दिल्ली की तिहाड़ जेल में बंद कुख्यात बदमाश और गैंगस्टर अंकित गुर्जर की मौत का मामला तूल पकड़ सकता है. तिहाड़ की जेल नंबर 3 में बंद अंकित गुर्जर वहां मृत पाया गया. इस मामले में अब जेल प्रशासन ने जांच शुरू कर दी है.गैंगस्टर अंकित गुर्जर की लाश को पोस्टमॉर्टम के लिए दिल्ली के दीनदयाल अस्पताल भेजा गया है. पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट आने के बाद ही मौत का कारण और वक्त भी पता चल पाएगा. यूपी के बागपत का रहने वाला अंकित गुर्जर अपनी दबंगई और संगीन वारदातों के लिए जाना जाता था.
साल 2019 में अंकित गुर्जर पंचायत चुनाव में अपनी एक पोस्ट और धमकियों की वजह से चर्चाओं में आ गया था. उसने अपनी एक पोस्ट में लिखा था "प्यारे गांववालों, इस बार प्रधानी के इस चुनाव में मैं आपकी सेवा के लिए खड़ा हूं. लेकिन मैं चाहता हूं कि इस चुनाव में मैं निर्विरोध चुना जाऊं. इसलिए आप सबसे निवेदन है कि आप में से कोई भी इस चुनाव में मेरे खिलाफ़ खड़ा ना हो. अगर किसी ने मेरे इस निवेदन की अनदेखी की, तो वो मारा जाएगा. आपका अपना, अंकित गुर्जर, ग्राम प्रधान प्रत्याशी, गांव खैला, बागपत."
लोकतंत्र के पहले पायदान पर अपने क़दम जमाने के लिए जो ऐसी ख़ूनी इबारत लिख सकता हो, वो अपनी मनमांगी मुराद हासिल करने के लिए किस हद तक जा सकता है, इसका अंदाज़ा लगाना मुश्किल नहीं है. ये वाकया साल 2019 के पंचायत चुनाव का है. जब जुर्म की दुनिया में पहले ही क़दम रख चुका अंकित गुर्जर सियासत की दुनिया में अपना पहला क़दम रखना चाहता था. लेकिन इत्तेफाक गांव के ही एक शख्स ने उसके लिखे इन हर्फ़ों की अनदेखी कर दी और फिर उसका वही अंजाम हुआ, जो इस पोस्ट में लिखा था. विनोद नाम के उस शख्स को अंकित गुर्जर की गोलियों ने छलनी कर दिया था.
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लेकिन कोई कितना भी बड़ा गुंडा हो, जब वक़्त का पहिया घूमता है, तो फिर अच्छे-अच्छों के दिन बदलते देर नहीं लगती. 8 से ज़्यादा क़त्ल के मामलों का मुल्ज़िम, सवा लाख के इनामी रहे और पश्चिमी उत्तर प्रदेश छंटे हुए बदमाशों में से एक अंकित गुर्जर के साथ कुछ ऐसा ही हुआ. तिहाड़ में बंद गुर्जर की बुधवार चार अगस्त की सुबह रहस्यमयी हालत में अपने ही सेल में लाश मिली. उसके सिर और जिस्म में चोट के कई निशान भी मिलें. जिसे देख कर ये शक है कि उसका जेल के अंदर की क़त्ल कर दिया गया. लेकिन ये क़त्ल ठीक कब हुआ, कैसे हुआ, किसने किया, क्या उसके साथ मारपीट हुई या फिर उसे ज़हर दिया गया, इन सारे सवालों के जवाब फिलहाल पोशीदा हैं और पुलिस को मामले की तह तक पहुंचने के लिए अंकित की लाश का पोस्टमार्टम किए जाने का इंतज़ार है.
