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ब्लाइंड मर्डर केस में उलझी थी दिल्ली पुलिस, गीले कागज के टुकड़े मिले और भाई-भतीजे पहुंच गए जेल

दिल्ली में मुनक नहर में मिली एक लाश के मामले में पुलिस ने खुलासा कर दिया है. युवक की हत्या उसके बड़े भाई और भतीजों ने की थी. पुलिस ने इस ब्लाइंड मर्डर केस को 5 दिन में सुलझा दिया है. दरअसल, पुलिस को युवक की जेब में गीले कागज के कुछ टुकड़े मिले थे. ये दो दुकानों के बिल थे. इन टुकड़ों को जोड़कर पुलिस ने युवक की पहचान की और फिर आरोपियों तक पहुंच गई.

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दिल्ली पुलिस ने मामले का खुलासा किया है. (File Photo)
दिल्ली पुलिस ने मामले का खुलासा किया है. (File Photo)

दिल्ली पुलिस ने ब्लाइंड मर्डर केस से पर्दा उठाया है. यहां 5 दिन पहले मुनक नहर में एक युवक का शव मिला था. पूरी बॉडी क्षत-विक्षत थी, ऐसे में पुलिस के सामने सबसे बड़ी समस्या शिनाख्त करने की थी. हालांकि, जेब में मिले गीले कागज की मदद से पुलिस ना सिर्फ परिजन तक पहुंची, बल्कि हत्यारोपियों को भी जेल की सलाखों तक भेज दिया. सीनियर अफसरों ने पुलिस की जांच टीम की पीठ थपथपाई है.

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दिल्ली पुलिस के मुताबिक, 5 अक्टूबर को हैदरपुर ट्रीटमेंट प्लांट के पास मुनक नहर से एक युवक का शव बरामद किया गया था. तलाशी ली गई तो जेब में कागज के भीगे हुए टुकड़े पाए गए. यही कागज के टूटे टुकड़े ब्लाइंड मर्डर का खुलासा करने के लिए एकमात्र सुराग थे. युवक के हाथ-पैर बंधे हुए थे. उसका शरीर सड़ चुका था और पानी में पड़ा रहने से फूल गया था, जिससे पहचान करना संभव नहीं था. पुलिस ने पता किया तो आसपास किसी ने गुमशुदगी की शिकायत भी दर्ज नहीं करवाई थी. टेक्निकल सर्वेलंस और कॉल डेटा का रिकॉर्ड निकाला गया, लेकिन कुछ पता नहीं चल सका.

'एक बिल टेलर का था और दूसरा मूंगफली खरीदी का'

हालांकि, कागज के टुकड़े सूखने के बाद पुलिस ने उन सभी को आपस में जोड़ा. ये टुकड़े दो बिल पाए गए. एक सहारनपुर में सिलाई की दुकान का था और दूसरा मूंगफली की थोक खरीद का. उसके बाद दिल्ली पुलिस की एक टीम सहारनपुर पहुंची, लेकिन वहां दर्जी की कई दुकानें होने के कारण सही पते तक नहीं पहुंच पा रही थी. जबकि थोक में खरीदी गई मूंगफली के दूसरे बिल के आधार पर डीलरों के बारे में जानकारी जुटाई. पुलिस ने कई थोक डीलरों के पास पहुंची और युवक के बारे में पूछताछ की. वहां एक व्यापारी के जरिए पुलिस को युवक के परिवार के संबंध में जानकारी मिली.

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'2 दिन में कर ली बॉडी की पहचान'

आखिरकार पुलिस की टीम युवक के घर पहुंची और 7 अक्टूबर को पहचान कर ली गई. हालांकि, पुलिस की मुश्किलें अभी आसान नहीं हुई थीं. क्योंकि परिवार का कहना था कि हमें नहीं पता था कि युवक किसके साथ ज्यादा बातचीत करता था और कौन उसके संपर्क में रहते थे. 

'बड़े भाई को घर से निकाला तो रखने लगा था खुन्नस'

TOI की रिपोर्ट के अनुसार, जांच से जुड़े एक अधिकारी ने बताया कि हमारे लिए यह पता करना भी चुनौती थी कि युवक का शव सहारनपुर से दिल्ली कैसे पहुंच गया. पुलिस को हरियाणा में रिश्तेदारों के बारे में पता चला तो उनके बारे में जानकारी जुटाई. जांच में पाया कि युवक की पत्नी समेत परिवार के कुछ सदस्य पानीपत में रहते हैं. फिर एक टीम पानीपत पहुंची और पता चला कि कुछ महीने पहले युवक ने अपने बड़े भाई और उसके परिवार को घर से बाहर निकाल दिया था.

'परिवार बोला- हमें कुछ पता नहीं है...'

दोनों भाइयों में झगड़ा भी हुआ. उस समय तो बड़े भाई का परिवार (पत्नी और बच्चे) घर से बाहर चला गया, लेकिन अंदर ही अंदर खुन्नस मान बैठा. पुलिस को यह सब पता तो चला तो बड़े भाई और दोनों भतीजों से इस बारे में बात करने की कोशिश की तो उन्होंने कुछ पता होने से इनकार कर दिया.

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'पुलिस ने सख्ती की तो टूट गए हत्यारोपी'

उसके बाद पुलिस ने परिवार के सभी सदस्यों से फिर से पूछताछ की और सख्ती दिखाई तो वो टूट गए और अपराध कुबूल कर लिया. परिवार के लोगों ने बताया कि उन्होंने दूर के रिश्तेदार के साथ मिलकर युवक की हत्या की साजिश रची थी. घटना वाले दिन वे एकत्रित हुए और रात में सभी की मुलाकात हुई, जिसके बाद वे युवक को मिलने के बहाने पानीपत ले गए. वहां पहुंचने के बाद सबसे पहले युवक का गला घोंटा, उसके हाथ-पैर बांध दिए और बाद में नहर में फेंक दिया.

दिल्ली पुलिस ने बताया कि इस मामले में एक नाबालिग समेत चार आरोपियों को अरेस्ट किया है. पुलिस का कहना था कि युवक को उसके बड़े भाई और भतीजों ने घर से बाहर निकालने के विवाद में मार डाला था. रोहिणी इलाके के डीसीपी गुरिगबल सिंह सिद्धू के नेतृत्व में इंस्पेक्टर त्रिभुवन नेगी, दिनेश और बिश्नोई की टीम ने इस पूरे केस मामले को सुलझाया. पुलिस अधिकारियों ने बताया कि पिछले दो वर्षों में मुनक नहर से अज्ञात शव बरामद होने का यह पहला मामला था, जिसका उन्होंने खुलासा किया है. चूंकि पहली बार में शव की पहचान करना मुश्किल था.

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