यूपी पुलिस की वर्दी को दागदार कर देने वाले गोरखपुर के मनीष गुप्ता हत्याकांड को पूरा एक सप्ताह बीत चुका है, लेकिन अभी भी आरोपी पुलिसवाले एसआईटी और पुलिस की पहुंच से बाहर हैं. शनिवार को कानपुर से गोरखपुर पहुंची एसआईटी टीम ने मौका-ए-वारदात समेत कई जगहों पर जांच पड़ताल की. एसआईटी का दावा है कि सभी बिन्दुओं पर छानबीन करने के बाद बहुत से ऐसे सबूत उनके हाथ लगे हैं, जो बहुत जल्द इस पूरे मामले का खुलासा भी कर सकते हैं
कानपुर के कारोबारी मनीष गुप्ता के मर्डर की जांच के लिए एसआईटी रविवार की सुबह से ही जांच पड़ताल में लगी रही. दूसरे दिन एसआईटी की अलग-अलग टीम एक साथ होटल कृष्णा पैलेस, मानसी हॉस्पिटल और बीआरडी मेडिकल कॉलेज पहुंची और वहां जाकर मामले से जुड़े सबूत जुटाए. एसआईटी ने रविवार की दोपहर तक तो सर्किट हाउस में ही सारे सबूतों और तथ्यों का अध्ययन किया, वहीं पर मनीष गुप्ता के शव का पंचनामा करने वाले मेडिकल कालेज चौकी के दरोगा को बुलाया गया और उससे कुछ सवाल किए गए.
इसके बाद केस के आईओ रहे क्राइम बांच के दिलीप पाण्डेय को बुलाया गया और उनसे कुछ सवाल पूछे गए. दोपहर बाद टीम सर्किट हाउस से निकली तो रामगढ़ताल, क्राइम ब्रांच आफिस, मानसी हॉस्पिटल और मेडिकल कालेज के ट्रांमा सेंटर जाकर जांच की. सभी जगहों पर संबंधित लोगों के बयान लिए गए. फिर बयानो को सीसीटीवी फुटेज के जरिए समझने की कोशिश की.
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सोमवार को एक बार फिर एसआईटी मानसी हॉस्पिटल पहुंची. एसआईटी टीम ने थाने की जीडी को भी खंगाला. एसआईटी देखना चाहती थी कि जीडी में इंस्पेक्टर और दूसरे पुलिसवालों की रवानगी दर्ज है या नहीं? रवानगी में पुलिस वालों ने क्या दर्शाया है? घटना के बाद वापसी में कोई तस्करा डाला है क्या? तस्करा में क्या लिखा है? लेकिन एसआईटी को यहां पर भी खामियां मिली. कहीं भी तस्करा दर्ज नहीं हुआ है. एसआईटी ने पुलिस कर्मियों से आरोपित पुलिस वालों के व्यवहार, कार्यशैली के बारे में भी जानकारी की.
वहीं रामगढ़ताल के इंस्पेक्टर की उस जीप से भी फोरेंसिक टीम ने नमूने लिए जिससे मनीष गुप्ता को घायल हालत में अस्पताल ले जाया गया था. एसआईटी टीम क्राइम ब्रांच आफिस भी पहुंची. टीम ने वहां भी आईओ से बातचीत की. उन्होंने विवेचना में अब तक कितने पर्चे काटे हैं, उसे देखा और पढ़ने के साथ ही अन्य बिंदुओं पर जानकारी जुटाई. करीब चार घंटे के दौरान एसआईटी ने अब तक सामने आए सभी सबूतों के आधार पर एक बार फिर केस का आंकलन कर उसे नोट किया.
फिर सोमवार को तीसरी बार एसआईटी टीम मानसी हॉस्पिटल पहुंची जहां सबसे पहले मनीष गुप्ता को लेकर पुलिसवाले आए थे. इस दौरान एसआईटी ने डॉक्टर से भी पूछताछ की. जब मनीष को लेकर पुलिस पहुंची तो पल्स नहीं चल रही थी. डॉक्टर से जब हमने इस मामले में बात करने की कोशिश की तो एसआईटी और उनके बीच की बात को उन्होंने बताने से मना कर दिया. डॉक्टर ने बताया कि हमने तत्काल उसे बीआरडी मेडिकल कॉलेज के लिए रेफर कर दिया.
