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सुरेंद्र को 'डैडा' कहती थी मोना और सुरेंद्र उसे 'बेटा'...UPSC पर बिगड़ी बात, हवलदार ने लेडी कॉन्स्टेबल को रिकॉर्डेड ऑडियो से रखा 'जिंदा'

UPSC aspirant Mona Murder Case: मोना साल 2014 में दिल्ली पुलिस में बतौर कांस्टेबल भर्ती हुई थी. मोना से 2 साल पहले सुरेंद्र राणा दिल्ली पुलिस में भर्ती हुआ था. दोनों दिल्ली पुलिस की पीसीआर यूनिट में तैनात थे. वहीं दोनों संपर्क में आए. मोना सुरेंद्र को 'डैडा' बुलाती थी और सुरेंद्र उसे 'बेटा' बोलता था.

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साथी कांस्टेबल ही निकला मोना का कातिल. (फाइल फोटो)
साथी कांस्टेबल ही निकला मोना का कातिल. (फाइल फोटो)

दिल्ली पुलिस की पूर्व कांस्टेबल मोना ने आईएएस बनने का सपना देखा था. लेकिन दिल्ली पुलिस की पीसीआर यूनिट में साथ काम कर चुके कांस्टेबल सुरेंद्र राणा की बुरी नजर ने उसके सपनों को पंख लगने से पहले ही उसका गला घोंट दिया. 

ये कहानी किसी बेस्ट सेलर क्राइम थिलर की तरह है. सितंबर 2021 से मोना गायब थी. यानी दो साल पहले सितंबर में उसका मर्डर हुआ था. दो साल बाद दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच के जवान दिल्ली के अलीपुर के इस नाले में मोना का शव ढूंढ़ रहे हैं.
 
'डैडा' और 'बेटा' वाला रिश्ता
 
पुलिस के मुताबिक, मोना साल 2014 में दिल्ली पुलिस में बतौर कांस्टेबल भर्ती हुई थी. मोना से दो साल पहले सुरेंद्र राणा दिल्ली पुलिस में भर्ती हुआ था. दोनों दिल्ली पुलिस की पीसीआर यूनिट में तैनात थे. वहीं दोनों संपर्क में आए. मोना सुरेंद्र को प्यार से 'डैडा' बुलाती थी और सुरेंद्र उसे 'बेटा' बोलता था.

इसी बीच, मोना का सलेक्शन यूपी पुलिस में सब-इंस्पेक्टर के लिए भी हो गया. लेकिन वो दिल्ली पुलिस की नौकरी छोड़ मुखर्जी नगर में यूपीएससी की तैयारी करने लगी. सूत्रों की मानें तो अच्छी भली नौकरी छोड़ यूपीएससी की तैयारी करने को लेकर भी सुरेंद्र को मोना से दिक्कत होने लगी थी.  

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गला दबाकर हत्या 

दिल्ली पुलिस के स्पेशल सीपी रवींद्र यादव ने बताया, मोना पर सुरेंद्र बुरी नजर रखने लगा था, जब मोना ने इसका विरोध किया तो वो 8 सितंबर 2021 को मोना को अलीपुर अपने घर की तरफ ले गया और एक बड़े नाले में उसको धक्का दिया. उसके बाद गला दबाया और उसकी हत्या कर दी.

2 साल तक छिपाए रहा राज

सुरेंद्र ने जिस तरह मोना की हत्या की, उससे कहीं ज्यादा हैरतअंगेज उसका वो तरीका है, जिसके जरिये उसने हत्या का राज छिपाने की कोशिश की.

मोना को ढूंढने का ड्रामा करता था सुरेंद्र 

दरअसल, सुरेंद्र ने मोना के घरवालों को बताया कि मोना कहीं गायब हो गई है. घरवालों के साथ उसे खोजने का ड्रामा करता रहा. कई बार आरोपी मोना के घरवालों के साथ वो पुलिस थाने भी गया. आरोपी ने कई बार थाने में पुलिस वालों को मोना को ठीक से नहीं तलाश करने पर फटकार लगाई.

'जिंदा' रखने के लिए ATM का इस्तेमाल 

आरोपी ने मोना को जिंदा दिखाने के लिए किसी और लड़की को लेकर उसके नाम से कोरोना वैक्सीन के फर्जी सर्टिफिकेट बनवा दिए. वो मोना के ATM के जरिए  बैंक अकाउंट से लेनदेन करता था ताकि लगे वो जिंदा है. आरोपी मोना के सिमकार्ड का भी इस्तेमाल करता रहा.

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आरोपी सुरेंद्र मोना के घरवालों को झूठी जानकारी देकर कहता कि उसे किसी ने फोन किया है और इस लोकेशन पर है. फिर मोना के घरवालों के साथ उस लोकेशन पर जाता भी था.
 
रिकॉर्डेड ऑडियो से बनाता रहा बेवकूफ

इस तरह मोना के घरवालों ने 5 राज्यों के न जाने कितने शहरों की खाक छानी. हत्या के राज को छिपाने के लिए आरोपी सुरेंद्र ने अपने साले रॉबिन को मोना का एक ऑडियो दिया और रॉबिन ने अरविंद बनकर मोना के घरवालों को 5 बार फोन किया. इस दौरान वो मोना की आवाज की पुरानी रिकार्डिंग चला देता, जिसमें मोना बोलती थी- 'मुझे तलाश मत करो, मैं सही सलामत हूं, मम्मी बेवजह परेशान होती हैं.' लेकिन कहते हैं न कि आरोपी कितना भी चालाक क्यों न हो, वो कानून से  बच नहीं सकता. सुरेंद्र राणा अब पुलिस की गिरफ्त में है.

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