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प्रिंस मर्डर केसः तारीख पर तारीख मिली, परिजनों को है इंसाफ की दरकार

वर्ष 2017 में 8 सितंबर का दिन 7 साल के मासूम प्रिंस के लिए उसकी जिंदगी का आखरी दिन बन गया था. उसी दिन गुरुग्राम के एक निजी स्कूल में उसकी गला रेत कर हत्या कर दी गई थी. कातिल कोई और नहीं बल्कि स्कूल का ही एक नाबालिग छात्र बताया गया था.

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7 साल के मासूम प्रिंस का परिवार आज भी इंसाफ का इंतजार कर रहा है
7 साल के मासूम प्रिंस का परिवार आज भी इंसाफ का इंतजार कर रहा है
स्टोरी हाइलाइट्स
  • 3 साल पहले हुआ था मासूम का कत्ल
  • स्कूल में मिली थी मासूम की लाश
  • सीबीआई ने किया था केस का खुलासा

गुरुग्राम के चर्चित प्रिंस हत्याकांड के तीन साल बीत जाने के बाद भी पीड़ित परिवार को इंसाफ की दरकार है. प्रिंस के परिजनों का कहना है कि उन्हें तारीख पर तारीख मिली, लेकिन अभी तक इंसाफ नहीं मिला. उनका कहना है कि बीते 3 साल में वे 300 से 400 बार कोर्ट की तारीखों पर गए हैं. लेकिन अभी तक प्रिंस का परिवार देश की सबसे बड़ी अदालत के फैसले का इंतजार कर रहा है.

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वर्ष 2017 में 8 सितंबर का दिन 7 साल के मासूम प्रिंस के लिए उसकी जिंदगी का आखरी दिन बन गया था. उसी दिन गुरुग्राम के एक निजी स्कूल में उसकी गला रेत कर हत्या कर दी गई थी. गुरुग्राम पुलिस ने इस सनसनीखेज हत्याकांड को रफा-दफा करने के मकसद से 24 घंटे में ही स्कूल बस के कंडक्टर अशोक को आरोपी बनाकर गिरफ्तार कर लिया था. जबकि प्रिंस का परिवार लगातार सीबीआई जांच की मांग करता रहा. आखिर परिजनों की मांग पर 2 महीने बाद प्रिंस हत्याकांड की जांच CBI को सौंपी गई.

जब सीबीआई ने इस मामले को खंगाला तो गुरुग्राम पुलिस की थ्योरी पूरी तरह से बेबुनियाद और कोरी कहानी निकली. सीबीआई ने इस मामले में पुलिस की थ्योरी को चैलेंज करते हुए आरोपी के रूप में उसी स्कूल के एक 16 वर्षीय छात्र को गिरफ्तार किया था. दरअसल सीबीआई ने जांच में पाया कि पीटीएम (पेरेंट्स मीटिंग कैंसिल) करवाने के मकसद से उसी स्कूल की 11वीं क्लास के लड़के ने 7 साल के मासूम का कत्ल किया था. लेकिन हैरानी की बात ये है कि 3 साल बीत जाने पर भी प्रिंस हत्याकांड का ट्रायल शुरू नहीं हो पाया है. 

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प्रिंस के पिता बरुन ठाकुर ने आजतक से बात करते हुए कहा कि प्रिंस के कत्ल के बाद उनका पूरा परिवार इंसाफ का इंतजार कर रहा है. जबकि प्रदेश सरकार ने सिर्फ एक हफ्ते में चार्जशीट दाखिल करने का आश्वासन दिया था. हत्यारोपी छात्र का परिवार अकूत संपत्ति का मालिक है. आरोपी पक्ष बार-बार कोर्ट में याचिका लगाकर सुनवाई को टालता रहा है. 

