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दिल्ली की श्रद्धा, मुंबई की सरस्वती और अब फिर मिले एक अनजान लड़की की लाश के टुकड़े, शिनाख्त मुश्किल

फोन कॉल के मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची. पुलिसवालों ने जैसे ही प्लास्टिक का पैकेट खोला, अंदर एक इंसान का कटा हुआ सिर मिला. जो पुराना होने की वजह से पूरी तरह सड़ चुका था और उसकी पहचान कर पाना भी मुमकिन नहीं था. लेकिन सिर के साथ मौजूद लंबे बालों को देख कर ये साफ था कि ये सिर किसी लड़की का ही होगा.

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सरस्वती और श्रद्धा की तरह ही एक अनजान लड़की की लाश के टुकड़े दिल्ली में मिले हैं
सरस्वती और श्रद्धा की तरह ही एक अनजान लड़की की लाश के टुकड़े दिल्ली में मिले हैं

दिल्ली का श्रद्धा मर्डर केस और मुंबई का सरस्वती हत्याकांड अभी लोग भूले भी नहीं कि दिल्ली में फिर से एक ऐसी ही वारदात सामने आई. मामला दिल्ली के गीता कॉलोनी फ्लाई ओवर के नीचे का है. जहां एक लड़की की टुकड़ों में बंटी लाश मिलने से सनसनी फैल गई. कातिल ने लाश के टुकड़े करके अलग-अलग पॉलिथीन के पैकेट्स में पैक कर फेंके थे.

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प्लास्टिक पैक में था कटा हुआ सिर
दिल्ली पुलिस को सुबह करीब नौ बजे लाश के इन टुकड़ों के बारे में इत्तिला मिली थी. फोन करनेवाले ने बताया कि उसे फ्लाई ओवर के नीचे यमुना नदी के किनारे जंगल में प्लास्टिक के पैकेट नजर आ रहे है, जो संदिग्ध है. इस फोन कॉल के मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची. पुलिसवालों ने जैसे ही प्लास्टिक का पैकेट खोला, अंदर एक इंसान का कटा हुआ सिर मिला. जो पुराने होने की वजह से पूरी तरह सड़ चुका था और उसकी पहचान कर पाना भी मुमकिन नहीं था. लेकिन सिर के साथ मौजूद लंबे बालों को देख कर ये साफ था कि ये सिर किसी लड़की का ही होगा.

छोटे पैकेट्स में निकले इंसानी जिस्म के टुकड़े
जंगल में कटा हुआ सिर मिलने के बाद आगे की तफ्तीश भी जरूरी थी. ऐसे में पुलिस ने जंगल में तलाशी अभियान की शुरुआत कर दी. पैदल ही जंगल छानने के साथ-साथ ड्रोन की मदद से भी जंगल को देखने की कोशिश शुरू की गई. इस कोशिश में पुलिस को कामयाबी भी मिली और इसी जंगल से पुलिस को प्लास्टिक का एक दूसरा पैकेट मिला. जिसे खोलने पर उसमें छोटे छोटे कई और पैकेट्स मिले और इनमें भी मानव शरीर के टुकड़े थे. पुलिस को शक है कि ये सारे के सारे टुकड़े एक ही इंसान के हैं, जिसकी हत्या के बाद कातिल ने उसके टुकड़े कर उसे ठिकाने लगा दिया था.

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मामले की जांच बनी चुनौती
पुलिस ने पॉलिथीन में पैक लाश के टुकड़े तो बरामद कर लिए, लेकिन चूंकि इन टुकड़ों के साथ ऐसी कोई भी चीज नहीं है, जिससे लाश की पहचान हो सके. पुलिस के लिए इस मामले की तफ्तीश को आगे बढाना एक नई और बड़ी चुनौती है. फिलहाल पुलिस मारी गई लड़की की पहचान पता करने की कोशिश में जुटी है.

शिनाख्त की कोशिश
सेंट्रल दिल्ली के ज्वाइंट सीपी परमादित्य सिंह ने बताया कि पुलिस ने बरामद टुकड़ों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है. लेकिन जिस तरह से इस लड़की की हत्या की गई है, वो श्रद्धा मर्डर केस से मेल खाता है. पुलिस लाश की शिनाख्त करने की कोशिश में जुटी है.

