Indian Penal Code: भारतीय दंड संहिता के हर अध्याय (Chapter) में कई धाराएं (Sections) मौजूद हैं, जो हमें जुर्म (Offence) और उसकी सजा (Punishment) के साथ-साथ कई शब्दों के अर्थ (Meaning of words) और उनकी परिभाषा (Definition) भी बताती है. ऐसे ही आईपीसी (IPC) की धारा 53 (Section 53) कानूनीतौर पर 'दण्ड' को परिभाषित (defined) करती है. तो चलिए जानते हैं कि आईपीसी (IPC) की धारा 53 इस पर क्या कहती है?
आईपीसी की धारा 53 (IPC Section 53)
भारतीय दंड संहिता (Indian Penal Code) की धारा 53 (Section 53) में IPC की धारा 53 के अनुसार अपराधी (offender) इस संहिता के उपबंधों (Sub-Section) अधीन जिन दण्डों से दण्डनीय (punishable) हैं, वे ये हैं-
पहला - मॄत्यु (Death)
दूसरा - आजीवन कारावास (Imprisonment for life)
तीसरा - 1949 के अधिनियम 17 (Act 17) की धारा 2 द्वारा निरस्त (canceled) कर दिया गया था
चौथा - कारावास (Imprisonment), जो दो प्रकार का है -
1 - कठिन (Rigorous), अर्थात् कठोर श्रम के साथ (with hard labour)
2 - साधारण
पांचवा - सम्पत्ति का समपहरण (Forfeiture of property)
छंठवा - आर्थिक जुर्माना (Fine)
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क्या होती है आईपीसी (IPC)
भारतीय दंड संहिता (Indian Penal Code) IPC भारत में यहां के किसी भी नागरिक (Citizen) द्वारा किये गये कुछ अपराधों (certain offenses) की परिभाषा (Definition) और दंड (Punishment) का प्रावधान (Provision) करती है. आपको बता दें कि यह भारत की सेना (Indian Army) पर लागू नहीं होती है. पहले आईपीसी (IPC) जम्मू एवं कश्मीर में भी लागू नहीं होती थी. लेकिन धारा 370 हटने के बाद वहां भी आईपीसी लागू हो गई. इससे पहले वहां रणबीर दंड संहिता (RPC) लागू होती थी.
अंग्रेजों ने लागू की थी IPC
ब्रिटिश कालीन भारत (British India) के पहले कानून आयोग (law commission) की सिफारिश (Recommendation) पर आईपीसी (IPC) 1860 में अस्तित्व में आई. और इसके बाद इसे भारतीय दंड संहिता (Indian Penal Code) के तौर पर 1862 में लागू किया गया था. मौजूदा दंड संहिता को हम सभी भारतीय दंड संहिता 1860 के नाम से जानते हैं. इसका खाका लॉर्ड मेकाले (Lord Macaulay) ने तैयार किया था. बाद में समय-समय पर इसमें कई तरह के बदलाव किए जाते रहे हैं.