
दक्षिण-पश्चिम दिल्ली के पॉश इलाके वसंत विहार में शनिवार को एक मां और दो बेटियों ने सामूहिक आत्महत्या कर ली थी. आशंका जताई जा रही है कि तीनों ने सुनियोजित तरीके से यह कदम उठाया है. खुद को खत्म करने के लिए उन्होंने कुछ महीने पहले से ही तैयारी शुरू कर दी थी. पुलिस की शुरुआती जांच और सुसाइड नोट ने तीनों के मरने की वजह कुछ हद तक साफ कर दी है.
पुलिस के मुताबिक, वसंत अपार्टमेंट के फ्लैट नंबर 207 में मां और बेटियां मृत पाई गई थीं. जिनकी पहचान मंजू श्रीवास्तव (55), अंकिता (30) और अंशुता (26) के तौर पर हुई. रिश्तेदारों और घर की पुरानी कामवाली से पता चला कि इस परिवार के मुखिया उमेश श्रीवास्तव पेशे से चार्टर्ड अकाउंटेंट (CA) थे. पिछले साल Covid -19 से मौत हो गई थी. तभी से परिवार के बाकी तीनों सदस्य डिप्रेशन में चल रहे थे. इसके पीछे की वजह अपने अभिभावक को खोने का गम और घर की तंगहाली थी. रिश्तेदारों की मानें तो घर के माली हालत ने मां-बेटियों की जिंदगी को और अधिक दयनीय बना दिया था.
दीवार पर लिखी थी चेतावनी
पुलिस के मुताबिक, घटनास्थल से मिले सुसाइड नोट से ऐसा लगता है कि मृतक परिवार पिछले कुछ महीनों से ही खुदकुशी करने की प्लानिंग बना रहा था. दरअसल, जब पुलिस ने पहली बार घटनास्थल का दौरा किया, तो उन्हें दीवार पर हाथ से लिखी चेतावनी के साथ एक नोट चिपका हुआ मिला, जिस पर लिखा था, ''अंदर बहुत अधिक खतरनाक गैस है…. कार्बन मोनोऑक्साइड. यह ज्वलनशील है. कृपया खिड़की खोलकर कमरे को हवादार बनाएं और पंखा चालू करें. लाइटर, माचिस, मोमबत्ती या और कुछ भी न जलाएं!! परदे को हटाते वक्त सावधानी बरतें क्योंकि कमरा खतरनाक गैसों से भरा है. सांस नहीं लें. अंदर की खिड़की को बाहर से खोलें.''
खिड़कियों को कर दिया था पैक
पुलिस ने फ्लैट में यह पाया कि घर में रखे सिलेंडर से गैस रिस रही थी. यही नहीं, कमरे में तीन छोटी अंगीठी भी रखी हुई थीं. यह भी बताया गया कि मरने से पहले परिवार ने अंगीठी में कोई रासायनिक पदार्थ डालकर छोड़ दिया था ताकि धीरे-धीरे जहरीली गैस कमरे में जमा होती रहे. इसके लिए कमरे की खिड़कियों और रोशनदानों को पहले से ही पॉलीथिन से पैक कर दिया गया था ताकि गैस बाहर न निकले.
यूट्यूब से सीख तरीका
चौंकाने वाला खुलासा यह हुआ है कि घर को गैस चेंबर में बदलने का तरीका उन्होंने यूट्यूब वीडियो देखकर सीखा था. इसी के चलते इस घर की दोनों लड़कियों ने ई कॉमर्स वेबसाइट से अंगीठी, पॉलीथिन चिपकाने के लिए टेप और फायल पेपर समेत अन्य सामान मंगवाया था.
मौत का दोष किसी को नहीं
सुसाइड नोट में लिखा, "हम अपनी जिंदगी से हार चुके ....'' उन्होंने अपने घर के बिगड़े आर्थिक हालात के बारे में भी बताया और लिखा कि उनके पास किसी भी तरह का कोई सपोर्ट नहीं था. अपनी मौत का उन्होंने किसी को दोष नहीं मढ़ा यानी किसी के खिलाफ कोई आरोप नहीं लगाया.
किराएदारों से खाली करा लिया था दूसरा फ्लैट
इसके अलावा, नोट में इस बात का भी जिक्र किया कि उन्होंने अपना बगल का दूसरा फ्लैट जानबूझकर किराएदारों से खाली कर दिया था, ताकि किसी को कुछ पता न चल सके और खुदकुशी जैसा कदम प्रभावी ढंग से उठाया जा सके. उन्होंने लिखा कि अगर किराएदार इस घर के बगल में रहते, तो वे कभी भी इस तरह से उनकी आत्महत्या की प्लानिंग सफल नहीं हो पाती. हालांकि, पुलिस अब सुसाइड नोट की सत्यता की पुष्टि कर रही है.
अकाउंटिंग-फाइनेंस पढ़ चुकी थीं अंकिता और अंशुता
प्रवीण श्रीवास्तव नाम के एक रिश्तेदार ने कहा कि मंजू और उनकी दो बेटियां अपने परिवार के मुखिया के गुजर जाने से उबर नहीं पाईं. अंकिता और अंशुता ने अकाउंटिंग और फाइनेंस की पढ़ाई की थी, और अपने-अपने क्षेत्र में आगे बढ़ना चाहती थीं, लेकिन पिता की मौत के बाद रोजमर्रा के खर्चों को पूरा करना उनके लिए एक चुनौती बन गया था.
मां का चल रहा था इलाज
उत्तर प्रदेश के मैनपुरी जिले से दिल्ली आए एक अन्य रिश्तेदार अंशुल श्रीवास्तव ने बताया कि उनकी चाची मंजू मानसिक रूप से परेशान थीं. उनके पति उमेश की मौत के बाद उसकी स्थिति और खराब हो गई थी. साथ ही बताया गया कि वह बीमारियों से ग्रसित होने की वजह से चलने फिरने में भी असमर्थ थीं. उनकी दवाइयों पर काफी खर्चा हो रहा था. उनके पास राशन तक के पैसे नहीं बचे थे. हालांकि, उन्होंने कभी भी अपने नजदीकियों को आर्थिक संकट की बात नहीं बताई थी.
(कुमार कुणाल और अमरदीप कुमार के इनपुट के साथ)