज हैं. वो फर्जी पासपोर्ट के जरिए विदेश पहुंच गया था. उसकी लास्ट लोकेशन पुर्तगाल में मिली थी. साल 2022 में भाऊ ने 24 घंटे के अंदर तीन हत्याओं को अंजाम देकर जरायम की दुनिया में दहशत कायम कर दी थी.
विदेश में बैठा हिमांशु भाऊ अपने गुर्गों के जरिए दिल्ली और हरियाणा में ताबड़तोड़ वारदातों को अंजाम दिलाता है. वो ज्यादातर व्यापारियों, प्रॉपर्टी डीलरों, शराब विक्रेताओं और सट्टेबाजों से पैसे वसूलता है. हरियाणा पुलिस ने उस पर ढाई लाख का इनाम घोषित कर रखा है. दिल्ली पुलिस ने भी उस पर एक लाख का इनाम घोषित किया था. उसके खिलाफ भारतीय जांच एजेंसियों ने इंटरपोल के जरिए रेड कॉर्नर नोटिस कराया था.
मुरथल के गुलशन ढाबा पर नीतू डाबोडिया गैंग से शूटर और शराब कारोबारी सुंदर मलिक की हत्या की जिम्मेदारी भाऊ गैंग ने ही ली थी, जिसका सरगना हिमांशु भाऊ है. बताया जाता है कि अब वो अमेरिका में बैठकर हरियाणा, दिल्ली और राजस्थान समेत कई राज्यों में अपना गैंग चला रहा है और इसमें हरियाणा के कई गैंग उसका साथ दे रहे हैं. इस गैंग के मुख्य सरगना काला खर्मपुर हिसार, नीरज फरीदपुर और सौरभ गिडोली गुरुग्राम हैं. पुलिस सूत्रों की मानें तो ये सभी गैंगस्टर अब अमेरिका में हैं और सोशल मीडिया के माध्यम से युवाओं को अपनी गैंग में जोड़ते हैं. उनसे हरियाणा की धरती पर खूनी खेलते हैं.
हिमांशु भाऊ गैंग की क्राइम कुंडली काफी पुरानी है. हिमांशु ने सबसे पहले गोहाना में हलवाई मातूराम की दुकान पर फायरिंग कर करोड़ों रुपये की फिरौती वसूलने में नाम आया था. यही पहला मामला था, जिसमें भाऊ गैंग चर्चा में आया था. उसके बाद से भाऊ गैंग का नाम कई संगीन वारदातों को अंजाम देने में आ चुका है तो कई ऐसे मामले हैं, जिनमें खुद भाऊ गैंग सामने आकर इसकी जिम्मेदारी लेता रहता है.
लॉरेंस बिश्नोई गैंग
गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई के गुर्गे पंजाब, दिल्ली, हिमाचल प्रदेश, और राजस्थान में सक्रिय हैं. इसका गैंग कनाडा और दुबई से भी ऑपरेट करता है. सिद्धू मेसूवाला की हत्या में जब से गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई का नाम आया है, तब से हर कोई उसके बारे में सबकुछ जानना चाहता है. आप ये जानकर हैरान रह जाएंगे क़ि लॉरेंस की इस क्राइम कंपनी में सब कुछ डिजिटल है. ये एक वर्चुअल संसार जैसा नज़र आता है. इस गैंग से जुड़े करीब 1000 लोग, जिसमें शार्प शूटर्स, बदमाश, करीयर, सप्लायर, रेकी पर्सन, लॉजिस्टिक स्पॉट बॉय, शेल्टर मेन सोशल मीडिया विग के सदस्य शामिल हैं. इस गैंग के टारगेट वर्चुअल नंबरों से ऑडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए तय किए जाते हैं.
लारेंस इस क्राइम कंपनी में मास्टर ब्रेन है, तो विदेश में बैठा गोल्डी बराड़ कंपनी की रीढ़ की हड्डी है. लारेंस का भांजा सचिन बिश्नोई कंपनी का भर्ती सेल और टारगेट प्लान का प्रमुख है, जो इस वक्त फरार है. जबकि ऑस्ट्रिया से अनमोल और कनाडा से विक्रम बराड़ कंपनी की फाइनेंस डील को संभालते हैं. इस क्राइम कंपनी में हर टारगेट से जुड़ा शख्स केवल अपने आगे वाले एक शख्स को जानता है. इसके अलावा एक ऑपरेशन में जितने भी बंदे गैंग से जुड़े होते हैं, उन्हें बाकी गैंग मेम्बर के बारे में कोई भी जानकारी नहीं रहती.
बकायदा एक फुलप्रूफ़ प्लानिंग के मुताबिक गैंग के सदस्यों को अलग-अलग काम सौंपे जाते हैं. यानी रेकी कौन करेगा, पनाह कौन देगा? गाड़ियां कौन सप्लाई करेगा? हथियार कौन मुहैया कराएगा? क़त्ल के बाद किस तरफ किधर भागना है, और सबसे बड़ा सवाल कि फंडिंग कैसे होगी, इसे भी क्राइम मास्टर ही तय करते हैं. किलिंग के वक्त मौजूद गैंग मेम्बर भी अक्सर एक दूसरे को नहीं जानते ताकि पकड़े जाने पर गैंग के बाक़ी सदस्यों पर आंच ना आ सके.
