हिमाचल प्रदेश में क्रिप्टोकरेंसी के नाम पर करोड़ों रुपये की धोखाधड़ी किए जाने के मामले में विशेष जांच टीम (SIT) ने सात और लोगों को गिरफ्तार किया है. पकड़े गए सभी आरोपी फर्जी निवेश योजनाओं के ज़रिए पीड़ितों को लुभाने के काम में शामिल थे. धोखाधड़ी का शिकार होने वालों में प्रदेश के एक हजार से ज्यादा पुलिसकर्मी भी शामिल हैं. कईं पुलिसवाले तो वीआरएस लेकर केवल इसी काम में जुट गए थे.
हिमाचल के पुलिस मुख्यालय ने एक बयान जारी करके कहा है कि सभी आरोपियों ने इस धोखाधड़ी के मामले में अलग-अलग भूमिका निभाई है. सभी आरोपियों ने बैक-एंड ऑफिस गतिविधियों और डेटाबेस मैनेजमेंट, कम्यूनिकेशन कॉ-ऑरडिनेशन, टेक्निकल सपोर्ट देने, वित्तीय लेनदेन का प्रबंधन करने और मनी फ्लो को संभालने का काम किया.
हाल ही में पकड़े गए आरोपियों को दस दिन की पुलिस हिरासत में भेज दिया गया है. पीएचक्यू (PHQ) ने अपने बयान में कहा है कि इस मामले की जांच का मकसद अब सबूत इकट्ठा करना और घोटाले में शामिल सभी लोगों को कटघरे में खड़ा करना और पैसे के लेन-देन से जुड़े सुरागों का पता लगाना है.
पुलिस ने बताया कि एक आरोपी को छोड़कर सभी हिमाचल प्रदेश के रहने वाले हैं. आरोपियों की पहचान हमीरपुर निवासी अमित प्रदीप सिंह, कांगड़ा निवासी गोविंद गोस्वामी, मंडी निवासी संजय कुमार, केवल सिंह, दिग्विजेंदर सिंह, पारस राम सेन और हरियाणा के पंचकुला निवासी राधिका शर्मा के तौर पर हुई है.
घोटालेबाजों ने कम समय में अच्छे रिटर्न का वादा करके भोले-भाले लोगों को लुभाया और निवेशकों का एक नेटवर्क बनाया. इसमें तीन से चार प्रकार की क्रिप्टोकरेंसी का उपयोग किया गया और झूठी वेबसाइटें बनाई गईं, जिनमें क्रिप्टोकरेंसी की कीमतों में हेरफेर किया गया और उन्हें बढ़ाया गया.
फेक क्रिप्टोकरेंसी की फर्जी वेबसाइट
हिमाचल पुलिस के अनुसार, क्रिप्टोकरेंसी धोखाधड़ी में जालसाजों ने कम से कम एक लाख लोगों को धोखा दिया है. पुलिस ने 2.5 लाख आईडी बरामद किए हैं, जो एक ही शख्स के हैं. निवेशकों को आकर्षित करने के लिए घोटालेबाजों ने दो क्रिप्टोकरेंसी लॉन्च कीं. एक थी 'कोरवियो कॉइन' (या केआरओ) और दूसरी 'डीजीटी कॉइन,' इन डिजिटल मुद्राओं की कीमतों में हेरफेर करके नकली वेबसाइटें बनाईं गईं.
मोटे रिटर्न का वादा
ठगों ने शुरुआती निवेशकों को कम समय में उच्च रिटर्न का वादा करके लुभाया. उन्होंने निवेशकों का एक नेटवर्क भी बनाया. फिर अपने-अपने दायरे में श्रृंखला का और विस्तार किया. जल्दी अच्छा रिटर्न पाने के चक्कर में पुलिसकर्मी, शिक्षक और अन्य लोग इस योजना में शामिल होते गये. हालांकि इसमें शामिल अधिकांश पुलिसकर्मियों को नुकसान उठाना पड़ा.