फिलहाल पुलिस ने कोतवाली थाने में कत्ल का केस दर्ज कर लिया है और जांच शुरू कर दी है. पुलिस को अंदेशा है की हत्या कहीं और की गई फिर लाश को कातिल ने प्लास्टिक के बैग में बड़ी सावधानी से पैक किया और यमुना के किनारे ठिकाने लगा दिया. वो तो गनीमत है की लाश पुलिस ने बरामद कर ली नहीं तो जिस रफ्तार से यमुना का पानी बढ़ रहा है, उसे देखते हुए संभव था की पानी इन टुकड़ों को अपने साथ बहा ले जाता. शायद कातिल की मंशा यही थी.

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श्रद्धा मर्डर केस 
दिल्ली में पिछले कुछ समय से हत्या और फिर लाश के टुकड़े करने के कई मामले सामने आ चुके हैं. इनमें सबसे ज्यादा चर्चित श्रद्धा हत्याकांड रहा था. श्रद्धा मर्डर केस ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया था. आरोप है कि दिल्ली के महरौली में श्रद्धा के प्रेमी आफताब ने पिछले साल 18 मई को उसकी गला दबाकर हत्या कर दी थी. इसके बाद शव के 35 टुकड़े किए थे.

आफताब ने शव को रखने के लिए एक फ्रिज खरीदा था. इसमें उसने शव के टुकड़ों को रखा था. वह रोज रात को श्रद्धा के शव के एक टुकड़े को महरौली के जंगल में फेंकने जाता था. इतना ही नहीं आफताब श्रद्धा की हत्या के बाद भी उसी फ्लैट में रह रहा था, इतना ही नहीं फ्लैट में उससे मिलने उसकी और गर्लफ्रेंड भी आती थीं.

निक्की यादव मर्डर केस
ऐसा ही एक मामला और दिल्ली में सामने आया था, जिसमें साहिल गहलोत ने अपनी लिव-इन पार्टनर निक्की यादव की हत्या कर दी थी. आरोपी साहिल ने निक्की की हत्या करने के लगभग 12 घंटे बाद दूसरी लड़की से शादी कर ली थी और अगले दिन वापस आकर निक्की के शव को फ्रिज में रख दिया था.
 

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सरस्वती की 'डेथ मिस्ट्री' पर रहस्य बरक़रार
अब बात करते हैं मुंबई के सरस्वती हत्याकांड की. दरअसल, सरस्वती की 'डेथ मिस्ट्री' पर भी रहस्य बरक़रार है. इस मामले में सरस्वती के लिव इन पार्टनर मनोज साने ने अभी तक अपना जुर्म कुबूल नहीं किया है. यहां तक कि ये भी साफ नहीं है कि सरस्वती ने ख़ुदकुशी की या फिर उसका क़त्ल हुआ. अगर ये क़त्ल था तो फिर क़त्ल का मोटिव साफ क्यों नहीं है?

मुंबई का हॉरर हाउस
मुंबई के मीरा रोड पर मौजूद गीता आकाशदीप सोसायटी का एक फ्लैट हॉरर हाउस बन चुका है. उस फ्लैट का नंबर है 704. दरअसल, देश में रह-रह कर सामने आती टुकड़े-टुकड़े वाली मर्डर मिस्ट्री की कड़ी में 7 जून 2023 को इस फ्लैट से जो नई कहानी बाहर निकली थी, उसने पूरे देश को सन्न कर दिया था. यह मामला भी बिल्कुल दिल्ली के श्रद्धा मर्डर केस की तरह था. 

कुत्तों को खिलाए लाश के टुकड़े
हमने इस मामले को श्रद्धा मर्डर केस जैसा इसलिए कहा, क्योंकि यहां भी 34 साल की एक लड़की सरस्वती का कत्ल उसके लिव इन पार्टनर मनोज साने ने किया था. फिर मनोज उसकी लाश के टुकड़े-टुकड़े कर ना सिर्फ उन्हें ठिकाने लगा रहा था, बल्कि उससे भी दो कदम आगे बढ़ कर टुकड़ों को प्रेशर कुकर में उबाल रहा था, रोस्ट कर रहा था और उन्हें कुत्तों को खिला रहा था. 