इस पूरी साज़िश का ताना बाना सिंग्नल एप के जरिये होता है, जहां बिना सिम के वर्चुअल नंबरों, इंटनरेट के नंबरों से कंपनी की सारी डील्स, सारे प्लान, पूरा ऑपरेशन और टारगेट फिक्स होते हैं. क्राइम मीटिंग में केवल निर्देश अधिकतर गैंगस्टर सचिन देता है, जिसे आगे गैंग मेंबर फॉलो करते हैं. अपना हिस्सा लेते हैं और फिर अगले काम मे जुट जाते हैं. लारेंस के गैंग में 1000 के करीब गैंगस्टर बदमाश और सक्रिय शॉर्प शूटर्स देश विदेश में मौजूद हैं.
तिहाड़ जेल में बंद लॉरेंस बिश्नोई अपने गैंग को कुछ इस तरह चलाता है, जैसे शायद कोई कभी बाहर रहकर भी ना चला पाता. सूत्रों की मानें तो इस गैंग में करीब 700 से ज़्यादा शूटर्स हैं जो लॉरेंस के एक इशारे पर किसी को भी मारने निकल पड़ते हैं. ये सब शूटर्स दिल्ली-एनसीआर, हरियाणा, पंजाब और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में फैले हैं. इस गैंग का हवाला का पैसा ब्रिटेन और दुबई में भी लगा होने की जानकरियां मिली हैं. फिरौती के लिए अपहरण, क़त्ल, जबरन उगाही इस गैंग का पैसे कमाने का मुख्य जरिया है. 31 साल के लॉरेन्स पर 65 से ज़्यादा आपराधिक मामले दर्ज हैं. वो एक बार पुलिस हिरासत से फ़रार भी हो चुका है.
टिल्लू ताजपुरिया गैंग
ये गैंगस्टर आउटर दिल्ली और हरियाणा में ऑपरेट करता था. टिल्लू ताजपुरिया का नाम जुर्म की दुनिया में अपनी अलग पहचान बना चुका था. दरअसल, ये वही गैंगस्टर था, जिसने मंडोली जेल में रहते हुए, 24 सितंबर 2021 को रोहिणी कोर्ट में अपने दो शूटर भेजकर कुख्यात गैंगस्टर जितेंद्र गोगी को भरी अदालत में हत्या करवा दी थी. उसके शूटर रोहिणी की कोर्ट नंबर 207 में वकील की ड्रेस में पहुंचे थे और मौका देखकर कोर्ट रूम के अंदर ही पेशी पर आए गैंगस्टर जितेंद्र गोगी की गोली मारकर हत्या कर दी थी. इसके बाद सुरक्षाकर्मियों ने जवाबी कार्रवाई में दोनों शूटरों को एनकाउंटर में मार गिराया था.
असल में गैंगस्टर जितेंद्र उर्फ गोगी और टिल्लू ताजपुरिया गैंग के बीच गैंगवार जारी थी. इसी के चलते गोगी गैंग के सदस्यों और कुख्यात अपराधी प्रवेश ने मिलकर टिल्लू ताजपुरिया गैंग के बदमाश पवन का मर्डर कर दिया था. इस क़त्ल का बदला लेने के लिए ही टिल्लू ताजपुरिया ने अपने गैंग के सदस्य अक्षय को जिम्मेदारी सौंपी थी. अक्षय ने अपने साथियों के साथ मिलकर टिल्लू के हुक्म को पूरा किया और गैंगस्टर गोगी को भरी अदालत में मार डाला था.
गैंगस्टर जितेंद्र उर्फ गोगी का जानी दुश्मन गैंगस्टर टिल्लू ताजपुरिया किसी भी तरह से कम नहीं था. वह तिहाड़ जेल में बन्द रह कर भी कुख्यात बदमाश नवीन बाली, कौशल और गैंगस्टर नीरज बवानिया के साथ मिलकर गैंग ऑपरेट करता था. लेकिन ये गैंगवार उसके लिए भारी पड़ने वाली थी. इस बात का अंदाजा उसे भी नहीं था. वो जेल में बेफिक्र रह रहा था.
2 मई 2023 को तिहाड़ जेल के अंदर ही दुश्मन गैंग के गुर्गों ने ने गैंगस्टर टिल्लू ताजपुरिया की बेरहमी से हत्या कर दी थी. जेल से बाहर आई इस लाइव मर्डर की तस्वीरों ने पूरे देश को दहला दिया था. टिल्लू की हत्या ने सबको इसलिए भी चौंका दिया, क्योंकि तिहाड़ जेल के अंदर चप्पे-चप्पे पर सीसीटीवी कैमरे लगे हैं. अब सवाल यह है कि इतनी हाईटेक सुरक्षा के बीच तिहाड़ के हाई सिक्योरिटी सेल में कैद टिल्लू ताजपुरिया की हत्या कैसे हो गई? टिल्लू की हत्या के बाद मचे बवाल ने जेल प्रशासन को एक्शन लेने के लिए मजबूर कर दिया था. इस मामले में कई जेलकर्मी और अधिकारी नप गए थे.
अब बताया जाता है कि ताजपुरिया गैंग की कमान भी विदेश में बैठे एक गैंगस्टर के हाथों में है. वो वहीं बैठकर भारत में गैंग के सदस्यों को फरमान जारी करता है. हालांकि अभी तक इस बात की पुष्टि नहीं हो सकी है.