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IPC Section 176: अधिकारी को सूचना देने में गलती करने पर लागू होती है ये धारा

आईपीसी की धारा 176 (IPC Section 176) में सूचना या इत्तिला (Information) देने के लिए वैध रूप से आबद्ध व्यक्ति द्वारा लोक सेवक (Public Servant) को सूचना या इत्तिला देने का लोप परिभाषित (Define) किया गया है. आइए जानते हैं कि आईपीसी (IPC) की धारा 176 इस बारे में क्या बताती है?

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सूचना देने में गलती करने से संबंधित है ये धारा
सूचना देने में गलती करने से संबंधित है ये धारा
स्टोरी हाइलाइट्स
  • सूचना देने में गलती करने से संबंधित है ये धारा
  • अंग्रेजी शासनकाल में लागू हुई थी आईपीसी
  • जुर्म और सजा का प्रावधान बताती है IPC

Indian Penal Code: भारतीय दंड संहिता में कई प्रकार के अपराध (Offence) और उनकी सजा को परिभाषित किया गया है. इसमें कइई मामले लोक सेवकों से संबंधित हैं. ऐसे ही आईपीसी की धारा 176 (IPC Section 176) में सूचना या इत्तिला (Information) देने के लिए वैध रूप से आबद्ध व्यक्ति द्वारा लोक सेवक (Public Servant) को सूचना या इत्तिला देने का लोप परिभाषित (Define) किया गया है. आइए जानते हैं कि आईपीसी (IPC) की धारा 176 इस बारे में क्या बताती है?

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आईपीसी की धारा 176 (Indian Penal Code Section 176) 
भारतीय दंड संहिता 1860 की धारा 176 (Section 176) में स्पष्ट किया गया है कि लोक सेवक को नोटिस या सूचना देने में उस व्यक्ति द्वारा चूक किए जाना, जो उसे देने के लिए कानूनी रूप से बाध्य है. IPC की धारा 176 के अनुसार, जो कोई किसी लोक सेवक को, ऐसे लोक सेवक के नाते किसी विषय पर कोई सूचना देने या इत्तिला देने के लिए वैध रूप से आबद्ध होते हुए, विधि द्वारा अपेक्षित प्रकार से और समय पर ऐसी सूचना या इत्तिला देने का साशय लोप करेगा, वह अपराधी के तौर पर सजा का हकदार होगा.

सजा का प्रावधान (Punishment provision)
ऐसा करने वाले को दोषी पाए जाने पर साधारण कारावास से दंडित किया जाएगा. जिसकी अवधि एक मास तक की हो सकेगी. या उस पर जुर्माना लगाया जाएगा, जो पांच सौ रुपये तक का हो सकेगा. या फिर उसे दोनों तरह से दंडित किया जाएगा. अगर दी जाने के लिए अपेक्षित सूचना या इत्तिला किसी अपराध के किए जाने के विषय में हो, या किसी अपराध के किए जाने का निवारण करने के प्रयोजन से या किसी अपराधी को पकड़ने के लिए अपेक्षित हो, तो ऐसे में छह मास तक के साधारण कारावास से दंडित किया जाएगा. या दोषी पर एक हजार रुपये तक का जुर्माना होगा. या फिर दोनों प्रकार से उसे दंडित किया जाएगा.

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अगर दी जाने के लिए अपेक्षित सूचना या इत्तिला दण्ड प्रक्रिया संहिता, 18981 (1898 का 5) की धारा 565 की उपधारा (1) के अधीन दिए गए आदेश द्वारा अपेक्षित है, तो वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि छह मास तक की हो सकेगी, या एक हजार रुपये तक के जुर्माने से, या फिर दोनों से ही दंडित किया जाएगा.

इसे भी पढ़ें--- IPC Section 175: दस्तावेज पेश करने में हुई गलती से जुड़ी है आईपीसी की धारा 175 

क्या होती है आईपीसी (IPC)
भारतीय दंड संहिता (Indian Penal Code) IPC भारत में यहां के किसी भी नागरिक (Citizen) द्वारा किये गये कुछ अपराधों (certain offenses) की परिभाषा (Definition) और दंड (Punishment) का प्रावधान (Provision) करती है. आपको बता दें कि यह भारत की सेना (Indian Army) पर लागू नहीं होती है. पहले आईपीसी (IPC) जम्मू एवं कश्मीर में भी लागू नहीं होती थी. लेकिन धारा 370 हटने के बाद वहां भी आईपीसी लागू हो गई. इससे पहले वहां रणबीर दंड संहिता (RPC) लागू होती थी.

अंग्रेजों ने लागू की थी IPC
ब्रिटिश कालीन भारत (British India) के पहले कानून आयोग (law commission) की सिफारिश (Recommendation) पर आईपीसी (IPC) 1860 में अस्तित्व में आई. और इसके बाद इसे भारतीय दंड संहिता (Indian Penal Code) के तौर पर 1862 में लागू किया गया था. मौजूदा दंड संहिता को हम सभी भारतीय दंड संहिता 1860 के नाम से जानते हैं. इसका खाका लॉर्ड मेकाले (Lord Macaulay) ने तैयार किया था. बाद में समय-समय पर इसमें कई तरह के बदलाव किए जाते रहे हैं.

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