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सुरक्षा पर सवालः नया नहीं कत्ल का मामला, तिहाड़ जेल में पहले भी हुए हैं मर्डर

तिहाड़ जेल की गिनती बेशक देश की सबसे हाई सिक्योरिटी जेलों में होती हो, लेकिन ये भी सच है कि तिहाड़ जेल में जुर्म की हर वो वारदात होती रही है, जो आप सोच सकते हैं. फिर चाहे वो नशे की तस्करी हो, मोबाइल फ़ोन पर रंगदारी वसूलने का खेल, किसी के नाम की सुपारी देने का धंधा या फिर सीधे-सीधे क़त्ल.

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तिहाड़ में छापे के दौरान आपत्तिजनक सामान बरामद होता रहा है (फाइल फोटो)
तिहाड़ में छापे के दौरान आपत्तिजनक सामान बरामद होता रहा है (फाइल फोटो)
स्टोरी हाइलाइट्स
  • तिहाड़ में पिछले चार वर्षों में हुए 4 मर्डर
  • छापे में कैदियों के पास मिले ड्रग्स और मोबाइल
  • देश में सबसे सुरक्षित मानी जाती है तिहाड़ जेल

कहते हैं हिंदुस्तान में तिहाड़ से ज्यादा महफूज और हाईटैक कोई दूसरी जेल नहीं है. हां, तिहाड़ में कैदियों की भीड़ भी बाकी जेलों के मुकाबले ज्यादा ज़रूर है. मगर फिर भी इसी तिहाड़ से अक्सर नशे की खेप भी मिलती है और मोबाइल फ़ोन भी. क़त्ल के लिए चाकू भी मिल जाता है और क़त्ल करने का मौका भी. तिहाड़ में इससे पहले भी कत्ल की कई वारदातें हो चुकी हैं

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तिहाड़ जेल की गिनती बेशक देश की सबसे हाई सिक्योरिटी जेलों में होती हो, लेकिन ये भी सच है कि तिहाड़ जेल में जुर्म की हर वो वारदात होती रही है, जो आप सोच सकते हैं. फिर चाहे वो नशे की तस्करी हो, मोबाइल फ़ोन पर रंगदारी वसूलने का खेल, किसी के नाम की सुपारी देने का धंधा या फिर सीधे-सीधे क़त्ल. और ऐसा हम नहीं कह रहे, बल्कि ये सारी सच्चाई अलग-अलग वक्त पर कभी वारदात की शक्ल में सामने आती रही है, तो कभी जेल में हुई छापेमारी के दौरान ये राज़ खुले हैं.

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ज़्यादा पुरानी बात नहीं है. पिछले अप्रैल महीने में ही रोहिणी की मंडोली जेल में ब्लेडबाज़ी का मामला सामने आया था. जब जेल नम्बर 15 की बैरक नम्बर 3 में बंद कैदियों का एक वीडियो वायरल हुआ, जिसमें कुछ क़ैदी ये इल्ज़ाम लगा रहे थे कि उन्हें जेल नम्बर 15 के इंचार्ज दीपक शर्मा ने ब्लेड से लहूलुहान कर दिया है. लेकिन बड़ा सवाल ये है कि आखिर जेल में ब्लेडबाज़ी हुई कैसे? और क़ैदियों ने इस ब्लेडबाज़ी का वीडियो कैसे बनाया? कहने का मतलब ये कि कैदियों के पास मोबाइल फ़ोन कहां से आया?

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वैसे ये कोई इकलौता मामला नहीं है, इससे पहले भी तिहाड़ जेल की अनगिनत ऐसी तस्वीरें सामने आ चुकी हैं. तिहाड़ में पिछले कई सालों से हर साल क़त्ल की वारदात होती रही है. साल 2017, 2018, 2019 के बाद अब 2020 में भी एक क़त्ल हुआ है. ये क़ैदियों के पास हथियारों की मौजूदगी का सबूत भी है. अलग-अलग वक्त पर छापेमारी में नशे की खेप भी अक्सर पकड़ी जाती है.

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ऐसे में तिहाड़ जेल की साख के उलट जेल के सुरक्षा इंतज़ाम सवालों के घेरे में है. दिल्ली के कुख्यात गैंगस्टर नीरज बवानिया पर भी जेल में बैठे-बैठे रंगदारी वसूलने के ना सिर्फ़ इल्ज़ाम लगते रहे हैं, बल्कि कई एफआईआर भी दर्ज हो चुकी हैं. ये इस बात का सबूत है कि बड़े क़ैदी जेल में ऐशो आराम की ज़िंदगी जी रहे हैं और उनके के लिए मोबाइल जैसी चीज़ भी आसानी से उपलब्ध है.

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