हैरानी की बात ये है कि 300 से 400 बार कोर्ट की तारीख लगने के बाद भी केस का ट्रायल अभी तक शुरू नहीं हुआ है. प्रिंस के पिता सवाल उठाते हैं कि निचली अदालत से लेकर शीर्ष अदालत यानी सुप्रीम कोर्ट से भी आरोपी की जमानत याचिका रद्द हो चुकी है. इसके बाद भी आरोपी पक्ष बेवजह नई-नई याचिकाएं लगाता रहा है. 

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वहीं आरोपी पक्ष के अधिवक्ता संदीप अनेजा की मानें तो याचिकाएं कोर्ट की प्रोसिडिंग के तहत लगाई जा रही हैं. मामला कोर्ट में विचाराधीन है. हम अभी तक अपने पक्ष को माननीय अदालत के सामने रखते आए हैं. फिर भी कई बार जमानत याचिकाएं और आरोपी की उम्र को लेकर लगाई गई याचिकाएं रद्द होती आई हैं. अब मामला सर्वोच्च न्यायलय में लंबित है और जल्द ही इसकी सुनवाई भी होनी है.

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मासूम प्रिंस की मां उस दुर्भाग्यपूर्ण दिन को याद करके सहम जाती हैं. उनकी आंखें नम हो जाती हैं. वो कहती हैं कि दिक्कतें तो बहुत आई हैं, लेकिन एक ही बात मन मे थी कि हमें हमारे बच्चे को इंसाफ दिलाना है. परेशानियां तो बहुत हैं, इनको भी ऑफिस देखना पड़ता है. हमें भी घर चलाना पड़ता है. इसके अलावा कोर्ट की भागदौड़ भी ज्यादा है. लेकिन इसके बावजूद अगर इंसाफ मिल जाता है तो हमें लगेगा कि मेरे बच्चे को न्याय मिल गया है. हमारे यहां सबसे बड़ी समस्या ये है कि छोटे-छोटे बच्चों के साथ बहुत ज्यादा अपराध हो रहे हैं. 

प्रिंस की मां ने कहा कि जो बच्चे खुद के लिए भी नहीं लड़ सकते हैं, तो सबसे पहले इसके लिए कानून बनना चाहिए. जो इंसान ऐसी हरकत करता है, उन्हें सजा मिले. एक दो को भी कड़ी सजा मिल गई तो उससे डर बना रहेगा. इस तरह की हरकतों पर अंकुश लग सकेगा. बच्चे हर घर में हैं, चाहे वह गरीब का हो या अमीर का. इसके लिए सरकार को कोई ठोस कदम उठाने चाहिए. ताकि बच्चे सुरक्षित रहें. हमें न्याय व्यवस्था पर भरोसा है. 

इस केस का नाबालिग आरोपी किशोर अभी भी बाल सुधार गृह में है. आरोपी पक्ष ने जमानत के लिए हर कोर्ट में अपील की है. हर तरह से अपील की गई. एक याचिका पर तो कोर्ट ने 21 हजार रुपये का जुर्माना भी लगा दिया था. कोर्ट ने कहा था कि ये याचिका बेसलेस है. सभी याचिकाएं केस को लेट करने का प्रयास ही थीं. 

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सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले पर दिए गए फैसले में कहा कि तमाम पक्षकारों को विस्तार से सुना गया है. इस केस में हाई कोर्ट के आदेश में दखल का कोई कारण नहीं है. ऐसे में विशेष अनुमति याचिका खारिज की जाती है. मृतक प्रिंस (बदला हुआ नाम) के पिता के वकील सुशील टेकरीवाल ने बताया कि मामले में उनकी ओर से दाखिल की गई जमानत याचिका का सीबीआई ने विरोध किया था. 

इससे पहले पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट ने प्रिंस की हत्या मामले में मुख्य आरोपी की जमानत याचिका को खारिज कर दिया था, जिसे सुप्रीम कोर्ट ने बरकरार रखा है. आरोपी फिलहाल करनाल के बाल सुधार गृह में बंद है. 

 

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