Indian Penal Code: भारत सरकार के खिलाफ जंग की साजिश करने और उसे छुपाने की बात तो धारा 123 में परिभाषित है. लेकिन भारत के किसी एशियाई मित्र देश के खिलाफ जंग को लेकर भी आईपीसी में प्रावधान है. आईपीसी की धारा 125 (Section 125) में बताया गया है कि भारत सरकार से मैत्री संबंध रखने वाली किसी एशियाई शक्ति के विरुद्ध युद्ध करना भी अपराध है. चलिए जान लेते हैं कि आईपीसी की धारा 125 इस बारे में क्या जानकारी देती है?
आईपीसी की धारा 125 (Indian Penal Code Section 125)
भारतीय दंड संहिता 1860 की धारा 125 (Section 125) में भारत सरकार से दोस्ताना संबंध रखने वाली किसी एशियाई शक्ति के खिलाफ जंग छेड़ना भी अपराध करार दिया गया है. IPC की धारा 125 के अनुसार, जो कोई भारत सरकार (Indian government) से मैत्री का या शांति (Friendship or peace) का संबंध रखने वाली किसी एशियाई शक्ति के विरुद्ध युद्ध (War against asian power) करेगा या ऐसा युद्ध करने का प्रयत्न करेगा, या ऐसा युद्ध करने के लिए किसी को उकसाएगा (Abet) तो ऐसे व्यक्ति पर भारतीय दंड संहिता की धारा 125 के तहत एक्शन होगा.
सजा का प्रावधान
ऐसे मामले में दोषी पाए जाने पर अधिकतम आजीवन कारावास (Life imprisonment) की सजा का प्रावधान (Punishment provision) है. साथ ही दोषी पर जुर्माना भी लगाया जा सकेगा. या फिर उसे दोनों ही तरह से दंडित किया जाएगा.
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क्या होती है आईपीसी (IPC)
भारतीय दंड संहिता (Indian Penal Code) IPC भारत में यहां के किसी भी नागरिक (Citizen) द्वारा किये गये कुछ अपराधों (certain offenses) की परिभाषा (Definition) और दंड (Punishment) का प्रावधान (Provision) करती है. आपको बता दें कि यह भारत की सेना (Indian Army) पर लागू नहीं होती है. पहले आईपीसी (IPC) जम्मू एवं कश्मीर में भी लागू नहीं होती थी. लेकिन धारा 370 हटने के बाद वहां भी आईपीसी लागू हो गई. इससे पहले वहां रणबीर दंड संहिता (RPC) लागू होती थी.
अंग्रेजों ने लागू की थी IPC
ब्रिटिश कालीन भारत (British India) के पहले कानून आयोग (law commission) की सिफारिश (Recommendation) पर आईपीसी (IPC) 1860 में अस्तित्व में आई. और इसके बाद इसे भारतीय दंड संहिता (Indian Penal Code) के तौर पर 1862 में लागू किया गया था. मौजूदा दंड संहिता को हम सभी भारतीय दंड संहिता 1860 के नाम से जानते हैं. इसका खाका लॉर्ड मेकाले (Lord Macaulay) ने तैयार किया था. बाद में समय-समय पर इसमें कई तरह के बदलाव किए जाते रहे हैं.