बैरक में बेसुध मिले थे दो कैदी, शरीर पर थे चोटों के निशान
अंकित को साउथ दिल्ली के साकेत में हुए एक क़त्ल के मामले में दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने 5 अगस्त 2020 को गिरफ्तार किया था. इसके बाद से वो तिहाड़ जेल के ही जेल नंबर तीन में बंद था. लेकिन बुधवार की सुबह 30 साल का अंकित और उसका एक साथी अपने ही बैरक में रहस्यमयी हालत में पड़े मिले. दोनों को कई चोटें आई थीं. आनन-फानन में जेल कर्मियों ने दोनों को उठा कर दीन दयाल उपाध्याय अस्पताल पहुंचाया, लेकिन डॉक्टरों ने अंकित को मुर्दा करार दिया. ज़ाहिर है जिस तरह जेल के अंदर अंकित और उसका साथी ज़ख्मी मिला, उससे शक है कि उन पर किसी ने हमला किया. लेकिन ये हमला साथी क़ैदियों ने किया या फिर जेल कर्मियों की पिटाई से उसकी मौत हुई, फिलहाल उस पर रहस्य बना हुआ है. हालांकि अंकित के घरवाले जेलकर्मियों पर सीधा-सीधा मडर का आरोप लगा रहे हैं.
परिवार का आरोप- जेल अधीक्षक ने मांगे थे एक लाख!
अंकित के भाई अंकुल गुर्जर का कहना है कि जेल के ही सुपरिंटेंडेट नरेंद्र मीणा ने अपने कुछ मुलाज़िमों के साथ मिल कर अंकित की पीट-पीट कर हत्या कर दी. दरअसल, पिछले दिनों तलाशी के दौरान अंकित के पास एक मोबाइल फ़ोन मिला था. इसी मोबाइल फ़ोन की बरामदगी को लेकर मीणा उसे ब्लैकमेल कर रहे थे. मीणा अंकित गुर्जर से एक लाख रुपये की मांग कर रहे थे. अंकित ने अपने साथियों के ज़रिए ये खबर अपने घरवालों तक भी पहुंचाई थी. घरवालों का कहना है कि अंकित ने उसे 50 हज़ार रुपये की रकम चुका भी दी थी. लेकिन बाकी के 50 हज़ार रुपयों के लिए वो बेसब्र हो गए और उन्होंने मारपीट कर अंकित की जान ले ली. उसे रात करीब तीन बजे के आस-पास इतनी बुरी तरह से पीटा गया कि उसकी तबीयत बिगड़ गई. इसे क़ैदियों के आपस की झड़प का रुप देने के लिए अधिकारियों ने उसके कुछ साथी कैदियों को भी पीटा. इसके बाद सुबह जिस तरह वो अपने ही सेल के अंदर ज़ख्मी हालत में मिला और उसकी मौत हो गई, उससे साफ़ है कि उसे रिश्वत ना देने की सज़ा दी गई. अंकित के घरवालों का ये भी कहना है कि जेल अधिकारी अब अंकित के साथ बंद दूसरे क़ैदियों पर इस बात के लिए दबाव डाल रहे हैं कि वो अंकित के साथ हुई मारपीट का इल्ज़ाम अपने सिर पर ले लें.
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फिलहाल अंकित की मौत को लेकर जेल प्रशासन की तरफ से कोई बयान नहीं आया है, लेकिन पूरे मामले की जांच मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट के हवाले कर दी गई है. सूत्रों का कहना है कि इस जांच के बाद ही ये साफ हो पाएगा कि अंकित की मौत की असली वजह क्या है. सूत्रों की मानें अंकित गुर्जर सुंदर भाटी गैंग से जुड़ा हुआ था और साल 2015 में उसने भाजपा नेता विजय पंडित की ग्रेटर नोएडा में हत्या कर दी थी. उसके खिलाफ हत्या, जबरन वसूली और लूट के लगभग दो दर्जन मामले दर्ज थे. जुर्म की दुनिया में अंकित के बढ़ते दबदबे को देखते हुए दिल्ली पुलिस ने उसके खिलाफ मकोका के तहत कार्रवाई की थी और उसे गिरफ्तार किया था. पुलिस की मानें तो अंकित पश्चिमी उत्तर प्रदेश के साथ-साथ साउथ दिल्ली में भी अपना दबदबा बनाना चाहता था और इसी इरादे से उसने गैंगस्टर रोहित चौधरी के साथ मिल कर चौधरी गुर्जर गैंग बनाया था. लेकिन इससे पहले कि वो और कोहराम मचा पाता, वो गिरफ्तार कर लिया गया और अब जेल में संदिग्ध हालत में उसकी मौत हो गई.
