भारतीय दंड संहिता (Indian Penal Code) में किसी भी हालात और किसी भी शक्ल में किए गए अपराध के लिए धाराएं और उनके तहत सजा के प्रावधान हैं. कोरोना जैसी महामारी के दौरान सभी डॉक्टर संक्रमित मरीजों को क्वारनटाइन (Quarantine) करने की सलाह दे रहे थे. और ऐसा ना करने वालों के खिलाफ पुलिस ने भी मामले दर्ज किए. वो भी आईपीसी की धारा 271 (Section 271) के तहत. आइए जानते हैं कि आखिर धारा 271 है क्या?
क्या है IPC की धारा 271
भारतीय दंड संहिता यानी आईपीसी की धारा 271 का संबंध क्वारनटाइन (Quarantine) किए जाने से है. अगर कोई शख्स जानबूझकर इस कानून का उल्लंघन करता है. ऐसी जगह पर जहां कोई संक्रामक रोग फैला हो, तब वहां लोगों को जमा करता है, तो इस कानून के तहत वह आरोपी हो सकता है. असल में आईपीसी का यह सेक्शन लॉकडाउन के समय लागू किया जाता है.
ये है सजा का प्रावधान
आईपीसी की धारा 271 के तहत दोषी पाए जाने पर 6 महीने की कैद या जुर्माना या फिर दोनों मिल सकते हैं. आपको बता दें कि कोरोना महामारी के चलते इसी सेक्शन के तहत विदेश से आने वाले या कोरोना के संदिग्ध मरीजों को क्वारनटाइन रहने का आदेश दिया जा रहा था.
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क्या है भारतीय दंड संहिता (IPC)
भारतीय दंड संहिता (Indian Penal Code) IPC भारत में यहां के किसी भी नागरिक द्वारा किये गये कुछ अपराधों की परिभाषा और दंड का प्रावधान करती है. आपको बता दें कि यह भारत की सेना पर लागू नहीं होती है. पहले आईपीसी जम्मू एवं कश्मीर में भी लागू नहीं होती थी. लेकिन धारा 370 हटने के बाद वहां भी आईपीसी लागू हो गई. इससे पहले वहां रणबीर दंड संहिता (RPC) लागू होती थी.
अंग्रेजों ने लागू की थी आईपीसी
ब्रिटिश काल में लागू हुई थी आईपीसीब्रिटिश कालीन भारत के पहले कानून आयोग की सिफारिश पर आईपीसी 1860 में अस्तित्व में आई. और इसके बाद इसे भारतीय दंड संहिता के तौर पर 1 जनवरी 1862 को लागू किया गया था. मौजूदा दंड संहिता को हम सभी भारतीय दंड संहिता 1860 के नाम से जानते हैं. इसका खाका लॉर्ड मेकाले ने तैयार किया था. बाद में समय-समय पर इसमें कई तरह के बदलाव किए जाते रहे.
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