महाराष्ट्र पुलिस ने बुकी अनिल जयसिंघानी को गुजरात के गोधरा बॉर्डर से अरेस्ट किया है. वो देश का टॉप बुकी है और वो लंबे समय से फरार था. कहा जाता है कि उसके अंडरवर्ल्ड से कनेक्शन भी हैं. उसके खिलाफ 17 केस दर्ज हैं. इसके साथ ही अनिल के एक ड्राइवर और एक रिश्तेदार को हिरासत में भी लिया गया है. आरोप है कि ये दोनों उसकी मदद कर रहे थे. आरोप है कि अनिल को इन मामलों में छुड़ाने के लिए साजिश के तहत उसकी बेटी अनिक्षा ने डिजॉयनर बनकर अमृता फडणवीस से दोस्ती की थी. फिर धमकी और ब्लैकमेल किया.
गिरफ्तारी के लिए लॉन्च किया गया था ऑपरेशन AJ
अनिल की गिरफ्तारी के लिए ऑपरेशन AJ लॉन्च किया गया था. इसमें 5 टीमें बनाई गई थीं. आरोपी लगातार पुलिस को चकमा दे रहा था. इसी दौरान पता चला कि वो गुजरात के बारबोली गांव में है. इस पर तीन टीमें गुजरात पहुंचीं. मगर, आरोपी वहां से भागकर सूरत चला गया.
इसी तरह वो लुकाछिपी का खेल खेलते हुए भरूच, वडोदरा के बाद गोधरा पहुंचा, यहां पुलिस ने उसे धर दबोचा. DCP साइबर सेल के मुताबिक, आरोपी अनिल जयसिंघानी को अरेस्ट कर लिया गया है. अमृता फडणवीस के मामले में मालाबार हिल पुलिस जांच करेगी.
अमृता फडणवीस ने पुलिस में दर्ज कराया था केस
बता दें कि महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम देवेंद्र फडणवीस की पत्नी अमृता फडणवीस ने बीते दिनों एक डिजाइनर पर गंभीर आरोप लगाते हुए मुंबई के मालाबार हिल पुलिस स्टेशन में केस दर्ज कराया था. अमृता की शिकायत के आधार पर, पुलिस ने 2 लोगों के खिलाफ केस दर्ज कर जांच शुरू की. अमृता ने आरोप कि अनिक्षा नाम की एक महिला डिजाइनर ने उन्हें धमकी दी, साजिश रची और 1 करोड़ की रिश्वत की पेशकश की. अनिक्षा करीब 16 महीने से अमृता के संपर्क में थी.
शिकायत में अमृता ने कहा कि उन्हें 18 और 19 फरवरी को अनिक्षा ने एक अज्ञात फोन नंबर से अपने वीडियो क्लिप, वॉयस नोट्स और कई संदेश भेजे. अमृता के मुताबिक, अनिक्षा के पिता भी इस मामले में उसका साथ दे रहे थे. अमृता ने कहा कि वह पहली बार नवंबर 2021 में अनिक्षा से मिली थीं. इसके बाद अनिक्षा से कई बार मुलाकात हुई.
जयसिंघानी पर लग चुके हैं सट्टेबाजी के आरोप
अनिक्षा के पिता जयसिंघानी पर सट्टेबाजी के आरोप लग चुके हैं. जयसिंघानी का नाम डेढ़ दशक पहले उस समय सामने आया था, जब उसने आरोप लगाया था कि मुंबई के पूर्व डीसीपी जाधव, क्राइम ब्रांच ने उसे क्रिकेट में सट्टेबाजी करने के लिए मजबूर किया और कथित तौर पर उसने बच्चों और पत्नी को बंधक बनाकर रखा.
पुलिस अधिकारियों ने जाधव के खिलाफ आरोपों के बारे में जानकारी नहीं दी थी. जाधव को कथित तौर पर छुट्टी पर आगे बढ़ने के लिए कहा गया था और कुछ वर्षों के बाद उन्होंने वीआरएस की मांग की. इसके बाद पुलिस विभाग छोड़ दिया. जयसिंघानी ने तब आरोप लगाया था कि उसके परिवार को तब छोड़ा गया जब डीसीपी अमर जाधव को 1 करोड़ रुपये दिए गए.