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इस दौरान एसआईटी ने डॉक्टर से पूछा कि पुलिस वाले वहां कितने बजे आए थे? हालांकि रात में करीब सात बजे टीम दोबारा आई और कुछ देर तक जांच करने के बाद सर्किट हाउस लौट गई. एसआईटी ने मेडिकल कॉलेजों के ट्रॉमा सेंटर का दौरा भी किया. जहां पर ट्रामा सेंटर के सीसीटीवी कैमरे खराब मिले. मृतक मनीष गुप्ता को भर्ती करने के लिए पर्चे बनाए गए थे.
मनीष को अंदर लेकर जाने के लिए पुलिस को स्ट्रेचर भी मिला था या नहीं? मनीष को लेकर कितने बजे पुलिस पहुंची थी? कितनी देर तक और क्या इलाज किया गया? मौत की पुष्टि होने से पहले किस तरह के घाव उसके शरीर पर नजर आए थे? इन सभी सवालों का जवाब एसआईटी ने तलाश किया.
कई बार पूछने पर भी एसआईटी के प्रमुख ने मनीष गुप्ता हत्याकांड के बारे में कुछ भी बताने से इनकार कर दिया. लेकिन इतनी गहन जांच को देखकर लग रहा है कि इस मामले में जल्द ही कोई बड़ा खुलासा होने वाला है और संभवत 2 दिनों के अंदर जांच पूरी भी हो जाएगी.
ये था पूरा मामला
बता दें कि कानपुर के कारोबारी मनीष गुप्ता अपने दो दोस्तों के साथ गोरखपुर गए हुए थे. जहां 27 सितम्बर की देर रात पुलिस होटल में ठहरे लोगों की जांच के लिए पहुंची थी. रामगढ़ताल थाना क्षेत्र के देवरिया बाईपास रोड पर स्थित होटल के कमरा नंबर 512 में मनीष गुप्ता और उनके दो साथी मौजूद थे. पुलिसवालों ने उनके आईडी चेक किए थे. लेकिन जब पुलिस होटल के कमरे से बाहर निकली तो अपने साथ मनीष गुप्ता को लहूलुहान हालत में लेकर आई.
फिर पुलिसवालों ने मनीष को अधमरी हालत में अपनी गाड़ी में डाला और देर रात उसे मानसी अस्पताल लेकर पहुंचे. लेकिन कुछ देर बाद ही वे मनीष को वहां से बीआरडी मेडिकल कॉलेज लेकर गए, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर डेड बॉडी मॉर्चरी में रखवा दी. इस घटना को लेकर आलाधिकारियों के कान खड़े हो गए थे. आरोपी पुलिसवालों को बचाने के लिए गोरखपुर के डीएम और एसएसपी भी मृतक मनीष गुप्ता के परिजनों पर दबाव बनाने से बाज नहीं आए. मृतक के परिवार ने डीएम-एसएसपी की इस हरकत का स्टिंग ऑपरेशन कर वीडियो वायरल कर दिया था. इस पूरे मामले में यूपी पुलिस के साथ-साथ सरकार की जमकर किरकिरी हुई.
इस घटना पर संज्ञान लेते हुए उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ तत्काल थाना प्रभारी सहित सभी पुलिसकर्मियों को निलंबित करने का निर्देश दिया था. थाना प्रभारी जगत नारायण सिंह सहित 6 पुलिसकर्मी निलंबित किए गए और तीन पुलिसकर्मियों के खिलाफ नामजद एफआईआर दर्ज की गई. लेकिन हैरानी की बात ये है कि इस घटना के सभी आरोपी पुलिसवाले फरार हो गए हैं, जो अभी तक पुलिस और एसआईटी के हाथ नहीं आ रहे हैं.