तिहाड़ जेल से ही अपने गैंग चलाते हैं कई बदमाश
अब बात तिहाड़ जेल की सुरक्षा की. वैसे तो तिहाड़ को बेशक देश का सबसे सुरक्षित जेल माना जाता हो, लेकिन हकीकत यही है कि यहां जेल में बैठे गैंगस्टर आसानी से अपना गैंग चलाते हैं. जेल में मोबाइल फ़ोन से लेकर, नशे की चीज़ें और या हथियार वगैरह आसानी से मिल जाते हैं. और क़ैदी इसका पूरा फायदा उठाते हैं. नीरज बवानिया, लॉरेंस विश्नोई, संपत नेहरा सरीखे गैंगस्टर के बारे में कहा जाता है कि वो जेल में बैठे-बैठे मोबाइल फ़ोन से लोगों को वसूली के लिए फ़ोन करते हैं. और जैसे ही कोई कारोबारी या अमीर आदमी पैसे देने से इनकार करता है, तो जेल के बाहर मौजूद अपने गुर्गों से उन पर गोली चलवा देते हैं. सूत्रों का कहना है कि तिहाड़ में बंद अंकित गुर्जर के ईरादे भी कुछ ऐसी ही थे. इसीलिए उसने रोहित चौधरी गैंग से हाथ मिलाया था और चोरी छिपे अपने लिए मोबाइल फोन का इंतज़ाम करने में भी कामयाब हो चुका था. लेकिन इसी बीच उसका फोन पकड़ा गया और बात बिगड़ गई.
तिहाड़ में मिलते रहे हैं मोबाइल, सुरक्षा पर भी सवाल
तिहाड़ जेल में एक बार नहीं दर्जनों बार कैदियों के पास से मोबाइल बरामद किए गए हैं, सिर्फ मोबाइल नहीं बल्कि स्मार्ट फोन तक पकड़े गए हैं. ये सिर्फ कहने की बात नहीं बल्कि खुद जेल के क़ैदियों ने जेल से वीडियो बनाकर बाहर की दुनिया में वायरल किया. और ये बताया है कि तिहाड़ में कैसे लाइफ को एन्जॉय कर रहे हैं कैदी. यानी इससे ये तो साफ होता है कि तिहाड़ जेल में कैदी मोबाइल फोन का इस्तेमाल करते हैं. लेकिन आजतक/इंडिया टुडे ने जब इस मामले में तिहाड़ जेल अथॉरिटी से RTI के तहत कुछ सवाल पूछे तो तिहाड़ प्रशासन ने उन सवालों के जवाब में उल्टी ही गंगा बहानी शुरू कर दी. आजतक/इंडिया टुडे ने आरटीआई के तहत 4 सवाल पूछे-
सवाल नंबर-1- तिहाड़ जेल के परिसर में कितने फोन जैमर हैं?
सवाल नंबर-2- जैमर के नाम क्या हैं और उन्हें तिहाड़ में कब लगाया गया?
सवाल नंबर-3- इन जैमर को लगाने में कितने पैसे खर्च किए गए?
सवाल नंबर-4- उनमें से कितने जैमर मोबाइल के 4G सिग्नल को ब्लॉक कर सकते हैं?
इन सवालों के जवाब में तिहाड़ के डायरेक्टर जनरल ने सवाल नंबर 1, 2 और 4 का जवाब देने से इंकार कर दिया. डीजी की तरफ से कहा गया कि ये जेल की सुरक्षा से जुड़ा मुद्दा है. इसके जवाब से तिहाड़ की सुरक्षा खतरे में आ सकती है. इसके लिए उन्होंने section 8 (g) of RTI Act 2005 का हवाला दिया. यानी कैदियों के फोन पर बात करने से जेल की सुरक्षा खतरे में नहीं पड़ती, मगर सवाल पूछने पर पड़ सकती है. खैर तीसरे सवाल के जवाब में कि दिल्ली की जेल में जैमर को लगाने में कितने पैसे खर्च किए गए? तिहाड़ जेल की तरफ से जवाब मिला कि जेल में जैमर को इंस्टॉल करने के लिए कुल 6 करोड़ 87 लाख 66 हजार 267 रुपये खर्च हुए हैं.