Indian Penal Code: भारत सरकार के किसी मित्र देश से जंग के दौरान या वहां लूटपाट करने की घटनाएं भारतीय दंड संहिता की धारा 125 और 126 के तहत आती हैं. लेकिन ऐसी जंग या लूटपाट से संपत्ति हासिल करने का मामला आईपीसी की धारा 127 के तहत आता है. चलिए जान लेते हैं कि भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 127 इस तरह के मामलों में क्या प्रावधान करती है?
आईपीसी की धारा 127 (Indian Penal Code Section 127)
भारतीय दंड संहिता 1860 की धारा 127 (Section 127) के अनुसार, जो कोई किसी संपत्ति (Property) को यह जानते हुए प्राप्त करेगा कि वह धारा 125 और 126 में बताए गए अपराधों को कारित (Commit crimes) कर हासिल की गई है तो ऐसे व्यक्ति के खिलाफ धारा 127 लागू होगी. वह इस धारा के अधीन अपराधी (Offender) माना जाएगा. यह एक संगीन अपराध (Capital crime) माना जाता है, जो समझौता करने योग्य नहीं है. इसकी सुनवाई किसी भी उच्च मजिस्ट्रेट (Higher magistrate) द्वारा की जाती है.
सजा का प्रावधान
ऐसा व्यक्ति, जिस पर धारा 127 लागू होती है और वह दोषी (Guilty) पाया जाता है तो उसे किसी एक अवधि के लिए कारावास की सजा (Sentence of imprisonment) दी जा सकती है, जिसे सात वर्ष तक बढ़ाया जा सकता है. दोषी पर आर्थिक जुर्माना (Monetary penalty) भी लगाया जा सकता है. ज़रुरत पड़ने पर दोषी को दोनों प्रकार से दंडित किया जाएगा.
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क्या होती है आईपीसी (IPC)
भारतीय दंड संहिता (Indian Penal Code) IPC भारत में यहां के किसी भी नागरिक (Citizen) द्वारा किये गये कुछ अपराधों (certain offenses) की परिभाषा (Definition) और दंड (Punishment) का प्रावधान (Provision) करती है. आपको बता दें कि यह भारत की सेना (Indian Army) पर लागू नहीं होती है. पहले आईपीसी (IPC) जम्मू एवं कश्मीर में भी लागू नहीं होती थी. लेकिन धारा 370 हटने के बाद वहां भी आईपीसी लागू हो गई. इससे पहले वहां रणबीर दंड संहिता (RPC) लागू होती थी.
अंग्रेजों ने लागू की थी IPC
ब्रिटिश कालीन भारत (British India) के पहले कानून आयोग (law commission) की सिफारिश (Recommendation) पर आईपीसी (IPC) 1860 में अस्तित्व में आई. और इसके बाद इसे भारतीय दंड संहिता (Indian Penal Code) के तौर पर 1862 में लागू किया गया था. मौजूदा दंड संहिता को हम सभी भारतीय दंड संहिता 1860 के नाम से जानते हैं. इसका खाका लॉर्ड मेकाले (Lord Macaulay) ने तैयार किया था. बाद में समय-समय पर इसमें कई तरह के बदलाव किए जाते रहे हैं.