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अभी भी नहीं मिले लाश के कई टुकड़े
लेकिन इस वारदात को सामने आए एक महीने से ज्यादा का वक्त गुजर जाने के बावजूद कई सवाल ऐसे हैं, जिनका जवाब अब तक पुलिस को नहीं मिल सका है. वो भी तब जब मुल्जिम पुलिस की गिरफ्त में है और पुलिस लगातार उससे इस वारदात को लेकर सवाल-जवाब कर रही है. अब तक की तफ्तीश में पुलिस ने लाश के 35 टुकड़े बरामद किए हैं. लेकिन अभी भी कई टुकड़ों का कोई अता-पता नहीं है.

ऐसे खुला था राज
असल में 7 जून को मीरा रोड़ की एक सोसायटी के लोगों ने सेवेंथ फ्लोर में रहने वाले मनोज साने को अपने घर से काले रंग के एक बोरे में कोई चीज ले जाते हुए देखा. जिसके बारे में पूछताछ करने पर उसने कोई साफ जवाब नहीं दिया. ऊपर से पिछले कई दिनों से मनोज के फ्लैट के आस-पास किसी चीज के सड़ने की तेज बदबू आ रही थी. ऐसे में अपार्टमेंट की सेवेंथ फ्लोर पर रहनेवाले लोगों ने 704 में रहनेवाले मनोज साने से इसके बारे में पूछताछ की, क्योंकि उसके घर में कुल दो लोग थे, वो और उसकी लिव इन पार्टनर. और उसकी पार्टनर पिछले कुछ दिनों से कहीं नजर नहीं आ रही थी. ऐसे में पड़ोसियों ने पुलिस को इत्तिला दी और जब पुलिस ने मनोज के फ्लैट यानी फ्लैट नंबर 704 की तलाशी ली, तो इस हॉरर हाउस का राज खुल गया. मनोज के किचन में अलग-अलग तीन बाल्टियों में इंसानी लाश के टुकड़े रखे थे.

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जांच आगे बढ़ी तो ये तो साफ हो गया कि टुकड़े मनोज की लिव इन पार्टनर सरस्वती वैद्य के हैं, जिन्हें मनोज ही काट-काट कर ठिकाने लगा रहा था. लेकिन हैरानी भरे तरीके से मनोज ने सरस्वती का कत्ल करने की बात से ही इनकार कर दिया. उसका कहना था कि सरस्वती ने जहर खा कर खुदकुशी कर ली थी, जिसके बाद वो घबरा कर सरस्वती की लाश के ठिकाने लगाने की कोशिश कर रहा था. 

पुलिस को मनोज की बात पर यकीन नहीं था, लिहाजा पुलिस इसे कत्ल का मामला मानकर ही तफ्तीश कर रही थी. मुकदमा भी आईपीसी की धारा 302 के तहत ही दर्ज किया गया. इस बीच पुलिस को मनोज के फ्लैट की छानबीन के दौरान कीटनाशक दवाएं भी मिली थी. साथ ही ये भी पता चला है कि ये दवाएं खुद मनोज ने ही बोरीवली पश्चिम उप नगर की एक दुकान से खरीदी थी. ऐसे में शक ये है कि मनोज ने यही कीटनाशक दवा खिलाकर अपनी पार्टनर सरस्वती की जान ली है.

हालांकि अगर ये मान भी लिया जाए कि सरस्वती ने खुदकुशी नहीं की, बल्कि मनोज ने ही उसका कत्ल किया, तो भी कत्ल का मोटिव फिलहाल साफ नहीं है. मनोज और सरस्वती के रिश्ते में अनबन को लेकर कई थ्योरीज़ सामने हैं. इनमें एक थ्योरी मनोज के रवैये को लेकर है. पुलिस को पता चला है कि सरस्वती अक्सर मनोज से नाखुश और असंतुष्ट रहती थी, जिसे लेकर दोनों में झगड़ा हुआ करता था. जबकि दूसरी थ्योरी सरस्वती के पोसेसिवनेस यानी मनोज पर उसके अधिकार की भावना को लेकर है. सरस्वती को शक था कि मनोज दूसरी महिलाओं और लड़कियों से भी मिलता-जुलता था, उनसे बातें करता था और इसे लेकर सरस्वती उससे लड़ती रहती थी.

