गुजरात में नकली अधिकारियों के अवैध वसूली करने के अनेक किस्से पिछले एक साल में सामने आए हैं. लेकिन इस बार एक असली पुलिस इंस्पेक्टर का वसूली और ब्लैकमेलिंग कांड पूरे सूबे में चर्चा का विषय बन गया. ये मामला इतना बड़ा निकला कि इसकी जांच आतंक विरोधी दस्ते (ATS) को सौंपनी पड़ी. और आखिरकार सात दिन बाद ATS ने फरार पुलिस इंस्पेक्टर तरल भट्ट को गिरफ्तार कर लिया. चलिए अब आपको ये पूरा मामला बताते हैं.
पुलिस इंस्पेक्टर तरल भट्ट जूनागढ़ के मणावदर सर्कल में तैनात था. उसे खुद उसके महकमे के लोग यानी पुलिस टीम जूनागढ़ वसूली कांड मामले में तलाश कर रही थी. वो आगे था और एटीएस की टीम पीछे-पीछे. इसी के चलते एटीएस की टीम ने तरल भट्ट के अहमदाबाद स्थित शिवम रेजिडेंसी पर छापेमारी की. उसके परिवार के सदस्यों से पूछताछ की. तरल भट्ट की प्रॉपर्टी और बैंक अकाउंट की सारी जानकारियां हासिल की.
इसी जांच के दौरान पता चला कि आरोपी पीआई तरल भट्ट ब्लैकमेलिंग केस में ही शामिल नहीं था बल्कि माधुपुरा क्रिकेट सट्टाकांड में भी उसकी भूमिका संदिग्ध थी. इस मामले का खुलासा कैसे हुआ? और किस तरह से ये वर्दीवाला खुद अपराधी बन गया? इसकी कहानी भी काफी दिलचस्प है.
जानकारी के मुताबिक, केरल के एक व्यापारी का बैंक अकाउंट जूनागढ़ एसओजी (SoG) ने सीज किया था. जिसको लेकर व्यापारी ने पुलिस से संपर्क किया तो उन्हें जूनागढ़ आने के लिए कहा गया. व्यापारी जूनागढ़ पहुंचा और इसके बाद उसे ED में फंसाने की धमकी दी गई. बैंक अकाउंट अनफ्रिज कराने के लिए उस कारोबारी से एक दो लाख नहीं बल्कि 25 लाख रुपये मांगे गए.
इस बात से परेशान होकर पीड़ित व्यापारी ने जूनागढ़ रेंज के आईजी (IG) से संपर्क किया और उन्हें पूरा मामला बताकर मदद मांगी. आइजी ने जांच की तो पता लगा कि एसओजी ने ऐसे एक या दो नहीं बल्कि 335 बैंक अकाउंट गलत तरीके से फ्रीज किए थे. जिसमें मुख्य भूमिका पीआई तरल भट्ट, पीआई अरविंद गोहिल और एएसआई दीपक जानी की थी. इसके बाद उन तीनों को सस्पेंड कर दिया गया. और 26 जनवरी के दिन FIR दर्ज कर कार्रवाई शुरू कर दी गई थी. जिसके बाद से ही सर्कल पीआई तरल भट्ट समेत तीनों पुलिसकर्मी फरार हो गए थे.
फिर निलंबित पीआई तरल भट्ट ने जूनागढ़ सेशन कोर्ट में अग्रिम जमानत याचिका लगाई थी. सेशंस कोर्ट ने इस पर सुनवाई 6 फरवरी को तय की है. हालांकि अब जब तरल भट्ट को ATS ने गिरफ्तार कर लिया है, ऐसे में एटीएस ने जूनागढ़ तोडकांड और माधुपुरा क्रिकेट सट्टेबाजी मामले में भी तरल भट्ट की भूमिका के बारे में जांच शुरू कर दी है. तरल भट्ट पर आरोप है कि उसने सट्टेबाजी में फ्रीज किए गए बैंक खातों को अनफ्रीज करने के लिए पैसों की मांग की थी.
यह भी दावा किया गया है कि कुछ वक्त पहले अहमदाबाद के माधुपुरा में 2500 करोड़ के क्रिकेट सट्टाकांड का पर्दाफाश हुआ था. जिसकी जांच तरल भट्ट के पास थी. जांच के दौरान कई खातों की जानकारी उसने पुलिस को नहीं दी थी. इस सट्टाकांड में 1000 से अधिक बैंक अकाउंट का इस्तेमाल हुआ था. इसी क्रिकेट सट्टाकांड में पीआई तरल भट्ट की संदिग्ध भूमिका के चलते ही कुछ समय पहले उसका तबादला जूनागढ़ कर दिया गया था.
अब तरल भट्ट एटीएस की लॉकअप में है. तब दावा किया जा रहा है कि फरार होने पर उसकी पहली लोकेशन श्रीनाथजी और फिर इंदौर में मिली थी. ATS ने जैसे ही तरल भट्ट को गिरफ्तार किया, उसके बाद राज्य के डीजीपी विकास सहाय खुद एटीएस पहुंचे और उन्होंने तरल भट्ट से पूछताछ भी की. अब कल जूनागढ़ कोर्ट में तरल भट्ट को पेश किया जाएगा.
साल 2008 में गुजरात पुलिस में भर्ती हुआ था आरोपी PI
तरल भट्ट 2008 में गुजरात पुलिस में पीएसआई के तौर पर शामिल हुआ और साइबर अपराधों को सुलझाने में उसने महारथ हासिल की. लेकिन प्रमोशन के साथ तरल भट्ट में बदलाव भी तेजी से देखने को मिले. कई बार तरल भट्ट पर अलग-अलग केसों में जांच के दौरान रुपये मांगने के आरोप लगते रहे. कुछ क़िस्से कोर्ट तक भी पहुंचे और उसे फटकार के साथ तबादलों का भी सामना करना पड़ा.