गुजरात के लिए साल 2024 नशीली दवाओं की खेप पकड़े जाने का साल रहा. जिसके चलते सुरक्षा एजेंसियों ने राज्य में 6,450 करोड़ रुपये की नशीली दवाएं जब्त की. इस साल राज्य में कुल 4,862 किलोग्राम नशीली दवा की खेप पकड़ी गई, जिसमें चरस, मेफेड्रोन (MD Drug), कोकीन और हशीश शामिल है.
राज्य की पुलिस और मादक पदार्थ निरोधक एजेंसियां इस साल पांच बड़ी नशीली दवाओं की खेप पकड़ने में कामयाब रहीं, जिनमें से अधिकांश अरब सागर में पकड़ी गईं. इस साल की सबसे पहली खेप पकड़े जाने पर पूरे राज्य में सनसनी फैल गई थी. इस खेप का कनेक्शन विदेशी माफियाओं के साथ बताया गया था. अब हम आपको बताते हैं कि गुजरात में कब और कैसे नशे की बड़ी खेप पकड़ी गई.
- फरवरी में, सुरक्षा एजेंसियों ने एक संयुक्त अभियान चलाया और उसी के तहत एक नाव से 3,300 किलोग्राम से अधिक मादक पदार्थ जब्त किए गए थे.
- एक महीने बाद, 13 मार्च को, पोरबंदर के तट से 420 करोड़ रुपये मूल्य की 60 किलोग्राम मेथमफेटामाइन जब्त की गई थी.
- अगस्त में, अधिकारियों ने भरूच और ठाणे में एक ऑपरेशन के तहत बड़े पैमाने पर मेफेड्रोन निर्माण करने वाली फैक्ट्रियों का पर्दाफाश किया, जिसमें 831 करोड़ रुपये मूल्य की 800 किलोग्राम ड्रग्स जब्त की गई.
- अक्टूबर में एमपी से जुड़ी की एक फैक्ट्री से 1,814 करोड़ रुपये की ड्रग्स और निर्माण सामग्री जब्त की गई.
- नवंबर में पोरबंदर के तट से करीब 700 किलोग्राम ड्रग्स जब्त की गई.
एजेंसियों के सूत्रों के मुताबिक, अभी भी गुजरात में नशे का कारोबार करने वालों के खिलाफ अभियान जारी है. उनकी धरपकड़ और बरामदगी के प्रयास लगातार किए जा रहे हैं.
गुजरात का समुद्री मार्ग
आपको बता दें कि गुजरात तट खासकर मुंद्रा जैसे बंदरगाह के ज़रिए बड़ी मात्रा में ड्रग की खेप लाने के लिए एक खास एंट्री प्वाइंट के रूप में उभरा है. इस समुद्री मार्ग का इस्तेमाल अक्सर अंतरराष्ट्रीय सिंडिकेट करता है, जो अपने शिपमेंट को कानूनी आयात के रूप में छिपाते हैं. हाल के इतिहास में सबसे बड़ी ड्रग बरामदगी सितंबर 2021 में गुजरात के मुंद्रा बंदरगाह पर हुई थी, जहां लगभग 3,000 किलोग्राम हेरोइन जब्त की गई थी. जिसकी कीमत 21,000 करोड़ रुपये से अधिक थी. ड्रग्स को अफगानिस्तान से टैल्क के रूप में लेबल किए गए कंटेनरों में छिपाया गया था.
गुजरात के इस समुद्री मार्ग का उपयोग इस क्षेत्र के व्यापक समुद्री व्यापार नेटवर्क के कारण पसंद किया जाता है, जो तस्करों को अवैध वस्तुओं को वैध आयात के साथ मिलाकर एक कवर प्रदान करता है. दुबई और अन्य खाड़ी देशों में स्थित माफियाओं के साथ मिलकर काम करने वाले अफ़गान ड्रग कार्टेल, भारत में नशीले पदार्थों को भेजने के लिए इस मार्ग का उपयोग करने के लिए जाने जाते हैं. एक बार जब ये ड्रग्स गुजरात में प्रवेश करते हैं, तो उन्हें राज्यों में वितरित किया जाता है, जिसमें से महत्वपूर्ण मात्रा राष्ट्रीय राजधानी में पहुंचती है.