
गुजरात के कच्छ में मुंद्रा पोर्ट पर पकड़ी गई अफगानी हेरोइन की कीमत 9000 करोड़ से 11000 करोड़ तक पहुंच चुकी है. पिछले 6 दिन से नशे की इस खेप के मूल्यांकन का काम जारी है. माना जा रहा है कि इसकी कीमत 20000 करोड़ रुपये तक हो सकती है. ड्रग्स की इस खेप का कनेक्शन आंध्र प्रदेश के विजयवाड़ा से बताया जा रहा था. लेकिन अब इसमें तालिबान और आईएसआई का कनेक्शन भी सामने आया है. ऐसे में राष्ट्रीय जांच एजेंसी भी इस मामले की जांच कर सकती है.
डीआरआई के अनुसार, हेरोइन ले जाने वाले कंटेनर्स को आंध्र प्रदेश के विजयवाड़ा स्थित एक फर्म द्वारा आयात किया गया था और फर्म ने खेप को 'टेल्कम पाउडर' घोषित किया था. वहीं निर्यात करने वाली फर्म की पहचान अफगानिस्तान के कंधार स्थित हसन हुसैन लिमिटेड के रूप में की गई है. जब ये कन्साइनमेंट अफ़ग़ानिस्तान से होकर ईरान और ईरान से गुजरात के कच्छ के मुंद्रा पोर्ट पहुंची, तब डीआरआई (DRI) और कस्टम ने इसकी जांच की. जब जाकर इस बात का खुलासा हुआ कि ये टेलकम पावडर की आड़ में करोड़ो की ड्रग्स थी.
कंटेनरों को आंध्र प्रदेश के विजयवाडा स्थित आशी ट्रेडिंग फर्म द्वारा अफगानिस्तान से ईरान और ईरान से मुंद्रा पोर्ट पर आयात किया गया था. आयात करने वाले आशी ट्रेडिंग फर्म चलाने वाली दंपति सुधाकर और वैशाली को चैन्नई से गिरफ्तार कर लिया गया है. भुज की कोर्ट में दोनों आरोपी पति-पत्नी को 10 दिन की रिमांड पर डीआरआई (DRI) को सौंप दिया है.
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जानकारी के मुताबिक इस पूरे मामले में शामिल और भी कई बड़े लोगों की गिरफ्तारी हो सकती है. सोमवार की रात भी डीआरआई ने दिल्ली से 2 अफगान नागरिकों समेत एक भारतीय नागरिक को हिरासत में लिया है. अब तक इस पूरे मामले में 5 लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है.
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार इसी साल जून महीने में एक बड़ा ड्रग्स कंसाइनमेंट डीआरआई और कस्टम की लापरवाही से निकल गया था. वो ड्रग्स कंसाइनमेंट जहां पहुंचना था, वहां पहुंच गया है. अब इस पूरे मामले में कस्टम और डीआरआई के कुछ स्थानीय अफसरों की भूमिका भी शक के दायरे में है. अगर इस पूरे मामले में एनआईए से जांच कराई जाए तो कई और बड़े खुलासे हो सकते हैं.
अब तक कुल 7 गिरफ्तार
3000 किलो हेरोइन की तस्करी के इस मामले में डीआरआई ने 4 अफगान नागरिकों समेत 5 और लोगों को गिरफ्तार किया है. इस मामले में अब तक कुल सात गिरफ्तारियां हो चुकी हैं. पकड़े गए आरोपियों से लगातार पूछताछ की जा रही है.
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आपको बता दें कि जिस जहाज से ये नशे की खेप भारत आई उसका संचालन एक ईरानी कंपनी करती है. जबकि कच्छ की मुंद्रा बंदरगाह का संचालन अडानी कंपनी के हाथों में है. यह नशे की खेप अफगानिस्तान से आई थी. जिसे चेन्नई के एक पते पर भेजा जाना था. इस कंसाइनमेंट को टैल्क स्टोन्स के रूप में पेश किया गया था.
(कच्छ से कौशिक कंठेचा का इनपुट)