VRS लेकर प्रमोटर बने कुछ पुलिसवाले
लेकिन उन पुलिसवालों ने योजना का जो प्रचार किया, उसने दूसरे निवेशकों के बीच विश्वास पैदा किया. निवेश योजना को विश्वसनीयता प्रदान की. एक पुलिस अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर गुरुवार को समाचार एजेंसी PTI को बताया कि क्रिप्टोकरेंसी योजना में शामिल कुछ पुलिसकर्मियों ने इस काम के चक्कर में स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति योजना (VRS) तक ले लिया था और वे इस योजना के प्रमोटर बन गए थे.
आरोपियों से सख्ती से निपटेगा कानून
हिमाचल प्रदेश के डीजीपी संजय कुंडू ने बताया “हम सभी गलत काम करने वालों को पकड़ लेंगे. जांच व्यवस्थित और योजनाबद्ध तरीके से आगे बढ़ रही है.” उन्होंने कहा कि घोटाले में शामिल सभी लोगों से कानून के मुताबिक सख्ती से निपटा जाएगा.
क्या होती है क्रिप्टोकरेंसी?
क्रिप्टोकरेंसी एक डिजिटल मुद्रा है, जिसे ब्लॉकचेन-आधारित कंप्यूटर नेटवर्क और विनिमय के माध्यम से काम करने के लिए डिज़ाइन किया गया है. और यह काम करने के लिए सरकार या बैंक जैसे किसी केंद्रीय प्राधिकरण पर निर्भर नहीं है.
साल 2018 में शुरू हुआ था ये घोटाला
हिमाचल पुलिस के मुताबिक, यह घोटाला 2018 में शुरू हुआ. जिसमें अधिकांश पीड़ित मंडी, हमीरपुर और कांगड़ा जिलों के थे. कुछ मामलों में एक अकेले व्यक्ति ने 1,000 लोगों को इस योजना में शामिल किया था. पुलिस ने पहले कहा था कि आरोपियों ने अपनी योजना पर नियंत्रण बनाए रखने के लिए गलत सूचना, धोखे और धमकियों का इस्तेमाल किया और क्रिप्टोकरेंसी की कीमतों में हेरफेर करके निवेशकों से पैसा निकालते रहे. जिसकी वजह से पीड़ितों को भारी नुकसान हुआ.
3 से 4 तरह की क्रिप्टोकरेंसी
घोटालेबाजों ने स्थानीय रूप से निर्मित क्रिप्टोकरेंसी 'कोरवियो कॉइन' या केआरओ कॉइन से संबंधित निवेश योजना के साथ लोगों से संपर्क किया और उनके खातों को सक्रिय करने के लिए प्रारंभिक सक्रियण शुल्क लिया. इस योजना में तीन से चार तरह की क्रिप्टोकरेंसी का इस्तेमाल किया गया.
लॉन्च किया था नया सिक्का
घोटालेबाजों ने अपने सिक्कों को लिस्टेड करने के लिए नकली वेबसाइटें बनाईं और उनकी कीमतों में हेरफेर किया. बाद में उन्होंने 'डीजीटी कॉइन' नाम से एक नया सिक्का लॉन्च किया. जब पर्याप्त लोगों ने इन सिक्कों को ऊंची कीमत पर खरीद लिया, तो जानबूझकर इसकी कीमत कम कर दी गई. जिससे निवेशकों को बड़े पैमाने पर नुकसान हुआ.
फर्जी जमा योजनाएं
पुलिस ने कहा कि जांच से यह भी पता चला है कि क्रिप्टोकरेंसी के अलावा आरोपियों ने अन्य जमा योजनाएं भी चलाईं, जैसे 90,000 रुपये की जमा राशि पर 10 प्रतिशत मासिक रिटर्न दिया जा रहा था. अब पुलिस ने आम जनता को आगाह किया है कि यदि कोई योजना 12 प्रतिशत से अधिक वार्षिक रिटर्न का वादा करती है, तो सावधान रहें.
दो आरोपी गिरफ्तार
इसी महीने की शुरुआत में पुलिस ने दो मुख्य आरोपियों सुखदेव और हेमराज को गुजरात से गिरफ्तार किया था. उन दोनों ने लंबी पूछताछ के दौरान कुबूल किया कि उन पर 400 करोड़ रुपये की देनदारियां बकाया हैं. पुलिस का कहना है कि इस पूरे घोटाले का सरगना सुभाष अभी भी फरार है. उसकी तलाश की जा रही है.