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इस बीच मनोज के मोबाइल फोन की जांच में ठाणे पुलिस को ऐसी-ऐसी चीजें हाथ लगी हैं, जो दिमाग घुमा देने वाली थीं. मनोज की सर्च हिस्ट्री से पता चला है कि मनोज सिर्फ लाश के टुकड़े करनेवाला दरिंदा ही नहीं है, बल्कि उसके दिमाग में भी हैवानियत भरी है. घर में सरस्वती के होने के बावजूद वो ना सिर्फ मोबाइल पर लगातार पोर्न साइट्स सर्च करता था, बल्कि पोर्न साइट्स के नाम भूल ना जाएं, इसलिए उन्हें अपने पास एक डायरी में लिख कर भी रखता था. इतना ही नहीं 55 साल के मनोज के मोबाइल फोन में कई डेटिंग एप भी मिले हैं, जिनसे पता चलता है कि वो कई लड़कियों और महिलाओं के भी संपर्क में था. 

पुलिस की मानें तो मनोज के मोबाइल फोन की सर्च हिस्ट्री से ही ये पता चला है कि सरस्वती की जान लेने के बाद उसने लाश को सड़ने से बचाने और उसे ठिकाने लगाने के तौर-तरीकों के बारे में गूगल में सर्च किया था. और इसी के बाद उसने लाश के टुकड़े करने के साथ-साथ उन्हें उबाला और रोस्ट भी किया था. एक हैरानी की बात ये भी सरस्वती के कत्ल के बाद उसने उसकी लाश की कई तस्वीरें भी उतारीं. ऐसा करने के पीछे उसका मकसद क्या था, ये अभी साफ नहीं है. 

उधर, सरस्वती के लाश के टुकडों के इकट्ठा किए गए डीएनए नमूनों की शुरुआती रिपोर्ट सामने आई है. पुलिस सूत्रों का कहना है कि डीएनए सरस्वती की बहनों से मैच कर गए हैं. यानी जिस लाश के मनोज टुकड़े कर रहा था, वो लाश सरस्वती की ही है. इसमें कोई शक की गुंजाइश नहीं है. पुलिस ने लाश के अब तक बरामद टुकड़ो को फॉरेंसिक जांच के बाद सरस्वती की बहनों के हवाले कर दिया था. बहनों ने 10 जून को उसका अंतिम संस्कार किया था.

पुलिस को मनोज के घर से कुछ ऐसी दवाएं मिली हैं, जिन्हें देखकर उसे लगने लगा है कि खुद के एचआईपी पॉजिटिव होने को लेकर मनोज ने जो दावा किया था, वो सच हो सकता है. क्योंकि मनोज के घर से मिली दवाएं एचआईटी पॉजिटिव मरीजों के द्वारा ही इस्तेमाल की जाती हैं. मनोज ने पुलिस से ये भी कहा है कि एचआईवी का मरीज होने के चलते ही वो सरस्वती के साथ किसी फिजिलक रिलेशन में नहीं था. हालांकि मनोज के एचआईवी पॉजिटिव होने या नहीं होने पर अभी रिपोर्ट का सामने आना बाकी है. 

इस बीच तफ्तीश में लाश निपटाने के सिलसिले में मनोज की एक और शातिराना हरकत की कहानी सामने आई है. सरस्वती की लाश के टुकड़े करने के लिए मनोज भायंदर की एक दुकान से लकडी काटनेवाली मशीन यानी चेनशॉ खरीद कर लाया था. अब ये पता चला है कि लाश के टुकड़े करते वक्त हड्डियों से टकरा कर वो चेनशॉ खराब हो गया था. कटर का चेन उतर गया. जिसके बाद मनोज फिर से उस मशीन को लेकर उसी दुकान में मरम्मत के लिए पहुंचा, जहां से उसने उसे खरीदा था. खास बात ये रही कि कटर को रिपेयर के लिए ले जाने के दौरान मनोज ने कुछ इतनी एहतियात बरती और कुछ इस तरीके से उसे साफ किया कि उसका मरम्मत करते वक्त दुकानदार को दूर-दूर तक ये शक नहीं हुआ कि उस चेनशॉ का इस्तेमाल उसके ग्राहक ने किसी की लाश के टुकड़े करने के लिए किया है. पुलिस ने अब भायंदर के उस दुकानदार का बयान भी दर्ज कर लिया है. 

 

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